इसको कहते हैं हरा सोना, लगा लिया तो हर साल 10 लाख का मुनाफा, 40 साल तक होती रहेगी कमाई

इसको कहते हैं हरा सोना, लगा लिया तो हर साल 10 लाख का मुनाफा, 40 साल तक होती रहेगी कमाई


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Bamboo Farming Tips: बालाघाट में किसान बड़े पैमाने पर बांस की खेती कर रहे हैं. इससे बंपर मुनाफा कमा रहे हैं. इसलिए इसे हरा सोना कहते हैं. जानें कुछ खास बातें..

हाइलाइट्स

  • बालाघाट में किसान बांस की खेती से बंपर मुनाफा कमा रहे हैं
  • 12 एकड़ जमीन में 6 हजार पौधे लगाकर हर साल 10 लाख की कमाई
  • बांस की खेती में खाद-उर्वरक की जरूरत नहीं होती

Bamboo Farming Tips: मध्य प्रदेश के बालाघाट जिला वन क्षेत्र के लिए प्रसिद्ध है. यहां के लगभग 53% हिस्से में जंगल है, जो राज्य में एक रिकॉर्ड है. यहां की जलवायु मिश्रित वनों के लिए अनुकूल है. इससे यहां हर तरह के पेड़ पाए जाते हैं. इनमें शीशम, सागौन और बांस प्रमुख हैं. इस वजह से लोग वानिकी को खेती का माध्यम बना रहे हैं.

किसान कर रहे बांस की खेती
बालाघाट से करीब 70 किलोमीटर दूर बैहर तहसील के एक गांव में किसान अभिषेक ने पारंपरिक खेती छोड़कर आधुनिक और वानिकी से जुड़ी खेती शुरू की है. इससे उनकी लागत कम और आय ज्यादा हो रही है. उन्होंने अपने खेत में बांस की खेती शुरू की है. करीब 12 एकड़ जमीन में उन्होंने बांस के पौधे लगाए हैं. इसका प्लांटेशन करीब 5 साल पहले शुरू किया था, जो अब हार्वेस्टिंग के लिए तैयार है. अब आपके मन में सवाल उठ रहा होगा कि उन्होंने यह खेती कैसे शुरू की.

6 हजार पौधे, 15 लाख का निवेश
अभिषेक बताते हैं कि उन्होंने अपनी 12 एकड़ जमीन में करीब 6 हजार पौधे लगाए हैं. इसमें उन्हें शासन से भी मदद मिली है. पौधों पर सब्सिडी भी मिली है. करीब 15 लाख रुपए का खर्च आया है. अब हर साल हार्वेस्टिंग से 8 से 10 लाख रुपए की कमाई होगी. इस तरह वे चालीस साल तक कमाई करते रहेंगे. सरकार ने भी बांस को घास की श्रेणी में रखा है, जिससे इसकी कटाई में कोई समस्या नहीं आती.

दो वैरायटी पर भरोसा
अभिषेक ने बताया कि उन्होंने बालकुआं किस्म के पौधे लगाए हैं, जो बेहद खास हैं. इसकी ऊंचाई करीब 80 फीट तक जाती है. यह ठोस और वजनदार होता है. इसका इस्तेमाल फर्नीचर, प्लाई और पेपर मील के लिए होता है. इसके अलावा टूंडा किस्म भी काफी अच्छी है. इसे खेत में लगाने के बाद 8 साल में उत्पादन शुरू होता है. इसकी ग्रोथ थोड़ी धीमी होती है और इसका उपयोग अगरबत्ती बनाने में होता है.

खाद-उर्वरक की जरूरत नहीं
अभिषेक बताते हैं कि शुरुआत में इसमें खाद की जरूरत पड़ती है, लेकिन एक बार ग्रोथ शुरू होने के बाद न तो खाद की जरूरत पड़ती है और न ही उर्वरक की.

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