सुरक्षित प्रसव के दावे भले बड़े हों, लेकिन ग्वालियर में डिलीवरी का तरीका बदल रहा है। शहर के सरकारी अस्पतालों में सिजेरियन दर करीब 34 फीसदी है, जबकि प्राइवेट में यह 60 के पार पहुंच चुकी है। यानि यह तब है, जब विश्व स्वास्थ्य संगठन 10-15 फीसदी को ही सही मानता है। शहर में अब हर दूसरी डिलीवरी ऑपरेशन के करीब पहुंच चुकी है। जबकि यदि बात भोपाल की जाए तो यह आंकड़ा करीब 40 फीसदी है, जबकि इंदौर में 75 फीसदी तक पहुंच गया है। इससे साफ है कि जहां प्राइवेट सेक्टर का दबदबा ज्यादा है, वहां ऑपरेशन की दर भी तेजी से बढ़ रही है। महिलाएं खुद करती हैं डिमांड सरकारी अस्पतालों में नॉर्मल डिलेवरी प्राइवेट की तुलना में ज्यादा होती हैं। प्राइवेट अस्पतालों में महिलाएं लेबर पेन सहन नहीं कर पाती। वे खुद कहती हैं कि हमारा सी-सेक्शन कर दो। जबकि पहले की महिलाएं नॉर्मल डिलेवरी को तवज्जो देती थीं। -डॉ. वीणा अग्रवाल, पूर्व डीन जीआरएमसी जेएएच पर बढ़ा लोड
जिले के अलग-अलग ब्लॉक्स के अस्पतालों में गर्भवती के लिए सुविधाएं नहीं हैं। ऐसे में वे मरीजों को जेएएच में रैफर करने से लोड बढ़ रहा है। -डॉ. आरकेएस धाकड़, डीन जीआरएमसी
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