Last Updated:
Ujjain Mahakal Temple: मान्यताओं के अनुसार, देश के सभी पवित्र जलाशय का जल इस कुंड में निहित है. इसे कोटि तीर्थ कुंड भी कहा जाता है. कुंड का जल औषधि युक्त है. इस जल से बाबा महाकाल का अभिषेक होने के बाद जो भी व्य…और पढ़ें
उज्जैन. विश्व प्रसिद्ध बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन को धार्मिक नगरी के नाम से जाना जाता है. महाकालेश्वर मंदिर की परंपराएं बाकी मंदिरों से अलग हैं. इस मंदिर के कई ऐसे रहस्य हैं, जो आज भी सुनने को मिलते हैं. अक्सर बहुत सारे लोगों के मन में यह सवाल आता है कि महाकाल के अभिषेक के लिए जल कहां से लाया जाता है. मंदिर परिसर में ही एक प्राचीन कुंड है, जिसका उल्लेख पुराणों में मिलता है. इसका नाम कोटि कुंड है. सदियों से पुण्य सलिला मां क्षिप्रा नदी एवं मंदिर परिसर में इस पावन कुंड के जल से ही भूतभावन भगवान महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का पूजन, अभिषेक, मंगला आरती और पंचामृत अभिषेक पूजन होता आ रहा है.
वैसे तो बाबा महाकाल की नगरी में बहुत से कुंड हैं, जिनके अलग-अलग धार्मिक महत्व हैं लेकिन भगवान महाकाल का जिस जल से अभिषेक होता है, वह कुंड कहीं और नहीं बल्कि महाकाल मंदिर प्रांगण में ही स्थित है. कुंड की बहुत मान्यता है. महाकाल मंदिर परिसर के अंदर ही मंदिर के पीछे की तरफ यह कुंड स्थित है. देश के प्रसिद्ध कुंडों में से एक यह कुंड है.
पवित्र जलाशयों का जल लाए थे बजरंग बली
महाकाल मंदिर के पुजारी महेश शर्मा ने लोकल 18 से कहा कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार अयोध्या नगरी में भगवान श्रीराम के विजयी होने पर यज्ञ के लिए सभी पवित्र जलाशयों का जल भगवान हनुमान लेकर आए थे. बजरंग बली आखिरी में अवंतिका नगरी पहुंचे थे, तभी उन्होंने इस कुंड में उस समस्त तीर्थों का जल डाला था. महाकाल मंदिर परिसर में स्थित भगवान सूर्यमुखी हनुमान जी प्रतिमा है. उनके एक हाथ में कलश है और दूसरे हाथ में सोटा है, जो इस कथा को प्रमाणित करता है. यहां दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं.
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Local-18 व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.