आरक्षित वर्ग को दोनों वेटिंग लिस्ट में शामिल करना गलत: विभागीय पदोन्नति समिति में एससी-एसटी को अनिवार्य किए जाने पर विरोध – Bhopal News

आरक्षित वर्ग को दोनों वेटिंग लिस्ट में शामिल करना गलत:  विभागीय पदोन्नति समिति में एससी-एसटी को अनिवार्य किए जाने पर विरोध – Bhopal News



मंत्रालय सेवा अधिकारी कर्मचारी संघ के अध्यक्ष सुधीर नायक।

मोहन कैबिनेट के फैसले के बाद सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी किए गए लोकसेवा पदोन्नति नियम 2025 के प्रावधानों का विरोध कर्मचारी संगठनों ने शुरू कर दिया है। मंत्रालय सेवा अधिकारी कर्मचारी संघ के अध्यक्ष ने जीएडी द्वारा जारी किए गए नियमों का विरोध किय

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मंत्रालय सेवा अधिकारी कर्मचारी संघ के अध्यक्ष इंजीनियर सुधीर नायक ने कहा कि लोक सेवा पदोन्नति नियम 2025 में प्रथम दृष्टया आपत्तिजनक पॉइंट यह है कि वरिष्ठता क्रम से कर्मचारियों की विचार वाली कॉमन सूची बनाए जाने को कहा गया है जबकि तीनों वर्गों की अलग-अलग विचार के लिए सूची बननी चाहिए थी।

यह है सर्वाधिक विवादित नियम

नायक ने कहा कि आरक्षण कोटा पूर्ण होने के बाद कॉमन विचार वाली सूची में शेष बचे आरक्षित वर्ग के कर्मचारियों को अनारक्षित माना जाकर अनारक्षित वैकेंसी के लिए पदोन्नति पर चर्चा में शामिल किया जाएगा। सर्वाधिक विवादित और आपत्तिजनक पॉइंट यही है। इसी कारण से उच्च पदों पर आरक्षण 100% तक पहुंच गया था। मंत्रालय में अवर सचिव के 65 पदों में से 58 पर आरक्षित वर्ग के अधिकारी थे। इसी कारण से लोग कोर्ट गए। 9 वर्ष तक पदोन्नति बंद रहने की स्थिति निर्मित हुई और उसी व्यवस्था को नये नियमों में न सिर्फ बरकरार रखा गया है बल्कि और मजबूत किया गया है।

जीरो नम्बर वाले नियुक्त होकर पदोन्नत हो गए

उन्होंने कहा कि आरक्षित वर्ग का कर्मचारी पदोन्नति के लिए आवश्यक अंक नहीं ला पाता है तो उसे एक अतिरिक्त कृपांक दिया जायेगा। मतलब हर स्टेज पर वैशाखी दी जाएगी। यही कारण है कि सामान्य ज्ञान, हिंदी मुद्रलेखन (टाइपिंग) और हिंदी शार्ट हैंड (स्टेनोग्राफर) तीनों प्रश्न पत्रों में बाकायदा “0” नंबर पाने वाले लोगों को मंत्रालय सेवा में ज्वाइन करा लिया गया, उसी तारीख से वरिष्ठता भी दे दी गई और बाद में पदोन्नति भी दी गई। दूसरी ओर सामान्य वर्ग के अनेक लोगों को मुद्रलेखन (टाइपिंग) परीक्षा विलंब से पास करने पर उतने वर्ष की वरिष्ठता नहीं दी गई।

आरक्षित वर्ग का शासकीय सेवक दोनों प्रतीक्षा सूचियों में रहेगा। आरक्षित वर्ग की प्रतीक्षा सूची में भी और अनारक्षित वर्ग की प्रतीक्षा सूची में भी पड़ेगा, यह भी विवादित बिन्दु है।

नायक का कहना है कि आरक्षण का कोटा एसटी का 20 प्रतिशत या एससी का 16 प्रतिशत रहेगा। एसटी और एससी का मूल्यांकन मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली समिति करेगी। एससी और एसटी की कमेटी में वैल्यू एक बार जो तय हो जायेगी तो वह पांच वर्ष तक स्थिर रहेगी। यह आपत्तिजनक है। इसका निर्धारण प्रतिवर्ष होना चाहिए क्योंकि हर वर्ष स्थितियां बदलती हैं। इसका अनुचित लाभ आरक्षित वर्ग को मिलने की आशंका है।

नायक ने कहा कि नियमों में कहा गया है कि किसी वर्ष में आरक्षित वर्ग में उपयुक्त व्यक्ति न मिलने पर वे पद तब तक खाली रखें जायेंगे जब तक भविष्य के किसी वर्ष में उतने उपयुक्त व्यक्ति नहीं मिल जाते। इसका मतलब है पद खाली पड़े रहेंगे, जनता भले परेशान होती रहे। सरकारी काम रुका रहे। जिस वर्ष में उपयुक्त व्यक्ति मिलेंगे उस वर्ष में अनारक्षित वर्ग को मिलने वाले पद और कम हो जायेंगे। कुछ पद पिछले सालों का बैकलॉग पूरा करने में चलें जायेंगे। वर्ष 2025 में उपयुक्त व्यक्ति नहीं मिले थे तो उसका खामियाजा 2030 का व्यक्ति क्यों भुगते। आरक्षित वर्ग में उपयुक्त व्यक्ति न मिलने की सज़ा अनारक्षित वर्ग के उपयुक्त व्यक्तियों को दी जायेगी। सरकार की नजर में आरक्षण पहले है जनता बाद में है।

आरक्षित वर्ग के जो व्यक्ति अनारक्षित पदों पर आ जाते थे उन्हें समायोजित करने की व्यवस्था पुराने नियमों में थी। यद्यपि किया कभी नहीं गया लेकिन नये नियमों में यह व्यवस्था भी नहीं रखी गई है।

उन्होंने नियम जारी होने के बाद प्रतिक्रिया देते हुए कहा पदोन्नति समिति के सदस्यों में से एक सदस्य अनुसूचित जाति और एक अनुसूचित जनजाति का रखा जाना आवश्यक किया गया है। यह इस बात को बताता है कि नियम अविश्वास को बढ़ावा दे रहे हैं। जब सारा काम नियमों के तहत होना है तो आरक्षित वर्ग के अधिकारी करें या अनारक्षित वर्ग के अधिकारी करें। यदि माहौल ऐसा बन गया है कि आरक्षित वर्ग के लोग आरक्षित वर्ग के अधिकारी पर ही भरोसा कर सकते हैं तो फिर नियमों में यह प्रावधान भी किया जाना था कि पदोन्नति समिति के सदस्यों में से एक सदस्य सामान्य वर्ग का होगा। ऐसा भी तो संभव है कि पदोन्नति समिति के सारे सदस्य आरक्षित वर्ग के हों तब अनारक्षित वर्ग को भी तो अविश्वास हो सकता है।



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