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5 Longest matches in Test: क्रिकेट इतिहास के वह अनोखे दिन जब हार-जीत का फैसला समय नहीं, बल्कि खिलाड़ियों का धैर्य तय करता था. सिडनी के 7 दिनों के संघर्ष से लेकर डरबन के उस ऐतिहासिक 10 दिवसीय ‘टाइमलेस टेस्ट’ तक, जहां इंग्लैंड की टीम को मैच बीच में छोड़कर अपना जहाज पकड़ने जाना पड़ा. हम बात कर रहें हैं उन 5 सबसे लंबे टेस्ट मैचों की, जिन्होंने क्रिकेट को रनों के खेल से बदलकर मानसिक और शारीरिक सहनशक्ति की एक महागाथा बना दिया.
सबसे लंबे समय तक खेले गए दुनिया के 5 टेस्ट मैच.
नई दिल्ली. क्रिकेट के इतिहास में आज हम जिस खेल को पांच दिनों की समय सीमा में बंधा हुआ देखते हैं, वह हमेशा से ऐसा नहीं था. एक दौर वह भी था जब मैच तब तक खत्म नहीं होते थे जब तक कि कोई नतीजा न निकल जाए. इन्हें ‘टाइमलेस टेस्ट’ कहा जाता था.क्रिकेट इतिहास के उन पांच सबसे लंबे मुकाबलों की यादों को ताजा करते हैं, जिन्होंने खिलाड़ियों के धैर्य और शरीर की सीमाओं को अंतिम छोर तक खींच दिया था. क्रिकेट की इस महागाथा की शुरुआत होती है साल 1912 के सिडनी टेस्ट से. फरवरी की तपती धूप में ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड की टीमें आमने-सामने थीं. यह टेस्ट पूरे 7 दिनों तक चला. मैदान पर पसीने और रणनीति की ऐसी जंग छिड़ी कि गेंदबाज थक गए, लेकिन बल्लेबाजों का जज्बा कम नहीं हुआ. अंततः इंग्लैंड ने इस लंबी थका देने वाली जंग में जीत का परचम लहराया. यह उस युग की शुरुआत थी जहां हार और जीत के बीच केवल एक ही चीज खड़ी थी. और वह थी वक्त.
करीब 12 साल बाद, दिसंबर 1924 में सिडनी का वही मैदान एक बार फिर इतिहास का गवाह बना. ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच फिर से 7 दिनों का महासंग्राम छिड़ा. इस बार कंगारुओं ने पिछली हार का बदला लिया और एक लंबी मैराथन के बाद जीत अपने नाम की. यह मैच सिर्फ रनों का खेल नहीं, बल्कि मानसिक मजबूती की परीक्षा बन चुका था. जैसे-जैसे साल बीते, टेस्ट क्रिकेट और भी लंबा होता गया. मार्च 1929 में मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड पर इतिहास का एक और स्वर्णिम अध्याय लिखा गया. ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच यह मुकाबला पूरे 8 दिनों तक खिंचा. दर्शक मैदान में आते और जाते रहे, सूरज ढलता और निकलता रहा, लेकिन खेल जारी रहा. आखिर में ऑस्ट्रेलिया ने इस थका देने वाले मुकाबले में इंग्लैंड को पछाड़कर जीत हासिल की.
सबसे लंबे समय तक खेले गए दुनिया के 5 टेस्ट मैच.
लेकिन असली रोमांच अभी बाकी था. अप्रैल 1930 में वेस्टइंडीज और इंग्लैंड की टीमें किंग्स्टन, जमैका की पिच पर उतरीं. यह मुकाबला रिकॉर्ड बुक में दर्ज होने जा रहा था क्योंकि यह 9 दिनों तक चला. गेंदबाज एक-एक विकेट के लिए तरस गए और बल्लेबाज क्रीज पर खूंटा गाड़कर बैठ गए. इतने दिनों के संघर्ष के बाद भी नियति को कुछ और ही मंजूर था. नौ दिनों की मेहनत के बाद यह मैच ‘ड्रॉ’ पर समाप्त हुआ. यह क्रिकेट इतिहास के सबसे अजीबोगरीब मुकाबलों में से एक था, जहां नौ दिन बाद भी कोई विजेता नहीं मिल सका.
वह मुकाबला जो कभी खत्म ही नहीं हुआ
क्रिकेट के इतिहास का सबसे लंबा और सबसे यादगार मैच 3 मार्च 1939 को शुरू हुआ. दक्षिण अफ्रीका और इंग्लैंड की टीमें डरबन के मैदान पर उतरीं. किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि यह मैच इतिहास रच देगा. यह मुकाबला पूरे 10 दिनों तक चला! मैदान पर रिकॉर्ड्स की बारिश हो रही थी, खिलाड़ी बीमार पड़ रहे थे और दर्शकों का उत्साह भी जवाब देने लगा था. 10 दिनों के खेल के बाद भी मैच निर्णायक मोड़ पर नहीं पहुंच पाया था. अंत में खेल को इसलिए रोकना पड़ा क्योंकि इंग्लैंड की टीम को अपनी नाव (Ship) पकड़कर वापस घर लौटना था. अगर वह जहाज छूट जाता, तो शायद यह मैच कुछ और दिन चलता. आधिकारिक तौर पर इस 10 दिवसीय मुकाबले को ‘ड्रॉ’ घोषित किया गया. इसे आज भी ‘द टाइमलेस टेस्ट’ के नाम से याद किया जाता है.
जब खेल घड़ी की सुइयों से नहीं, खिलाड़ियों के जज्बे से चलता था
ये पांचों मैच क्रिकेट की उस विरासत का हिस्सा हैं जब खेल घड़ी की सुइयों से नहीं, बल्कि खिलाड़ियों के जज्बे से चलता था. सिडनी के 7 दिनों से लेकर डरबन के उस ऐतिहासिक 10 दिनों तक, क्रिकेट ने वह दौर देखा है जहां समय ठहर गया था. आज के दौर में जहां टी-20 और फटाफट क्रिकेट का बोलबाला है, इन 10 दिवसीय मुकाबलों की कहानी किसी काल्पनिक कथा जैसी लगती है, लेकिन ये आंकड़े गवाह हैं कि क्रिकेट कभी ‘अनंत’ होने की क्षमता रखता था.
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करीब 15 साल से पत्रकारिता में सक्रिय. दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़ाई. खेलों में खासकर क्रिकेट, बैडमिंटन, बॉक्सिंग और कुश्ती में दिलचस्पी. IPL, कॉमनवेल्थ गेम्स और प्रो रेसलिंग लीग इवेंट्स कवर किए हैं. फरवरी 2022 से…और पढ़ें