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Ujjain News: काल भैरव भगवान शंकर के रौद्र और शक्तिशाली स्वरूप माने जाते हैं. मान्यता है कि जो श्रद्धालु कालाष्टमी के दिन विधि-विधान से बाबा काल भैरव की पूजा करते हैं, उसके जीवन से दुख दूर होने लगते हैं.
उज्जैन. प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी के रूप में विशेष श्रद्धा के साथ मनाया जाता है. यह दिन भगवान शिव के रौद्र और रक्षक स्वरूप काल भैरव को समर्पित माना जाता है, जिन्हें समय के स्वामी और बुराई के संहारक के रूप में पूजा जाता है. मान्यता है कि इस दिन विधिपूर्वक पूजा करने से व्यक्ति के जीवन से भय, संकट और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है. धार्मिक दृष्टि से कालाष्टमी खासकर साधकों और तंत्र साधना से जुड़े लोगों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है. इस दिन विशेष अनुष्ठान, दीपदान और मंत्र जाप का विशेष महत्व बताया गया है. श्रद्धा और नियम के साथ किए गए उपाय व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाते हैं. उज्जैन के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य आनंद भारद्वाज के अनुसार, इस दिन काल भैरव का पूजन करने से आर्थिक परेशानियां, शत्रु बाधाएं और मानसिक तनाव धीरे-धीरे समाप्त होने लगते हैं और जीवन में सुख-शांति का संचार होता है.
पंचांग के अनुसार, इस बार अष्टमी तिथि की शुरुआत 9 मई को दोपहर 2 बजकर 02 मिनट के लगभग होगी और इसका समापन 10 मई को दोपहर 3:06 बजे होगा. धार्मिक मान्यता के अनुसार, कालाष्टमी व्रत उसी दिन रखा जाता है, जिस दिन अष्टमी तिथि में निशिता काल (मध्यरात्रि) पड़ता है. इस आधार पर कालाष्टमी का व्रत 9 मई दिन शनिवार को रखा जाएगा.
कष्टों से मिलती है मुक्ति
काल भैरव भगवान शिव के रौद्र और शक्तिशाली स्वरूप माने जाते हैं. मान्यता है कि जो भक्त कालाष्टमी के दिन विधि-विधान से काल भैरव बाबा की पूजा करता है, उसके जीवन के पाप, कष्ट और दुख दूर होने लगते हैं. इस दिन श्रद्धा और विश्वास के साथ व्रत रखने और पूजा करने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है. साथ ही कुंडली में मौजूद राहु दोष के प्रभाव को भी कम करने में मदद मिलती है और जीवन में सकारात्मक बदलाव आने लगते हैं.
महाकाल की नगरी में काल भैरव मंदिर
उज्जैन के भैरवगढ़ में क्षिप्रा तट पर विराजमान काल भैरव मंदिर अपनी अनूठी परंपरा के कारण दूर-दूर तक प्रसिद्ध है. यहां भक्तजन भगवान को मदिरा का भोग अर्पित करते हैं, जो अपने आप में बेहद रहस्यमयी और अद्भुत माना जाता है. जब पुजारी श्रद्धा के साथ पात्र को भगवान के मुख से लगाते हैं, तो देखते ही देखते वह प्रसाद लुप्त हो जाता है. इस अलौकिक दृश्य को देखने के लिए देश-विदेश से लोग बड़ी संख्या में पहुंचते हैं. कालाष्टमी पर यहां विशेष रूप से पूजन-पाठ और भोग लगाया जाता है.
कालाष्टमी पर इन मंत्रों का करें जाप
– ओम शिवगणाय विद्महे गौरीसुताय धीमहि तन्नो भैरव प्रचोदयात।।
– ओम कालभैरवाय नम:
– ओम भ्रां कालभैरवाय फट्
– धर्मध्वजं शङ्कररूपमेकं शरण्यमित्थं भुवनेषु सिद्धम्। द्विजेन्द्र पूज्यं विमलं त्रिनेत्रं श्री भैरवं तं शरणं प्रपद्ये।।
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राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.