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Largest margin of victory in Test: टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में हार-जीत तो आम है, लेकिन कुछ मुकाबले ऐसे रहे जहां मैदान पर जीत नहीं, बल्कि ‘तबाही’ मची. जब रनों का पहाड़ खड़ा हुआ और विरोधी टीमें ताश के पत्तों की तरह ढह गईं. तब जन्म हुआ उन 5 ऐतिहासिक जीतों का जिन्होंने क्रिकेट की परिभाषा बदल दी. इंग्लैंड के 579 रनों के अजेय रिकॉर्ड से लेकर गाबा के मैदान पर कंगारुओं के कहर तक, आइए जानते हैं टेस्ट क्रिकेट की उन सबसे बड़ी जीतों के बारे में.
टेस्ट की पांच सबसे बड़ी जीत.
नई दिल्ली. टेस्ट क्रिकेट का इतिहास 149 साल पुराना है. इसे जेंटल मैन गेम कहा जाता है. जहां धैर्य और कौशल की असली परीक्षा होती है. कभी-कभी यह खेल इतना रोमांचक हो जाता है कि हार-जीत का फैसला आखिरी गेंद पर होता है. लेकिन इतिहास में कुछ ऐसे भी पल आए हैं जब एक टीम ने दूसरी टीम को इस कदर पस्त किया कि वह मुकाबले में कहीं नजर ही नहीं आई. जब हम टेस्ट क्रिकेट में ‘पारी से जीत’ की बात करते हैं, तो इसका मतलब होता है कि विपक्षी टीम अपनी दो पारियों में भी विजेता टीम के पहली पारी के स्कोर की बराबरी नहीं कर पाई. आइए, टेस्ट इतिहास की उन 5 सबसे बड़ी जीतों की दास्तां जानते हैं, जहां मैदान पर केवल एक ही टीम का दबदबा रहा.
क्रिकेट के इतिहास में सबसे बड़ी जीत का ताज इंग्लैंड के नाम है. साल 1938 में एशेज सीरीज के दौरान द ओवल के मैदान पर जो हुआ, उसने क्रिकेट की किताबों में एक ऐसा अध्याय लिख दिया जिसे आज तक कोई नहीं दोहरा पाया. इंग्लैंड ने अपनी पहली पारी में रनों का एवरेस्ट खड़ा करते हुए 7 विकेट पर 903 रन बनाकर पारी घोषित की. इसमें महान बल्लेबाज लेन हटन ने अकेले 364 रनों की रिकॉर्ड पारी खेली थी. इसके जवाब में ऑस्ट्रेलियाई टीम पहली पारी में 201 और दूसरी पारी में मात्र 123 रनों पर ढेर हो गई. इंग्लैंड ने यह मुकाबला एक पारी और 579 रनों के विशाल अंतर से जीता. यह जीत इतनी बड़ी थी कि आज 88 साल बाद भी इसके आस-पास कोई नहीं पहुंच सका है.
टेस्ट की पांच सबसे बड़ी जीत.
जोहान्सबर्ग में कंगारूओं का प्रहार
21वीं सदी की शुरुआत में ऑस्ट्रेलियाई टीम अपने स्वर्ण युग में थी. 22 फरवरी 2002 को जोहान्सबर्ग के मैदान पर उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ अपनी ताकत का प्रदर्शन किया. ऑस्ट्रेलिया ने पहली पारी में 652 रनों का विशाल स्कोर बनाया, जिसमें एडम गिलक्रिस्ट के तूफानी 204 रन शामिल थे. दक्षिण अफ्रीका की टीम अपनी घरेलू परिस्थितियों के बावजूद ऑस्ट्रेलियाई आक्रमण के सामने घुटने टेक गई. वह पहली पारी में 159 और दूसरी पारी में 133 रनों पर सिमट गए. ऑस्ट्रेलिया ने इस मैच को एक पारी और 360 रनों से जीतकर टेस्ट इतिहास की दूसरी सबसे बड़ी जीत दर्ज की.
