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Tehsildar Salary| Amita Singh Tomar KBC Winner:मध्य प्रदेश में इन दिनों प्रशासनिक हलकों में हलचल मची हुई है और इसकी वजह बनी हैं तहसीलदार अमिता सिंह तोमर. बाढ़ राहत घोटाले के आरोपों में उनकी गिरफ्तारी ने तहसीलदार जैसे अहम पद को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है. उन पर दो करोड़ रुपए से अधिक की गड़बड़ी के आरोप हैं और पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है.आइए जानते हैं कि तहसीलदार कैसे बनते हैं और उन्हें कितनी सैलरी मिलती है?
Tehsildar Salary, MPPSC, Sarkari Naukri, Amita Singh Tomar KBC Winner: तहसीलदार को कितनी मिलती है सैलरी?
Tehsildar Salary| Amita Singh Tomar KBC Winner: अमिता सिंह तोमर मध्य प्रदेश की एक चर्चित तहसीलदार रही हैं जो पहले भी कई वजहों से सुर्खियों में हैं. उन्होंने साल 2003 में सरकारी सेवा जॉइन की थी, जब उनका चयन नायब तहसीलदार के रूप में हुआ था. बाद में 2011 में उन्हें प्रमोशन मिला और वह तहसीलदार बनीं. इसी दौरान वह टीवी शो कौन बनेगा करोडपति (Kaun Banega Crorepati)के सीजन 5 में पहुंचीं और वहां 50 लाख रुपए जीतकर पूरे राज्य में चर्चा का विषय बन गईं.हालांकि हाल के दिनों में वह बाढ़ राहत घोटाले को लेकर विवादों में घिर गईं. साल 2021 में जब वह बड़ौदा तहसील में पदस्थ थीं, उस दौरान करीब 2.57 करोड़ रुपए की राहत राशि में गड़बड़ी सामने आई.गिरफ्तारी से बचने के लिए उन्होंने कोर्ट का रुख किया, लेकिन उन्हें राहत नहीं मिली और आखिरकार उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया.इसके अलावा वह सोशल मीडिया पर अपने विवादित पोस्ट्स को लेकर भी चर्चा में रही हैं.
मध्य प्रदेश में कैसे बनते हैं तहसीलदार?
अब बात करते हैं कि मध्य प्रदेश में तहसीलदार कैसे बना जाता है तो इसके दो मुख्य रास्ते हैं. पहला रास्ता है सीधे चयन का, जिसके लिए उम्मीदवारों को मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (Madhya Pradesh Public Service Commission) की राज्य सेवा परीक्षा पास करनी होती है. यह परीक्षा तीन चरणों में होती है-प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू. इन तीनों चरणों को सफलतापूर्वक पार करने के बाद उम्मीदवारों का चयन प्रशासनिक पदों के लिए होता है जहां से आगे चलकर तहसीलदार बनने का मौका मिलता है.दूसरा रास्ता प्रमोशन का होता है. इसमें उम्मीदवार पहले नायब तहसीलदार बनता है और कुछ वर्षों के अनुभव तथा वरिष्ठता के आधार पर उसे तहसीलदार पद पर पदोन्नत किया जाता है. अमिता सिंह तोमर भी नायब तहसीलदार से प्रमोट होकर तहसीदार बनी थीं.
तहसीलदार को कितनी मिलती है सैलरी?
तहसीलदार का पद न केवल जिम्मेदारी भरा होता है, बल्कि इसके साथ अच्छी सैलरी और सुविधाएं भी मिलती हैं. सातवें वेतन आयोग के अनुसार तहसीलदार की शुरुआती बेसिक सैलरी करीब 56,100 रुपए होती है, जो भत्तों के साथ बढ़कर 70 हजार से लेकर एक लाख रुपए या उससे अधिक तक पहुंच सकती है.इसके अलावा उन्हें सरकारी आवास, यात्रा के लिए वाहन, महंगाई भत्ता, हाउस रेंट अलाउंस और अन्य सुविधाएं भी मिलती हैं. साथ ही इस पद पर काम करने वाले अधिकारियों को पेंशन और अन्य सरकारी लाभ भी मिलते हैं.
तहसीलदार की जिम्मेदारियां क्या होती हैं?
तहसीलदार किसी भी जिले के राजस्व प्रशासन की रीढ़ माने जाते हैं. उनकी जिम्मेदारियों में जमीन से जुड़े विवादों का निपटारा, राजस्व वसूली, सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन और आपदा के समय राहत वितरण जैसे अहम काम शामिल होते हैं. बाढ़, सूखा या अन्य प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत राशि का सही वितरण सुनिश्चित करना भी उनकी बड़ी जिम्मेदारी होती है.यही वजह है कि इस पद पर पारदर्शिता और ईमानदारी बेहद जरूरी मानी जाती है, क्योंकि छोटी सी लापरवाही भी बड़े विवाद का कारण बन सकती है.
क्यों खास है यह नौकरी?
तहसीलदार की नौकरी को अक्सर प्रभावशाली और जिम्मेदारी भरा पद माना जाता है. इसमें जहां एक ओर प्रशासनिक शक्ति होती है, वहीं दूसरी ओर जनता के प्रति जवाबदेही भी उतनी ही बड़ी होती है.अमिता सिंह तोमर का मामला यह दिखाता है कि इस पद पर रहते हुए हर निर्णय बेहद सावधानी और पारदर्शिता के साथ लेना जरूरी है. एक छोटी सी गड़बड़ी भी बड़े स्तर पर जांच और कार्रवाई का कारण बन सकती है.मध्य प्रदेश में तहसीलदार बनना एक लंबी और कठिन प्रक्रिया है, जिसमें प्रतियोगी परीक्षा, अनुभव और मेहनत की जरूरत होती है. यह पद जहां सम्मान, सैलरी और सुविधाएं देता है वहीं जिम्मेदारी भी उतनी ही बड़ी होती है.अमिता सिंह तोमर की कहानी एक तरफ सफलता की मिसाल रही है तो दूसरी तरफ यह एक चेतावनी भी देती है कि सरकारी पद पर रहते हुए हर कदम सोच-समझकर उठाना कितना जरूरी है.
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न्यूज़18 हिंदी (Network 18) डिजिटल में असिस्टेंट एडिटर के तौर पर कार्यरत. न्यूज 18 में एजुकेशन, करियर, सक्सेस स्टोरी की खबरों पर. करीब 15 साल से अधिक मीडिया में सक्रिय. हिन्दुस्तान, दैनिक भास्कर के प्रिंट व …और पढ़ें