24 साल की गायत्री और 21 साल की क्रांति ने हाल ही में शादी कर ली है। मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले के छोटे से गांव सहानिया में दो लड़कियों की आपस में शादी से गांव के लोग हैरान हैं। वजह ये है कि इससे पहले गांव में कभी किसी लड़की ने किसी लड़की से शादी नहीं की।
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दोनों शादियां एक ही तरह की हैं, लेकिन इनमें एक फर्क है। फर्क ये कि जो पहली शादी हुई थी, उसमें दोनों लड़कियों के परिजन मान गए थे और शादी धूमधाम से कराई थी। लेकिन जो शादी हाल ही में हुई है, उसमें दोनों परिवार इसके पक्ष में नहीं हैं। खास तौर पर क्रांति के परिजन।
साथ में फोटो देखकर लोग पहले गायत्री और क्रांति को सहेलियां समझते थे।
गायत्री और क्रांति की शादी के बाद दैनिक भास्कर की टीम उनके गांव पहुंची। दोनों लड़कियों के परिजनों, गांव वालों और सरपंच से बात की। पिछले मंगलवार से दोनों लड़कियां लापता हैं, शादी के बाद वो कहां चली गईं, इसकी जानकारी किसी को नहीं है। हमने परिजनों से दोनों लड़कियों का नंबर लेकर लगातार कॉल किए। रिंग जाती रही, लेकिन कोई कॉल रिसीव नहीं हुआ।
कैमरे पर बोलने को तैयार नहीं हुए गांव के लोग जब हम गांव पहुंचे तो कई लोग दो लड़कियों की आपस में शादी की बात करते नजर आए, लेकिन जैसे ही उनसे कैमरे पर बात करने को कहा तो उन्होंने इस मामले में बात करने से साफ मना कर दिया। बोले- भैया गांवदारी का मामला है। अगर हमने कुछ भी बोला तो उनके समाज के लोग हमें बहिष्कृत कर देंगे। लड़ाई की स्थिति बन जाएगी, इसलिए हम कुछ नहीं बोलेंगे। लोगों ने बातचीत में कहा कि हमारी संस्कृति में तो इसकी इजाजत नहीं है। सरकार भी इस पर कुछ नहीं कर रही है। पता नहीं क्या चाहती हैं। इससे समाज में गलत मैसेज जाता है।
घर तक ले जाने को कोई तैयार नहीं हुआ लोगों से बात करते हुए हमने उनसे लड़कियों के परिजनों के घर पूछे। हमें घर तक ले जाने के लिए कोई भी तैयार नहीं हुआ। करीब 18 साल के लड़के ने हमें दूर से दो अलग-अलग गलियां बताईं, जहां दोनों के मकान बने हुए थे।
घर तलाशते हुए सबसे पहले हम क्रांति श्रीवास के घर पहुंचे। दरवाजे खुले हुए थे। गाड़ी देख दरवाजे से एक व्यक्ति ने झांका और फिर अंदर चला गया। जैसे ही हम घर के दरवाजे के पास पहुंचे एक व्यक्ति आया। ये जानने के बाद कि हम दैनिक भास्कर से हैं, उसने हमें अंदर बुलाया। अंदर से गेट लगाकर भीतर वाले कमरे में बैठकर हमसे बात की। ये श्यामलाल श्रीवास हैं। क्रांति के पिता।

गायत्री को लड़कों की तरह बाल रखने और कपड़े पहनने का शौक है।
टीआई ने बताया, आपकी बेटी ने शादी कर ली श्यामलाल श्रीवास ने कहा, मैं दिल्ली में मजदूरी करता हूं। मेरे साथ मेरी पत्नी और बेटे भी वहीं मजदूरी करते हैं। बड़ी बेटी की शादी हो गई है। घर में दो बेटियां और उनकी दादी रहती थीं। सोमवार के दिन शाम करीब 6 बजे मेरे पास मेरी छोटी बेटी का कॉल आया। उसने बताया कि बड़ी बहन यानी क्रांति सुबह से गायब है। वो स्कूल मार्कशीट लेने गई थी, लेकिन अभी तक वापस नहीं आई है। फोन भी नहीं उठा रही है। मैंने भी उसे कॉल किया, लेकिन कॉल रिसीव नहीं हुआ।
इसके बाद मैं अपनी पत्नी और बेटे के साथ तुरंत घर के लिए निकला। मंगलवार के दिन मैं घर पहुंचा। इसके बाद हम बेटी की गुमशुदगी की शिकायत लिखवाने थाना पहुंचे। उन्होंने हमसे लड़की की फोटो, मार्कशीट और आधार कार्ड मांगा। हम लेकर गए। जैसे ही नौगांव थाना टीआई सतीश सिंह ने हमारी दी हुई तस्वीर देखी, उन्होंने तुरंत कहा कि आपकी बेटी ने तो शादी कर ली है।

