सहना नहीं, अब कहना है: 4 माह में 5500 महिलाओं ने 112 पर कॉल कर मदद मांगी, पुलिस ने गुमशुदा 99% से ज्यादा बालिकाओं को खोजा – Gwalior News

सहना नहीं, अब कहना है:  4 माह में 5500 महिलाओं ने 112 पर कॉल कर मदद मांगी, पुलिस ने गुमशुदा 99% से ज्यादा बालिकाओं को खोजा – Gwalior News




महिलाएं और युवतियां अब अपनी सुरक्षा को लेकर पहले से ज्यादा जागरूक हो रही हैं। छेड़छाड़, पीछा करने, घरेलू विवाद, साइबर परेशानी या असुरक्षा की स्थिति में वे चुप रहने के बजाय सीधे पुलिस तक पहुंच रही हैं। इसका असर ग्वालियर में महिला संबंधी अपराधों के आंकड़ों में भी दिख रहा है। पुलिस की सक्रियता, 112 एफआरवी की त्वरित मदद, थानों में महिला डेस्क की बदौलत महिला अपराधों में कमी आई है। जनवरी से अप्रैल 2026 तक जिले में 5500 महिलाओं ने 112 पर कॉल कर पुलिस से मदद मांगी। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक अब महिलाएं ऑनलाइन और हेल्पलाइन के जरिए शिकायत दर्ज कराने में आगे आ रही हैं। पुलिस द्वारा स्कूल, कॉलेज और कोचिंग सेंटरों में शुरू किए गए ‘मुस्कान की टोकरी’ अभियान में 50 शिकायतें पहुंचीं। पुलिस ने इन शिकायतों पर कार्रवाई कर राहत दिलाई। जिससे छात्राओं का पुलिस पर विश्वास बढ़ा। महिला अपराध-ऐसे कम हुए 2021 में महिला संबंधी अपराध 1733 दर्ज हुए थे। जबकि वर्ष 2025 में यह घटकर 1139 रह गए। वहीं 2026 के शुरुआती 4 माह में 317 केस दर्ज हुए हैं। इस हिसाब से जिले में 500 से ज्यादा महिला अपराधों की कमी आई है। पुलिस सक्रियता की बदौलत जिले में घटे महिला अपराध
महिला संबंधी अपराध जिले में लगातार कम हुए हैं। महिला पुलिस अधिकारी स्कूल-कॉलेज व कोचिंग पर पहुंचकर एप, हेल्पलाइन नंबर बताकर उनकी शिकायतों पर कार्रवाई करती हैं। मुस्कान की टोकरी में भी शिकायतें लेकर कार्रवाई से अपराध कम हुए हैं। धर्मवीर सिंह, एसएसपी
भरोसा होने के 3 कारण
मुस्कान टोकरी: किशोरी ने शिकायत की थी कि इंस्टाग्राम पर उसकी 15 से ज्यादा फर्जी आईडी बनाकर उसे परेशान किया जा रहा है। पुलिस ने फर्जी अकाउंट बंद कराए, आरोपी पर तरंत कार्रवाई की।
112: एफआरवी हर कॉल पर मौके पर पहुंची। जिससे समय पर महिलाओं को मदद मिल सकी।
शिक्षण संस्थान: अधिकारी शिक्षण संस्थानों पर खड़े होने वाले बदमाशों पर निरंतर कार्रवाई करते हैं। शिकायतें ज्यादा अपराध बढ़ना नहीं, जागरुकता है
महिलाओं द्वारा 112 पर कॉल करना और ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराना बताता है कि वे अब चुप रहने के बजाय मदद मांग रही हैं। यही बदलाव अपराध रोकने में मदद कर रहा है। पहले महिलाएं और युवतियां डर से दब जाती थी, लेकिन अब वे सीधे पुलिस तक पहुंच रही हैं।



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