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MP News: मध्य प्रदेश में अब तक कुल 65 हजार लोगों ने ग्रामीण संपत्ति कर जमा किया है, जिससे करीब 3.50 करोड़ रुपये का राजस्व मिला है. प्रदेश के कुल 65 हजार ग्रामीण संपत्ति कर जमा करने वालों में 34 हजार अकेले जबलपुर के हैं.
Jabalpur News: अक्सर सुर्खियों में खबरें आती हैं कि बड़े-बड़े रसूखदार और अमीर लोग टैक्स चोरी के रास्ते तलाशते हैं. लेकिन, मध्य प्रदेश के जबलपुर के एक बेहद पिछड़े और आदिवासी बाहुल्य ब्लॉक कुंडम के ग्रामीणों ने ईमानदारी की ऐसी मिसाल पेश की कि पूरा प्रदेश दंग है. कुंडम के ग्रामीण एमपी में सबसे ज्यादा टैक्स देने वाले ग्रामीण बनकर सामने आए हैं.
दरअसल, देश में साल 1992 में 73वां संविधान संशोधन लाया गया था, जिसे 24 अप्रैल 1993 को लागू किया गया. इसका मुख्य उद्देश्य ‘आत्मनिर्भर पंचायत’ और ‘ग्राम सरकार’ की स्थापना करना था. मध्य प्रदेश ने इस दिशा में साल 2022 के पंचायत चुनाव के बाद से एक क्रांतिकारी शुरुआत की. पूरे प्रदेश के पंचायत कर्मियों को ट्रेनिंग दी गई ताकि वे नगर निगमों की तरह अपना रेवेन्यू खुद जनरेट कर सकें.
MP में जबलपुर सबसे आगे, आधे से ज्यादा टैक्सपेयर्स
जिला पंचायत सीईओ अभिषेक गहलोत ने लोकल 18 से बताया कि पंचायत दर्पण पोर्टल के आंकड़े बताते हैं कि इस अभियान में जबलपुर ने बाकी जिलों को मीलों पीछे छोड़ दिया है. मध्यप्रदेश में अब तक कुल 65 हजार लोगों ने ग्रामीण संपत्ति कर जमा किया है, जिससे करीब 3.50 करोड़ रुपये का राजस्व मिला है. प्रदेश के कुल 65 हजार ग्रामीण संपत्ति कर जमा करने वालों में 34 हजार अकेले जबलपुर के हैं. संख्या के मामले में आदिवासी ब्लॉक कुंडम नंबर-1 है. टैक्स के रूप में सबसे ज्यादा पैसा जमा करने में जबलपुर ब्लॉक पूरे मध्य प्रदेश में आगे है.
नाममात्र का टैक्स, फिर भी गजब का उत्साह
प्रशासन ने टैक्स की दरें इतनी कम रखी हैं कि किसी पर बोझ न पड़े. ₹1 लाख की संपत्ति पर मात्र 200 रुपये का सालाना टैक्स देना होता है. जिला प्रशासन ने SARD संस्था के जरिए जमीनी स्तर पर जागरूकता फैलाई, जिसका असर अब दिखने लगा है. इस मुहिम में केवल छोटे घर ही नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित बड़े व्यावसायिक संस्थान भी भागीदार बने हैं.
रिहायशी एरिया और व्यवसायिक एरिया से कलेक्शन
उन्होंने बताया कि दो तरह की रणनीति अपनाई. जहां रिहायशी एरिया में मकानों पर बहुत कम टैक्स रखा गया, जबकि व्यावसायिक एरिया के ग्रामीण इलाकों में स्थित होटल, फार्महाउस, वेयरहाउस और अन्य कमर्शियल सेंटरों को अभियान से जोड़ा गया. बहरहाल आज यहां की पंचायतों के पास अपना बजट है, जिसे वे बिना किसी भ्रष्टाचार के अपने गांव को संवार सकती हैं.
ग्राम पंचायतों को टैक्स वसूलने का अधिकार
उन्होंने बताया कि पंचायती राज कानून के तहत ग्राम पंचायतों को 12 अलग-अलग प्रकार के टैक्स वसूलने का अधिकार है. इसमें संपत्ति कर के अलावा स्थानीय सेवाओं पर आधारित शुल्क शामिल हैं. तर्क यह है कि ग्राम पंचायत के सरपंच, सचिव और कर्मचारी वास्तव में ‘राज्य सरकार’ के नहीं, बल्कि ‘ग्राम सरकार’ के अंग हैं. जब पंचायत के पास खुद की कमाई होगी, तो विकास करने के लिए किसी पर निर्भर नहीं रहेंगी.
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एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें