जिला मुख्यालय से करीब 8 किमी दूरी ग्राम पंचायत जैन धर्म के अनुयायियों की आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रमुख केंद्र है। यहां हर साल करीब 10 लाख से अधिक श्रद्धालु जुटते हैं। इस दो हजार की आबादी वाले इस गांव की पहाड़ी की खासियत यह है कि यहां छोटे-बड़े
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पहाड़ी की चोटी पर भगवान आदिनाथ का मंदिर है। सितंबर में यहां दशलक्षण पर्व मनाया जाता है। नए साल के पहले दिन भगवान चंद्रप्रभु का मस्तकाभिषेक होता है। जिसमें करीब 25 से 35 हजार लोगों की शिरकत होती है। इसके अलावा तीन विशेष अष्टानिका पर्व भी होते हैं। क्षेत्र कमेटी के मैनेजर जैन के मुताबिक, अष्टानिका का एक पर्व होली पर होता है।
सोनागिर में भगवान आदिनाथ (रिषभदेव) को 17 बार समवशरण (आध्यात्मिक उपदेश देने का विशेष समय) आया था। यह घटना जैन धर्म के इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। समवशरण वह दिव्य स्थान है, जहां भगवान अपने अनुयायियों को उपदेश देते हैं। यहां पर भगवान आदिनाथ के समवशरण आने से संबंधित कई कथाएं प्रचलित हैं। यह मुनि नंग और मुनि अनंग कुमारों सहित 5.5 करोड़ मुनियों की मोक्ष स्थली है।