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Satna News: विशेषज्ञों का मानना है कि कबर बिज्जू को लेकर फैला डर ज्यादातर अंधविश्वास और अधूरी जानकारी का नतीजा है. यह जीव स्वभाव से आक्रामक नहीं होता और बिना किसी उकसावे के इंसानों पर हमला नहीं करता. अगर कभी इससे आपका सामना हो जाए, तो घबराने के बजाय सावधानी बरतें.
सतना. बघेलखंड क्षेत्र खासकर सतना और आसपास के इलाकों में कबर बिज्जू को लेकर तरह-तरह की कहानियां और डर लोगों के बीच आज भी जिंदा है. गांवों में अक्सर इसे एक रहस्यमयी जीव के रूप में देखा जाता है और कहा जाता है कि यह कब्र खोदकर इंसानों का मांस खाता है. रात के अंधेरे में इसकी मौजूदगी और सुनसान इलाकों में दिखना इस डर को और बढ़ा देता है लेकिन जब इस जीव की वास्तविकता को समझा जाता है, तो तस्वीर पूरी तरह अलग नजर आती है. मध्य प्रदेश के सतना में मझगांवा रेंज के रेंजर रंजन के अनुसार, कबर बिज्जू सतना के जंगलों से लेकर ग्रामीण और शहरी इलाकों तक आसानी से देखा जा सकता है. यह एक निशाचर प्राणी है, यानी यह दिनभर आराम करता है और रात में सक्रिय होता है. रात के समय यह भोजन की तलाश में खेतों, खाली इमारतों और सुनसान जगहों पर घूमता है. वहीं जिला पशु चिकित्सालय के प्रभारी डॉ बृहस्पति भारती ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि कबर बिज्जू का व्यवहार आमतौर पर शांत और डरपोक होता है. यह इंसानों से दूरी बनाए रखना पसंद करता है और सामने आने पर भागने की कोशिश करता है.
कबर बिज्जू सिवेट फैमिली का सदस्य है और मांसाहारी प्रकृति का होता है. इसका मुख्य भोजन चूहे, सांप, कीड़े-मकोड़े, छिपकली, मेंढक, पक्षी और उनके अंडे होते हैं. इसके मजबूत पंजे इसे जमीन खोदने में सक्षम बनाते हैं, जिससे यह बिलों में छिपे शिकार को बाहर निकाल लेता है. यही वजह है कि कभी-कभी यह मरे हुए जानवरों का मांस भी खा लेता है. हालांकि यह धारणा कि यह सिर्फ कब्र खोदकर इंसानों का मांस खाता है, पूरी तरह सच नहीं है. विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर किसी कारणवश इसे कहीं शव मिल जाए, तो यह उसे खा सकता है लेकिन यह इसका सामान्य व्यवहार नहीं है.
खुद बनाता है अपनी मांद
विंध्य पर्वत श्रृंखला के पथरीले जंगल, झाड़ीदार इलाके, नदी किनारे की नरम मिट्टी और पुराने खंडहर या कब्रिस्तान इसके पसंदीदा ठिकाने हैं. यह अपनी मांद खुद बनाता है और सुरक्षित जगहों पर रहता है. हाल के वर्षों में जंगलों का क्षेत्र कम होने और शहरी विस्तार के कारण यह जीव अब गांवों और शहरों के किनारों तक नजर आने लगे हैं. रात के समय सड़कों पर इनके दिखने और सड़क पार करते समय एक्सीडेंट के मामले भी सामने आते हैं. डॉ भारती के अनुसार, उन्होंने अपने 13 साल के कार्यकाल में 4-5 बार कबर बिज्जू का पोस्टमार्टम भी किया है.
डर नहीं बल्कि समझ जरूरी है
विशेषज्ञों का मानना है कि कबर बिज्जू को लेकर फैला डर अधिकतर अंधविश्वास और अधूरी जानकारी का परिणाम है. यह जीव स्वभाव से आक्रामक नहीं होता और बिना उकसावे के इंसानों पर हमला नहीं करता. अगर कभी इससे सामना हो जाए, तो घबराने के बजाय सावधानी बरतनी चाहिए. उसे रास्ता दें, शोर न करें और धीरे-धीरे पीछे हटें. कबर बिज्जू को लेकर फैली कहानियां भले ही डर पैदा करती हों लेकिन सच्चाई यह है कि यह प्रकृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में मदद करता है. इसे समझना और इसके प्रति जागरूक होना जरूरी है ताकि बेवजह की दहशत को खत्म किया जा सके और इंसान और वन्यजीवों के बीच संतुलन बना रहे.
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राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.