सीहोर जिला मुख्यालय के समीप स्थित कुबेरेश्वरधाम सिद्धपीठ में नवनिर्मित मुरली मनोहर मंदिर को बुधवार को श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया। काठमांडू शैली में बने इस मंदिर में भगवान शिव-पार्वती, भगवान राम-सीता और भगवान मुरली मनोहर की प्राण प्रतिष्ठा विधिवत संपन्न हुई। प्राण प्रतिष्ठा के बाद शाम को मंदिर में दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। हजारों की संख्या में भक्त अपने आराध्य के दर्शन के लिए पहुंचे। मुंबई, दिल्ली समेत देश के विभिन्न राज्यों से लोग इस धाम पर पहुंचे थे, जिससे पूरे परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ बनी रही। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच संपन्न हुआ पूजन पूरे आयोजन में कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा के मार्गदर्शन में पूजन किया गया। वे स्वयं अनुष्ठान में शामिल रहे और पूजन की सभी प्रक्रियाएं विधिवत कराई गईं। जानकारी के अनुसार, सवा लाख से अधिक वैदिक मंत्रों के उच्चारण के साथ बड़ी संख्या में विप्रजनों की उपस्थिति में यह आयोजन संपन्न हुआ। इस दौरान भगवान की प्रतिमाओं का विशेष श्रृंगार किया गया, जिसमें स्वर्ण आभूषणों से सुसज्जित मूर्तियां आकर्षण का केंद्र रहीं। नियमित रूप से होंगे दर्शन पूजन के बाद श्रद्धालुओं को प्रसादी वितरित की गई। पंडित समीर शुक्ला और पंडित विनय मिश्रा सहित समिति के सदस्यों ने इसमें सहयोग किया। विठलेश सेवा समिति के मीडिया प्रभारी मनोज दीक्षित के अनुसार, प्राण प्रतिष्ठा के बाद मंदिर में नियमित रूप से दर्शन की व्यवस्था शुरू कर दी गई है। मंदिर परिसर में स्थापित विभिन्न देव प्रतिमाएं श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रही हैं। धार्मिक प्रवचन में कथा-सत्संग का महत्व बताया गया आयोजन के दौरान धार्मिक प्रवचन भी हुए, जिनमें कथा और सत्संग के महत्व पर प्रकाश डाला गया। प्रवचन में कहा गया कि आस्था और विश्वास के साथ कथा श्रवण करने से व्यक्ति को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष जैसे जीवन के चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति का मार्ग मिलता है। साथ ही यह भी बताया गया कि धर्म और आस्था से जुड़े ऐसे आयोजनों का उद्देश्य लोगों को आध्यात्मिक रूप से जोड़ना है। धाम पहले से आस्था का केंद्र कुबेरेश्वरधाम को क्षेत्र का प्रमुख आस्था केंद्र माना जाता है, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। आयोजन के दौरान यह भी बताया गया कि यहां स्थापित विभिन्न देव प्रतिमाएं अलग-अलग धार्मिक मान्यताओं का प्रतिनिधित्व करती हैं, जिससे श्रद्धालुओं को एक ही स्थान पर विविध स्वरूपों के दर्शन का अवसर मिलता है। देखें तस्वीरें
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