पेड़ों में इंजेक्शन लगाकर निकाल रहे गोंद, जंगलों में अवैध तस्करी, सेहत से भी खिलवाड़

पेड़ों में इंजेक्शन लगाकर निकाल रहे गोंद, जंगलों में अवैध तस्करी, सेहत से भी खिलवाड़


Khandwa News: मध्य प्रदेश के निमाड़ क्षेत्र सहित खंडवा, बुरहानपुर और आसपास के जिलों के जंगलों में गोंद माफिया तेजी से सक्रिय हो गए हैं. यहां बड़ी संख्या में गोंद देने वाले पेड़ मौजूद हैं, जिसका फायदा उठाकर तस्कर अवैध तरीके से गोंद निकाल रहे हैं. यह पूरा नेटवर्क अब जंगलों और पर्यावरण के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है.

केमिकल और इंजेक्शन से निकाला रहे गोंद
जानकारी के अनुसार, तस्कर पेड़ों पर केमिकल डालकर और इंजेक्शन लगाकर गोंद निकाल रहे हैं. इस प्रक्रिया में एथोफोन जैसे रसायन का उपयोग किया जाता है, जिससे पेड़ों में आंतरिक तनाव पैदा होता है. इसके कारण गोंद का रिसाव बढ़ जाता है, लेकिन इससे पेड़ अंदर से कमजोर होकर सूखने लगते हैं.

एक्सपर्ट का बड़ा खुलासा
प्रकृति प्रेमी और एक्सपर्ट रचना तिवारी ने LOCAL 18 से बातचीत में बताया कि गोंद तस्करी का नेटवर्क निमाड़ से लेकर अरब देशों तक फैला हुआ है. खंडवा और बुरहानपुर के जंगलों में सालई और धावड़ा जैसे पेड़ों से बड़े पैमाने पर गोंद निकाला जा रहा है. महाराष्ट्र सीमा से लगे जंगलों में तस्करों की आवाजाही ज्यादा रहती है.

₹4000 किलो तक बिक रहा गोंद
तस्करों द्वारा निकाला गया गोंद अंतरराष्ट्रीय बाजार में 3 से 4 हजार रुपए प्रति किलो तक बेचा जाता है. यही वजह है कि यह अवैध कारोबार तेजी से फैल रहा है और माफिया लगातार सक्रिय हो रहे हैं.

सेहत के लिए भी खतरनाक
एक्सपर्ट के अनुसार, केमिकल से निकाला गया गोंद स्वास्थ्य के लिए भी नुकसानदायक हो सकता है. आमतौर पर गोंद का उपयोग गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और डिलीवरी के बाद महिलाओं को दिया जाता है. लेकिन, केमिकल युक्त गोंद कई बीमारियों का कारण बन सकता है.

दो स्तर पर चल रही तस्करी 
वन विभाग के अनुसार गोंद की तस्करी दो स्तर पर चल रही है. पहला जंगल में सक्रिय माफिया, जो सीधे पेड़ों से गोंद निकालते हैं. दूसरा स्थानीय स्तर पर गोंद इकट्ठा कर व्यापारी को बेचने वाले लोग.

सस्ते में खरीद, महंगे में सप्लाई
तस्कर ग्रामीणों से गोंद करीब 150 रुपए प्रति किलो के हिसाब से खरीदते हैं. इसके बाद इसे इंदौर, भोपाल, दिल्ली और मुंबई जैसे शहरों में भेजा जाता है. वहां ग्रेडिंग के बाद गोंद को जहाज के जरिए अरब देशों सहित अन्य देशों में सप्लाई किया जाता है, जिसकी मोटी कीमत वसूली जाती है. सालई के गोंद में रसायन मिलाकर लोभान और गूगल जैसे उत्पाद तैयार किए जाते हैं. इन उत्पादों की विदेशों में भारी मांग है, जिससे इस अवैध कारोबार को बढ़ावा मिल रहा है.

बिना लाइसेंस 5 किलो से ज्यादा गोंद रखना अवैध
नियमों के अनुसार कोई भी व्यक्ति बिना लाइसेंस 5 किलो से ज्यादा गोंद नहीं रख सकता. जिले में करीब 20 अधिकृत व्यापारी हैं, जिन्हें संग्रहण और व्यापार की अनुमति है. इसके बावजूद अवैध रूप से बड़ी मात्रा में गोंद का भंडारण और व्यापार किया जा रहा है. बताया गया कि गोंद के कारोबार से सरकार को सालाना करीब 15 लाख रुपए का राजस्व मिलता है. इसमें समिति और मजदूरों को भी हिस्सा मिलता है, लेकिन अवैध तस्करी से सरकार को नुकसान हो रहा है.



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