थाने में पुलिस ने परिजनों को बताया कि ये शादी गैरकानूनी नहीं है।
लड़की किन्नर है, लड़कों जैसे कपड़े पहनती है क्रांति के पिता ने आगे कहा, टीआई ने हमारी बेटी की किसी और लड़की के साथ शादी की तस्वीरें दिखाईं। कहा कि इनकी तो 15 दिन पहले शादी हो चुकी है। हमने टीआई से मदद की गुहार लगाई। उनसे सही रास्ता पूछा तो उन्होंने कहा अब आप लोग घर जाइए। इस मामले में कुछ नहीं हो सकता। इसमें सरकार भी कुछ नहीं कर सकती। सरकारी तौर पर यह शादी लीगल है। हमने उनसे कहा, कम से कम एक बार उन लड़कियों से हमारी बात करा दो, लेकिन उन्होंने मदद नहीं की। इसके बाद हम खाली हाथ घर वापस आ गए।
शाम के वक्त थाने से हमारे पास कॉल आया। पुलिस ने हमसे कहा कि बेटी थाने आई है और हमसे मिलना चाहती है। मैंने वहां जाने से मना कर दिया और बेटी को घर भेजने को कहा। इसके बाद वो दोनों लड़कियां आईं। बस स्टैंड पर उन्होंने खूब तमाशा किया। घर में संदेश भिजवाया कि हम उनसे गांव के ही शनि मंदिर में जाकर मिलें। वो आखिरी बार हमसे मिलना चाहती हैं। इसके बाद कभी एक दूसरे से मुलाकात नहीं होगी। इतना सुनते ही हमारा पूरा परिवार मंदिर पहुंचा।

लड़की नहीं वो किन्नर है, लड़कियों को फंसाना उसका काम अब जब हमने उस लड़की के बारे में पता लगाया तो पता चला कि वो लड़की है ही नहीं। वो एक किन्नर है। मासूम लड़कियों को फंसाना उसका धंधा है। इससे पहले भी वो गांव की ही 2-4 लड़कियों को अपने झांसे में ले चुकी थी, लेकिन उन लड़कियों के मां-बाप घर में रहते थे तो वो उन लड़कियों को भगा नहीं पाई।
लड़कियों के चक्कर में गांव में उसके झगड़े भी हो चुके हैं। हम बाहर मजदूरी करते थे। उसने इस बात का फायदा उठाया। मेरी बेटी को तो कोई कह दे कि किसी चीज से आधार लिंक कराना है तो वो भी नहीं कर पाए। शपथ पत्र तो दूर की बात है। ये सब उसी किन्नर की साजिश है। हम सरकार से यही कहना चाहते हैं कि हमें हमारी लड़की किसी भी हाल में जिंदा वापस चाहिए।
मेडिकल टेस्ट कराना चाहिए, लड़कों की तरह रहती है क्रांति की मां सरोज श्रीवास ने कहा, मेरी बेटी क्रांति और गायत्री एक ही स्कूल में पढ़ती थीं। इसके बाद मेरी बेटी ने कॉलेज की पढ़ाई की। वो बीए पास है। हम क्रांति को एमए की पढ़ाई कराने वाले थे। गायत्री हमारे घर आती भी थी। हमारी बेटी भी उसके घर जाती थी, लेकिन हमें थोड़ा भी एहसास नहीं हुआ को वो लड़की किन्नर है। वो लड़कों से नफरत करती है। लड़कियों में ज्यादा इंटरेस्ट रखती है।
उसके पिता ने हमसे कहा था कि उन्हें अपनी लड़की से पिछले 10 साल से कोई मतलब नहीं है। वो ज्यादातर टाइम बाहर रहती है। अपना कमाती है, अपना खाती है। जब भी घर आती है तो अपना खाना अलग से बनाकर खाती है। उस लड़की का मेडिकल टेस्ट कराया जाना चाहिए।

