आम के टिकोरे पर गुच्छा रोग का हमला! अपनाएं ये टिप्स, फलों से लद जाएगा पेड़

आम के टिकोरे पर गुच्छा रोग का हमला! अपनाएं ये टिप्स, फलों से लद जाएगा पेड़


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आम के टिकोरे पर गुच्छा रोग का हमला! अपनाएं ये टिप्स, फलों से लद जाएगा पेड़

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Mango Farming Tips: वैज्ञानिक प्रमुख डॉ शैलेंद्र गौतम ने लोकल 18 को बताया कि भारत में उगाई जाने वाली लगभग सभी आम की किस्में गुच्छा रोग से प्रभावित हो सकती हैं. यह रोग मुख्य तौर पर दो तरह का होता है.

सीधी. मध्य प्रदेश के सीधी जिले में आम के पेड़ों पर इन दिनों छोटे-छोटे फल नजर आने लगे हैं, जिन्हें टिकोरा कहा जाता है. जैसे-जैसे ये फल बड़े होते हैं, उनकी देखभाल की अधिक जरूरत होती है. यदि समय पर सही देखभाल नहीं की गई, तो फल झड़ने लगते हैं और उत्पादन प्रभावित होता है. इस दौरान गुच्छा रोग का खतरा भी बढ़ जाता है. बदलते मौसम और तापमान का असर इन नन्हें फलों पर पड़ता है, इसलिए इन्हें सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है, वरना फल खराब होकर पैदावार में कमी आ सकती है. सीधी कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक प्रमुख डॉ शैलेंद्र गौतम ने जानकारी देते हुए बताया कि आम के पेड़ों में गुच्छा रोग या स्मॉल फॉर्मेशन की समस्या आमतौर पर देखने को मिलती है. इस रोग के प्रभाव से पेड़ों की टहनियों पर निकलने वाली पत्तियां और शाखाएं छोटी रह जाती हैं और गुच्छे का रूप ले लेती हैं. इससे पेड़ का सामान्य विकास रुक जाता है और फल उत्पादन प्रभावित होता है. यदि समय रहते इस रोग का उपचार न किया जाए, तो यह धीरे-धीरे पूरे पेड़ को नुकसान पहुंचा सकता है.

वैज्ञानिक प्रमुख डॉ शैलेंद्र गौतम ने बताया कि भारत में उगाई जाने वाली लगभग सभी आम की किस्में इस रोग से प्रभावित हो सकती हैं. गुच्छा रोग मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है. पहला पत्तियों का गुच्छेदार रोग, जिसमें पत्तियां छोटे-छोटे गुच्छों के रूप में विकसित होती हैं और शाखाएं बौनी रह जाती हैं. दूसरा अधिक खतरनाक प्रकार फूलों का गुच्छेदार रोग है, जिसमें फूल असामान्य तरीके से गुच्छों में निकलते हैं और फल नहीं बन पाते या बहुत कम बनते हैं. इससे उत्पादन में भारी गिरावट आ जाती है.

मकड़ी के कारण फैलता गुच्छा रोग
यह रोग एक सूक्ष्म मकड़ी के कारण फैलता है, जो धीरे-धीरे पूरे पेड़ में फैलकर सभी गुच्छों को प्रभावित कर देती है. इसके नियंत्रण के लिए समय-समय पर उचित दवाओं का छिड़काव जरूरी है. किसान कार्बेन्डाजिम 12%, मैंकोजेब 63% और अल्फा नेफथाइल एसिटिक एसिड 4.5% SL का उपयोग कर सकते हैं. इसके अलावा कॉपर ऑक्सिक्लोराइड का प्रयोग भी इस रोग को नियंत्रित करने में प्रभावी माना जाता है.

ताकि संक्रमण न फैले
वैज्ञानिक शैलेंद्र गौतम का कहना है कि जिन गुच्छों में रोग के लक्षण दिखाई दें, उन्हें तुरंत काटकर नष्ट कर देना चाहिए ताकि संक्रमण आगे न फैले. फल तोड़ने के बाद पेड़ों की सफाई भी जरूरी है. इसके साथ ही पैक्लोबुट्राजोल 23% SC को एक मिली प्रति लीटर पानी में मिलाकर जड़ों में देने से फूल बनने की प्रक्रिया बेहतर होती है और फलों की गुणवत्ता में सुधार आता है.

समय पर रोग की पहचान और वैज्ञानिक तरीकों से प्रबंधन अपनाकर किसान आम के गुच्छा रोग को काफी हद तक नियंत्रित कर सकते हैं. इससे न केवल पेड़ स्वस्थ रहते हैं बल्कि आम की पैदावार में भी अच्छी वृद्धि होती है.

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Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.



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