भेल-सरकार के बीच सैद्धांतिक सहमति बनी: भेल में कमर्शियल जोन और भारत मंडपम् जैसा कन्वेंशन सेंटर बनेगा – Bhopal News

भेल-सरकार के बीच सैद्धांतिक सहमति बनी:  भेल में कमर्शियल जोन और भारत मंडपम् जैसा कन्वेंशन सेंटर बनेगा – Bhopal News



एनबीसीसी को डिटेल प्रोजेक्ट बनाने का काम देने की तैयारी

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भारत हैवी इलेक्ट्रिकल लिमिटेड (बीएचईएल) की खाली पड़ी या अवैध कब्जे की करीब 2200 एकड़ जमीन का अब बड़ा उपयोग होने वाला है। राज्य सरकार और भेल के बीच इस बात पर सैद्धांतिक सहमति बन गई है कि दोनों संस्थाएं एक एसपीवी बनाएंगे, जिसमें दोनों संस्थाएं मोनेटाइजेशन (किसी भी चीज को पैसे कमाने के स्त्रोत में बदलना ) के जरिए जमीन का आर्थिक लाभ लेंगे।

इस पर काम शुरू हो गया है। जल्द ही केंद्र सरकार के उपक्रम नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कार्पोरेशन लिमिटेड (एनबीसीसी) को डिटेल सर्वे और प्रोजेक्ट का काम सौंपा जा सकता है।

भेल की इस जमीन पर प्रगति मैदान के भारत मंडपम् जैसा कन्वेंशन सेंटर बनेगा, जिसकी क्षमता देश में सर्वाधिक होगी। इसके अलावा प्रस्तावित क्षेत्र में रोजगार पैदा करने वाले मार्केट की जरूरत की सुविधाएं, हॉस्पिटेलिटी सेवा, कमर्शियल उपयोग के लिए जगह होगी। पांच-पांच एकड़ तक के बड़े प्लॉट रखे जाएंगे, ताकि यहां बैंगलुरू, मुंबई, हैदराबाद, दिल्ली या अन्य जगहों से बड़ी कंपनियां भोपाल का रुख कर सकें।

पूरे 2200 एकड़ के क्षेत्र को सर्व सुविधा युक्त बनाया जाएगा। जंबूरी मैदान को… ​दिल्ली के प्रगति मैदान की तर्ज पर विकसित किया जा सकता है। अभी यह 90 एकड़ में फैला है। कन्वेंशन सेंटर की क्षमता दिल्ली के भारत मंडपम् से कई गुना ज्यादा हो जाएगी।

नगरीय विकास एवं आवास विभाग के सूत्रों का कहना है कि राज्य सरकार और बीएचईएल मिलकर केंद्र सरकार को पूरी परियोजना से जोड़ने जा रहे हैं।

– कैंपस का सर्वे जल्द

भेल के पूरे कैंपस का सर्वे जल्द होगा। इसमें वर्तमान और भविष्य की आवश्यकता को ध्यान में रखकर जमीन चिन्हित होगी। बीएचईएल के पास कुल 6000 एकड़ जमीन है, जिसमें से एक हजार एकड़ के करीब जगह पर निजी संस्थाओं, स्कूलों, अस्पताल, कॉलेज आदि खुल गए हैं।

कुछ पर कब्जा है। शेष 5 हजार एकड़ जगह में से बीएचईएल के काम की जगह देने के बाद भी करीब 2200 एकड़ जमीन ऐसी होगी, जिसे विकसित किया जाएगा। इसी जगह पर ईडब्ल्यूएस, पीएमएवाई और एलआईजी हाइराइज बिल्डिंग भी बनेगी। जो कब्जे हटाए जाएंगे, उन्हें इन्हीं आवासीय स्कीमों में शर्तों के साथ जगह मिलेगी।

भेल ही क्यों… बीच शहर में इतनी जमीन कहीं नहीं

शहर के बीचों-बीच स्थित है। यहां से कनेक्टिविटी बेहद अच्छी है। 2200 एकड़ में फैली इतनी बड़ी भूमि किसी भी शहर में एक साथ उपलब्ध नहीं है। यदि इसकी तुलना गुजरात की 900 एकड़ की गिफ्ट सिटी, मुंबई के 370 एकड़ वाले बीकेसी और दिल्ली की 250 एकड़ की एरोसिटी से की जाए, तो यह विकसित होने के बाद देश का सबसे बड़ा और सर्वसुविधा युक्त क्षेत्र कहलाएगा।

भेल को फायदा… भेल को जो भी जमीन मिली है, उसके लीज से लेकर कई पेपर पूरे नहीं हैं, सरकार 2200 एकड़ जमीन लेने के बाद बची हुई जमीन के तमाम पेपर कंपलीट करके भेल को देगी। भविष्य में जमीन के किसी भी विवाद में भेल नहीं उलझेगा।

सरकार को फायदा…शहर के बीचों-बीच भेल की खाली पड़ी जमीन का शहर के विकास में उपयोग होगा। मार्केट की जरूरत, रोजगार, हाउसिंग, कमर्शियल क्षेत्र बनेगा। बड़े प्लाॅट होंगे तो पीएसयू, विदेशी एंबेसी के साथ बड़ी कंपनियां भोपाल की तरफ रुख करेंगी।



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