बुलावायो में न्यूजीलैंड का धमाका
क्रिकेट के मॉडर्न युग में भी बड़े अंतर वाली जीत देखने को मिली है. हाल में 7 अगस्त 2025 को न्यूजीलैंड की टीम ने जिम्बाब्वे के खिलाफ बुलावायो में एक ऐसा ही कारनामा किया. कीवी बल्लेबाजों ने मैदान के हर कोने में रन बरसाए और जिम्बाब्वे के गेंदबाजों को बेबस कर दिया. इस मुकाबले में न्यूजीलैंड ने जिम्बाब्वे को एक पारी और 359 रनों के अंतर से करारी शिकस्त दी. यह जीत न्यूजीलैंड के टेस्ट इतिहास की सबसे यादगार जीत बन गई, जहां उनके गेंदबाजों और बल्लेबाजों ने एक अनुशासित और आक्रामक खेल का प्रदर्शन करते हुए जिम्बाब्वे को मुकाबले से पूरी तरह बाहर कर दिया.
ईडन गार्डन्स पर वेस्टइंडीज की आंधी
भारत का ऐतिहासिक मैदान ईडन गार्डन्स कई यादगार मैचों का गवाह रहा है, लेकिन 31 दिसंबर 1958 को यहां एक ऐसा मैच शुरू हुआ जिसे भारतीय प्रशंसक शायद ही याद रखना चाहें. उस समय वेस्टइंडीज की टीम दुनिया की सबसे खतरनाक टीमों में से एक थी. उन्होंने भारत के खिलाफ अपनी पहली पारी में 527 रनों का पहाड़ खड़ा किया. भारतीय टीम वेस्टइंडीज की तेज गेंदबाजी के सामने टिक नहीं पाई और पहली पारी में 124 तथा दूसरी पारी में 154 रनों पर ढेर हो गई. वेस्टइंडीज ने यह मैच एक पारी और 336 रनों से जीता. यह आज भी एशियाई धरती पर रनों के लिहाज से सबसे बड़ी हार और जीत के रूप में दर्ज है.
गाबा में इंग्लैंड की दुर्गति
दूसरे वर्ल्ड वॉर के बाद जब क्रिकेट की दोबारा बहाली हुई, तब 29 नवंबर 1946 को ब्रिस्बेन (गाबा) में पारंपरिक प्रतिद्वंद्वी ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड आमने-सामने थे. ऑस्ट्रेलिया ने अपनी पहली पारी में 645 रन बनाए, जिसमें डॉन ब्रैडमैन के 187 रन शामिल थे. जवाब में इंग्लैंड की टीम पहली पारी में 141 और दूसरी पारी में 172 रन ही बना सकी. ऑस्ट्रेलिया ने यह मैच एक पारी और 332 रनों से अपने नाम किया. यह जीत न केवल बड़ी थी, बल्कि इसने युद्ध के बाद ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट के वर्चस्व का ऐलान भी कर दिया था.
आंकड़े सिर्फ जीत-हार की कहानी नहीं कहते, उस दौर के दबदबे को बताते हैं
ये आंकड़े सिर्फ जीत और हार की कहानी नहीं कहते, बल्कि उस दौर के दबदबे को दर्शाते हैं. चाहे वह लेन हटन की मैराथन पारी हो या एडम गिलक्रिस्ट का विस्फोटक दोहरा शतक. इन मैचों ने साबित किया कि टेस्ट क्रिकेट में जब एक टीम लय में होती है, तो वह इतिहास की सीमाओं को भी लांघ जाती है.
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करीब 15 साल से पत्रकारिता में सक्रिय. दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़ाई. खेलों में खासकर क्रिकेट, बैडमिंटन, बॉक्सिंग और कुश्ती में दिलचस्पी. IPL, कॉमनवेल्थ गेम्स और प्रो रेसलिंग लीग इवेंट्स कवर किए हैं. फरवरी 2022 से…और पढ़ें