पीएम मोदी कल ‘नारी शक्ति वंदन सम्मेलन’ को संबोधित करेंगे: एमपी में कलेक्टर-कमिश्नर्स को लाइव टेलीकास्ट दिखाने की जिम्मेदारी – Bhopal News

पीएम मोदी कल ‘नारी शक्ति वंदन सम्मेलन’ को संबोधित करेंगे:  एमपी में कलेक्टर-कमिश्नर्स को लाइव टेलीकास्ट दिखाने की जिम्मेदारी – Bhopal News




13 अप्रैल को केंद्र सरकार ‘नारी शक्ति वंदन सम्मेलन’ आयोजित करने जा रही है। विज्ञान भवन में होने वाले इस भव्य आयोजन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देशभर की चुनिंदा महिला अचीवर्स से रूबरू होंगे। मध्य प्रदेश सरकार ने भी इस कार्यक्रम को लेकर सभी संभाग आयुक्तों और कलेक्टरों को आदेश जारी किया है। सामान्य प्रशासन विभाग ने आदेश दिए हैं कि पंचायत स्तर तक महिलाओं को इस कार्यक्रम के लाइव टेलीकास्ट से जोड़ा जाए। पंचायत स्तर तक होगा प्रसारण राज्य सरकार के आदेश के मुताबिक, यह केवल एक कार्यक्रम नहीं बल्कि एक जन-अभियान की तरह देखा जा रहा है। सभी संभाग आयुक्तों और कलेक्टरों को व्यक्तिगत रूप से मॉनिटरिंग के निर्देश दिए गए हैं। इस कार्यक्रम के लाइव प्रसारण के दौरान आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, महिला पंचायत प्रतिनिधि, सेल्फ हेल्प ग्रुप और महिला अधिकारियों को अनिवार्य रूप से बुलाने को कहा गया है। गांव से लेकर जिला मुख्यालय तक सामूहिक रूप से टीवी या बड़ी स्क्रीन पर पीएम का भाषण दिखाने के निर्देश दिए गए हैं। डेढ़ घंटे चलेगा कार्यक्रम
सुबह 11 बजे से लेकर 12:30 बजे तक नारी शक्ति वंदन सम्मेलन का लाइव प्रसारण किया जाएगा। दिल्ली के विज्ञान भवन में होने वाले इस सम्मेलन में सिर्फ राजनेता नहीं, बल्कि समाज के हर क्षेत्र की ‘शक्ति’ शामिल होगी। स्टार्टअप लीडर्स: नई अर्थव्यवस्था की महिला उद्यमी। खिलाड़ी और वैज्ञानिक: जिन्होंने वैश्विक स्तर पर तिरंगा फहराया। कला-संस्कृति: विरासत को सहेजने वाली महिला कलाकार। नीति निर्माता: ब्यूरोक्रेसी और शिक्षा के क्षेत्र की दिग्गज महिलाएं। ‘नारी शक्ति वंदन’ से क्या बदलेगा? नारी शक्ति वंदन अधिनियम (महिला आरक्षण) के लागू होने की दिशा में बढ़ते कदमों के बीच इस सम्मेलन को काफी अहम माना जा रहा है। जानिए इससे क्या बदलाव आएंगे: निर्णय लेने में बढ़ेगी हिस्सेदारी: इस अधिनियम के पूर्ण क्रियान्वयन के बाद लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% सीटें आरक्षित होंगी। इससे नीति निर्धारण (Policy Making) में महिलाओं की सीधी आवाज गूंजेगी। राजनीति में ‘प्रतीकात्मकता’ का अंत: अभी तक पंचायतों में ‘सरपंच पति’ का जो चलन दिखता था, वह उच्च विधायी निकायों में इस कानून के आने से खत्म होगा। पढ़ी-लिखी और पेशेवर महिलाएं सीधे कानून बनाने की प्रक्रिया में शामिल होंगी। सामाजिक बदलाव की गति: जब महिलाएं कानून बनाएंगी, तो शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा जैसे विषयों पर अधिक संवेदनशील और प्रभावी नीतियां बनने की उम्मीद है। यह केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि एक बड़ा सामाजिक रिफॉर्म साबित होगा। नए लीडरशिप मॉडल का उदय: स्टार्टअप और विज्ञान जैसे क्षेत्रों में महिलाओं की बढ़ती सक्रियता को इस सम्मेलन के जरिए एक प्लेटफॉर्म मिलेगा, जिससे आने वाली पीढ़ी को नए ‘रोल मॉडल’ मिलेंगे।



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