Ground Report: सीमेंट फैक्ट्री से विकास की रफ्तार बढ़ी, फिर भी सतना के इस इलाके में लोग परेशान, जानें वजह

Ground Report: सीमेंट फैक्ट्री से विकास की रफ्तार बढ़ी, फिर भी सतना के इस इलाके में लोग परेशान, जानें वजह


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Satna News: सीमेंट फैक्ट्रियों से जहां रोजगार और विकास मिला, वहीं आस-पास के गांवों में जीवन कठिन बना गया है. कारण जानकार आपको भी हैरानी होगी..

हाइलाइट्स

  • सीमेंट फैक्ट्रियों से सतना में रोजगार और विकास हुआ
  • फैक्ट्रियों से मनकहरी में प्रदूषण और स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ीं
  • कुछ गांवों में विकास कार्यों से स्थिति में सुधार हो रहा है

Satna News: सीमेंट उत्पादन में अग्रणी सतना की पहचान आज देशभर में एक औद्योगिक हब के रूप में होती है. यहां की सीमेंट फैक्ट्रियों से देश का लगभग 10% सीमेंट निर्यात होता है. रोजगार के नए अवसर पैदा हुए, इंफ्रास्ट्रक्चर का भी विकास हुआ है, लेकिन इस चकाचौंध के पीछे एक कड़वा सच भी छिपा है. एक ऐसा सच जिसे सिर्फ वहीं के लोग महसूस कर पा रहे हैं, जहां ये फैक्ट्रियां या माइनिंग साइट्स हैं.

मनकहरी में पर्यावरणीय समस्याएं
लोकल 18 की टीम ने जब मनकहरी स्थित एक सीमेंट फैक्ट्री के आसपास क्षेत्रों का जायजा लिया तो ग्रामीणों ने उन समस्याओं की तरफ ध्यान दिलाया जो फैक्ट्री के कारण उनके जीवन को प्रभावित कर रही हैं. सिजहटा निवासी केवी सिंह परिहार ने बताया कि बीते 10 वर्षों से सिजहटा से बगहाई जाने वाली सड़क पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है. उन्होंने बताया कि फैक्ट्री में चलने वाले डंपर ट्रकों से उठने वाली धूल से न सिर्फ सांस की समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं, बल्कि पानी भी पीने योग्य नहीं रह गया है.

प्रदूषण और स्वास्थ्य संकट का बढ़ता खतरा
परिहार के अनुसार, माइनिंग की ब्लास्टिंग इतनी गहराई पर होती है कि भूगर्भीय जलस्तर प्रभावित हो चुका है. दूषित पानी का सबसे अधिक असर सिजहटा, हिनौती और बगहाई गांवों में देखा जा रहा है. इन गांवों के लोगों को अब न तो साफ हवा मिल रही है न ही स्वच्छ जल.

हर गांव की स्थिति एक जैसी नहीं 
जहां एक ओर प्रदूषण चिंता का विषय बना हुआ है, वहीं अहीरगांव की एक महिला व्यापारी ने बताया कि सड़क निर्माण और रेलवे ओवरब्रिज जैसे विकास कार्य शुरू हो चुके हैं. इससे आने वाले समय में धूल की समस्या से कुछ राहत मिल सकती है. बमहोरी निवासी कृष्णकांत सोनी ने कहा कि फैक्ट्री के बगल में होने से शुरुआती दिनों में समस्याए थीं, लेकिन अब नाली, ब्रिज और सड़क निर्माण कार्य प्रगति पर हैं और जल आपूर्ति की स्थिति भी संतोषजनक है. मानकहरी गांव के संतोष दुबे ने बताया कि उनके क्षेत्र में फैक्ट्री से कोई खास दुष्प्रभाव नहीं पड़ा है. उनके अनुसार पानी साफ आता है और जीवन सामान्य रूप से चल रहा है.

विकास और दुष्प्रभाव के बीच जद्दोजहद
सतना की सीमेंट फैक्ट्रियां आर्थिक और औद्योगिक रूप से क्षेत्र को समृद्ध कर रही हैं, लेकिन इसके दुष्प्रभावों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. यह जरूरी है कि फैक्ट्रियां और प्रशासन मिलकर पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखें ताकि विकास की यह कहानी समग्र और सतत बन सके.

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सीमेंट फैक्ट्री से विकास की रफ्तार बढ़ी, फिर भी सतना के इस इलाके में परेशानी



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