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Agri Tips: अप्रैल में बढ़ते तापमान के कारण खीरा, ककड़ी और तरबूज में फल व जड़ सड़न की समस्या तेजी से बढ़ती है. इससे बचाव के लिए किसान कार्बेन्डाजिम, मैनकोजेब या इंडोफिल एम-45 का छिड़काव करें. साथ ही 4-5 दिन के अंतराल पर शाम को…
Agri Tips: अप्रैल का महीना कद्दू वर्गीय सब्जियों की खेती करने वाले किसानों के लिए बेहद संवेदनशील माना जाता है. इस समय बढ़ता तापमान फसलों पर सीधा असर डालता है, जिससे उत्पादन प्रभावित होने का खतरा बढ़ जाता है. यदि किसानों ने इन दिनों तोरई, खीरा, ककड़ी, तरबूज या लौकी जैसी फसलें लगा रखी हैं, तो उन्हें विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है.
सीधी कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक प्रमुख डॉ. शैलेंद्र गौतम के अनुसार, अप्रैल में तापमान तेजी से बढ़ता है, जो कद्दू वर्गीय सब्जियों के लिए घातक साबित हो सकता है. इस दौरान फसलों में फल सड़न और जड़ सड़न जैसी समस्याएं तेजी से फैलती हैं, जो मुख्य रूप से फफूंद जनित रोगों के कारण होती हैं. समय रहते इनका नियंत्रण नहीं किया गया तो किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है.
हर 10 दिन पर करें छिड़काव
डॉ. शैलेंद्र गौतम के अनुसार खीरा, ककड़ी और तरबूज में फल सड़न की समस्या आम हो जाती है. इससे बचाव के लिए किसान कार्बेन्डाजिम, मैनकोजेब या इंडोफिल एम-45 जैसी फफूंदनाशक दवाओं का 10 दिन के अंतराल पर छिड़काव करें. इसके अलावा रेडोमिल गोल्ड (2 ग्राम प्रति लीटर पानी), रोको फंगीसाइड (2 ग्राम प्रति लीटर) और साफ का प्रयोग भी काफी प्रभावी माना गया है.
शाम को करें सिंचाई
कृषि सलाहकार अवनीश पटेल ने बताया, गर्मी के मौसम में फसलों में नमी बनाए रखना सबसे जरूरी होता है. नमी की कमी से पौधे सूखने लगते हैं और उनकी वृद्धि रुक जाती है. ऐसे में किसानों को 4-5 दिन के अंतराल पर सिंचाई करनी चाहिए, लेकिन ध्यान रखें कि सिंचाई हमेशा शाम के समय ही करें. इससे पानी का बेहतर उपयोग होता है और पौधों को अधिक लाभ मिलता है.
जलभराव से बचाएं
साथ ही खेत में जलभराव से बचना भी बेहद जरूरी है, क्योंकि अधिक पानी भी जड़ों में सड़न पैदा कर सकता है. खेत की उचित जल निकासी व्यवस्था बनाए रखना किसानों के लिए फायदेमंद रहेगा. साथ ही नियमित रूप से फसल की निगरानी करते रहें, ताकि किसी भी रोग या कीट का समय रहते नियंत्रण किया जा सके.
अप्रैल में सही सिंचाई प्रबंधन, समय पर दवा का छिड़काव और फसल की देखभाल से किसान अपनी सब्जियों को सुरक्षित रख सकते हैं. उचित प्रबंधन अपनाकर न केवल फसल को नुकसान से बचाया जा सकता है, बल्कि बेहतर गुणवत्ता के साथ बंपर पैदावार भी हासिल की जा सकती है.
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एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें