सागर जिले की रहली तहसील के ग्राम किशनगढ़ में एक शादी समारोह के दौरान दहेज मुक्त विवाह की मिसाल पेश की गई है। यहां दूल्हे के पिता ने लगुन (फलदान) की रस्म में मिले 1.21 लाख रुपए वापस लौटा दिए। परिवार ने शगुन के तौर पर सिर्फ 11 रुपए और एक नारियल लेकर विवाह की रस्में पूरी कीं। किशनगढ़ पंचायत की सरपंच मायारानी पटेल और उनके पति कमलेश पटेल के बड़े बेटे गुड्डू का विवाह साधना पटेल से तय हुआ है। साधना के पिता सागर के तिली क्षेत्र के रहने वाले हैं और ऑटो रिक्शा चलाकर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। उनकी तीन बेटियों में साधना दूसरे नंबर की है। लगुन में दूल्हे ने नकदी लेने से किया इनकार
शादी पक्की होने के बाद लगुन कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इसमें दुल्हन के पिता 1.21 लाख रुपए नकद और अन्य सामान लेकर दूल्हे के घर पहुंचे थे। पारंपरिक रीति के तहत जब फलदान में यह नकद राशि दूल्हे को दी जाने लगी, तो उसने इसे लेने से इनकार कर दिया। इसके बाद दूल्हे के पिता ने 11 रुपए और नारियल लेकर बाकी पूरी राशि दुल्हन के पिता को वापस कर दी। ‘शादी रिश्ता है, कोई सौदा नहीं’
दूल्हे के पिता कमलेश पटेल ने बताया कि उनके दो बेटे हैं, बेटी नहीं है। उनका शुरू से ही विचार था कि वे बहू के रूप में बेटी लाएंगे। कमलेश ने कहा, “कई अच्छे संस्कारी परिवार सिर्फ दहेज के डर से रिश्ता नहीं कर पाते। इसलिए मैंने ठान लिया था कि बेटे की शादी में एक रुपया दहेज नहीं लूंगा।” पैसे लौटाने पर घबरा गए थे समधी
कमलेश पटेल ने बताया कि जब उन्होंने राशि लौटाई, तो समधी घबरा गए और उन्हें लगा कि वे नाराज हैं। लेकिन जब उन्हें बात समझाई गई तो वे भी भावुक हो गए। कमलेश ने कहा, “शादी रिश्ता है, सौदा नहीं। मुझे बेटी मिल गई और समधी को बेटा। यह राशि वे अपनी छोटी बेटी की पढ़ाई में लगाएंगे, तो उसके भविष्य के काम आएगी।”
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