बेटी के 21 साल का होने का इंतजार था सरोज श्रीवास ने कहा कि हमें ये भी पता चला कि ये दो साल से रिश्ते में हैं और अब तक मेरी बेटी के 21 साल की होने का इंतजार कर रही थी। मेरी बेटी दस दिन पहले ही 21 साल की हुई है। शादी की बात पता चलने के बाद हमारी बेटी ने हमें उससे 5 मिनट मिलने के लिए शनि मंदिर बुलाया था।
हमने उसे हर तरह से समझाने की कोशिश की, लेकिन दूसरी लड़की ने हमारी लड़की को बोलने ही नहीं दिया। वो ही जवाब देती रही। इसके बाद उसने हमारी बेटी का हाथ पकड़ कर कहा कि चलो हमें देर हो रही है। इसके बाद वो दोनों बस में बैठकर चली गईं। वो अभी कहां हैं, इसकी हमें कोई जानकारी नहीं है। वो फोन भी नहीं उठा रही है। उसने हमारी लड़की पर वशीकरण कर रखा है।
क्रांति के पिता ने कहा, हमें दिखा भी कि हमारी लड़की अब वो नहीं रही जो पहले थी। शनि मंदिर में हमारे समझाने के बाद उसने तीन बार उठकर हमारे पास आने की कोशिश की, लेकिन जैसे ही गायत्री उस पर हाथ रख देती थी वो चुपचाप वहीं बैठ जाती थी।
6 महीने पहले उसकी सगाई की, जेवरात गायब हैं क्रांति के पिता ने कहा, 6 महीने पहले हमने लड़की की सगाई की थी। अगला मुहूर्त आते ही हम उसकी शादी करने वाले थे। उसी की शादी के लिए दिल्ली में मजदूरी कर रहे थे। अभी जिस लड़के से उसकी शादी होने वाली थी उन्होंने ये खबर देखी तो कॉल किया कि उन्होंने सगाई के लड़की को जो सामान दिया था उन्हें वापस चाहिए।

इस मंदिर परिसर में परिवार वालों ने दोनों को समझाने की कोशिश की थी।
गांव में कोई मजदूरी कराने के लिए तैयार नहीं पिछले 3 दिनों से तो हम बेटी में ही उलझे रहे। आज जब लड़की के ससुराल वालों ने उनके दिए हुए जेवरात वापस मांगे तो हमने सामान की पेटी खोली, उसमें कुछ भी नहीं था। अंगूठी, बिछिया से लेकर तमाम सामान वो अपने साथ लेकर चली गई है, जो हमने अपनी बेटी और दामाद के लिए बनवाया था। अब हम कर्ज लेकर चुकाएंगे।
मैंने अभी सोचा कि मजदूरी करने बाहर नहीं जाऊंगा। मुझे ट्रैक्टर चलाना आता है। मैं गांव में 3 से चार लोगों के पास काम मांगने गया, लेकिन इस घटना के बाद सभी ने मुझे काम देने से मना कर दिया। गांव में सब हमें गलत तरह से देख रहे हैं। शर्म से हम घर के बाहर भी नहीं निकल पा रहे। हमारी बेटी को जान का खतरा है। हमें आशंका है कि वो किन्नर लड़की उसे कहीं बेच देगी। हम अपनी परेशानी को लेकर कोर्ट भी जाएंगे।
गायत्री की मां ने कहा- हमसे कहा बहन के यहां जा रही क्रांति श्रीवास के घर से गांव के चौराहे की तरफ करीब एक किमी दूर गायत्री रैकवार का घर है। गायत्री रैकवार के घर के बाहर सन्नाटा पसरा हुआ है। हमने दरवाजा खटखटाया। कुछ देर बाद एक महिला आई। ये गायत्री की मां थी। गायत्री की मां अपने पति को बुलाने अंदर गई, फिर वापस आ गई। हमने उनकी जुबानी पूरा मामला जानना चाहा तो वो रोने लगीं।
इसके बाद उन्होंने हमसे बात करते हुए कहा कि मेरी बेटी पिछले मंगलवार को घर से गई थी। वो हमें बताकर गई थी कि वो पास ही के गांव में अपनी बड़ी बहन के यहां घूमने जा रही है। इस मंगलवार को हमें पता चला कि उसने गांव की ही एक लड़की से शादी कर ली है। इसके बाद वो हमें थाने में मिली।
पुलिस ने हमें बताया कि इन्होंने एक दूसरे को जयमाला डाल दिया है और कहीं और जाकर रहना चाहती हैं। तुम इन्हें नहीं रोक सकती। रोकोगी तो जेल जाओगी। इसके बाद हमने पुलिस से पूछा कि क्या हम अदालत जाएं, तो उन्होंने कहा कहीं भी जाओ, तुम ही फंसोगी। उन्हें जहां जाना हो जाने दो। इसके बाद वो शाम को गांव के बस स्टैंड तक आई। खूब मनाने के बाद भी वो घर नहीं आई।

