शाजापुर नगर में शनिवार शाम राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने शारीरिक प्रधान कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों ने अपनी शारीरिक सुदृढ़ता और सांगठनिक अनुशासन का प्रभावी प्रदर्शन किया। दंड और नियुद्ध कौशल का प्रदर्शन किया कार्यक्रम का आरंभ ध्वज प्रणाम और सामूहिक “वंदे मातरम” गान से हुआ। इसके पश्चात स्वयंसेवकों ने दंड, पद विन्यास, सामूहिक समता, नियुद्ध, डंबल योग और घोष जैसी विभिन्न विधाओं का प्रदर्शन किया। सेवानिवृत्त प्रधान अध्यापक कैलाश सूर्यवंशी कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित हुए। स्वस्थ शरीर को बताया विकसित राष्ट्र का आधार मुख्य वक्ता जिला कार्यवाह दिलीप कलमोदिया ने अपने संबोधन में नियमित व्यायाम, योग और प्राणायाम के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि शारीरिक रूप से सशक्त नागरिक ही एक सुदृढ़ राष्ट्र का निर्माण कर सकते हैं। उन्होंने भारतीय संस्कृति के “स्वस्थ शरीर ही सबसे बड़ा सुख है” के सिद्धांत को अपनाने का आह्वान किया। अनुशासन और राष्ट्र निर्माण की प्रतिबद्धता कार्यक्रम के दौरान नगर कार्यवाह प्रवीण पाटीदार मंच पर उपस्थित रहे। वक्ताओं ने जोर दिया कि अनुशासित और स्वस्थ स्वयंसेवक विकसित भारत के निर्माण में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। कार्यक्रम के समापन पर सभी स्वयंसेवकों ने राष्ट्र सेवा और निर्माण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। देखें तस्वीरें…
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