मोहन ढाकले/बुरहानपुर: मध्यप्रदेश का बुरहानपुर जिला कला, संस्कृति और रचनात्मकता का अद्भुत केंद्र बन चुका है. लेकिन इस बार चर्चा का केंद्र हैं 65 वर्षीय रूप सिंह चोपड़ा, जिनकी उंगलियों से रंगोली नहीं, बल्कि जादू झरता है.
50 वर्षों का रंगीन सफर
रूप सिंह बताते हैं कि मैंने रंगोली बनाना कॉपी-किताब से शुरू किया था. जब त्योहार आते थे, मैं आंगन में रंगोली सजाता था. धीरे-धीरे लोग मेरी कला को पहचानने लगे और आज देश के 5 राज्यों में मुझे बुलाया जाता है.”
पांच राज्यों के लोग हैं फैन
रूप सिंह की कलाकारी की ख्याति सिर्फ बुरहानपुर तक सीमित नहीं है.
वे धार्मिक आयोजनों से लेकर शादियों तक, जहां भी कला की जरूरत होती है, वहां इनका निमंत्रण रहता है.
सोशल मीडिया से मिली नई उड़ान
सोशल मीडिया पर अपने वीडियो शेयर कर रूप सिंह ने और लोगों तक अपनी कला पहुँचाई है. आज उनकी “हाथ से उड़ती रंगोली” हर आयु वर्ग को हैरान कर देती है.
उनकी कला सिर्फ देखने लायक नहीं, बल्कि महसूस करने वाली है. यह आस्था से जुड़ी है, समर्पण से जुड़ी है और हर उस आयोजन से जुड़ी है जहां रंगों की जरुरत हो.