क्रांति के परिवार की तरह ही गायत्री का परिवार भी दुखी है।
उसे नियमित पीरियड आते थे, वो किन्नर नहीं गायत्री की मां हीरा बाई ने आगे बताया कि वो घर से अपने सारे डॉक्यूमेंट ले गई है। वो अपनी दादी से बहुत प्यार करती थी, उसके बिना खाना नहीं खाती थी। पता नहीं ऐसे कैसे चली गई।
हमने क्रांति के परिजनों के आरोपों को लेकर पूछा तो बोलीं कि हमारी बच्ची खुद घर छोड़ कर चली गई है तो हम क्या कहें। न उनकी बच्ची की गलती है न ही हमारी बच्ची की गलती है। हम अपनी परवरिश की ही गलती मानते हैं। हम न उसको मारपीट सकते हैं, ना ही अपनी बेटी को पीट सकते हैं। कुछ कहते तो बेटी ने हमारा नाम लेकर मरने की धमकी दी थी।
वो किन्नर नहीं थी। उसे नियमित पीरियड आते हैं।

सरपंच प्रतिनिधि बोले- गांव की संस्कृति के लिहाज से गलत गांव की सरपंच के बड़े भाई और समाजसेवक अप्पू राजा सोनी ने कहा, दो दिन पहले ही मुझे इस बात की जानकारी लगी। दोनों बेटियों ने अपने आपसी सामंजस्य से शादी की है। ऐसी ही घटना 3 महीने पहले ग्राम डोरिया में हुई थी। इसमें हमारा कोई पक्ष मायने नहीं रखता है।
इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट की साफ गाइडलाइंस हैं। उसके हिसाब से ये कानूनी तौर पर सही है, लेकिन अगर आप ग्रामीण क्षेत्र के हिसाब से देखेंगे तो ये गलत है। इसके उलट शहरी क्षेत्रों में ये नॉर्मल बात हो गई है।
उनके परिजनों को रोजगार की दिक्कत नहीं आएगी। ग्राम पंचायत में हम मनरेगा के माध्यम से उन्हें रोजगार दे सकते हैं।

गांव के एक पुजारी ने कहा, मैंने ऐसा पहली बार सुना पुजारी अरविंद कुमार दीक्षित ने कहा, ये गलत है। ये लड़कियां मेरे मोहल्ले की ही हैं। दोनों साथ रहती थीं। पढ़ती भी साथ में थीं। दोनों लड़कियों ने शनि मंदिर में कुछ दिन दुकान भी लगाई। एक लड़की पंडित जी की तरह सीधा टीका लगाती थी। पैंट, शर्ट पहनती थी। गांव में चर्चा है कि वो किन्नर है। गांव की बदनामी हो रही है। ये कैसा कानून है। ऐसा कभी नहीं हुआ। लड़की – लड़की में कभी शादी नहीं हुई। लड़कियों के परिवार वाले दुखी हैं।
टीआई ने कहा- मेडिकल जांच हमारे दायरे में नहीं, कोर्ट जाएं नौगांव टीआई सतीश सिंह ने कहा, जब लड़कियों के परिजन हमारे पास आए तो हमने उन्हें उनकी शादी की जानकारी दी। जब वो गुमशुदा थी ही नहीं तो हम उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट कैसे लिखते।
