नई दिल्ली. कतर की मेजबानी में फीफा वर्ल्ड कप 2022 (FIFA World Cup 2022) का आगाज हो चुका है. इस बार वर्ल्ड कप में कई तरह की बंदिशें हैं जिससे दर्शक ही नहीं, खिलाड़ी और उनकी टीमें भी नाराज हैं. जर्मनी, इंग्लैंड, नीदरलैंड्स समेत करीब 10 देशों के कप्तान फीफा की एक पाबंदी पर कड़ा ऐतराज जता रहे हैं और वह है ‘वन लव’ आर्मबैंड पहनने पर पाबंदी. लेकिन यूरोपियन देशों के खिलाड़ियों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है और 10 देशों के कप्तान वन लव बैंड खेल के दौरान पहन रहे हैं.
अब इसे लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है, कल सेनेगल के खिलाफ मैच में नीदरलैंड्स के कप्तान समेत सभी खिलाड़ियों ने वन लव आर्मबैंड पहन रखा था. नीदरलैंड्स ने ये मैच 2-0 से जीता. बाद में टीम के एक मार्टिन द रून ने लिखा, ”वन लव विक्ट्री, व्हाॅट ए स्टार्ट…” दरअसल, फीफा वर्ल्ड कप के नियमों के अनुसार कप्तान के ‘आर्मबैंड’ को फीफा द्वारा अधिकृत किया जाना है और फीफा ही ही यह आर्म बैंड टीमों को मुहैया कराएगी.
यही नहीं बीबीसी की एक स्पोर्ट्स प्रेजेंटर एलेक्स स्कॉट ने वन लव आर्मबैंड पहनकर जब मैदान पर पहुंचीं तो उनके इस साहस की काफी सराहना की गई और वह सोशल मीडिया पर ट्रेंड करती रहीं. हालांकि उन्हें भी फीफा की तरफ से चेतावनी जारी की गई है.
बीबीसी की स्पोर्ट्स कमेंटेटर एलेक्स स्कॉट वन लव बैंड पहनकर कार्यक्रम में. (Twitter Screengrab)
फीफा ने दी प्रतिबंध लगाने की धमकी
फीफा ने ‘वन लव’ आर्मबैंड पहनने का फैसला करने पर टीमों को खेल प्रतिबंधों की धमकी दी है. विभिन्न रिपोर्टों ने सुझाव दिया कि कप्तानों को इसके लिए निर्देश दिया जाएगा और यदि वे फीफा द्वारा विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए कप्तान के बैंड नहीं पहनते हैं तो किक-ऑफ पर उन्हें पीला कार्ड दिखा दिया जाएगा.
फीफा के नियम कहते हैं कि खिलाड़ियों द्वारा पहने जाने वाले किसी भी उपकरण पर कोई राजनीतिक या धार्मिक नारा और बयान नहीं होने चाहिए. फीफा की तरफ से साफ तौर पर कहा गया है कि वर्ल्ड कप जैसे फीफा आयोजनों के दौरान कप्तानों को केवल फीफा द्वारा प्रदान की जाने वाला आर्मबैंड ही पहनना चाहिए. अधिकांश टीमों ने इसके खिलाफ जाकर अपने बयान में कहा था कि वे जुर्माना स्वीकार करने के लिए तैयार हैं और ऐसे खेल प्रतिबंध स्वीकार्य नहीं थे.
फीफा ने सभी 32 टीमों के कप्तानों को आर्मबैंड पहनने का विकल्प दिया है जो ‘फुटबॉल दुनिया को एकजुट करता है’ और ‘भोजन साझा करें’ जैसे सामाजिक कारणों को बढ़ावा देने वाले स्लोगन दिए हैं और यह संयुक्त राष्ट्र समर्थित अभियान का हिस्सा हैं.