22 भाषाओं के ज्ञाता, 80 ग्रथों के रचियता स्वामी रामभद्राचार्य सागर आकर क्यों दुखी हो गए ? 

22 भाषाओं के ज्ञाता, 80 ग्रथों के रचियता स्वामी रामभद्राचार्य सागर आकर क्यों दुखी हो गए ? 


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डॉ. हरि सिंह गौर सेंट्रल यूनिवर्सिटी ने पहली बार जगतगुरु स्वामी रामभद्राचार्य को डी लिट की उपाधि से सम्मानित किया है. स्वामी जी 22 भाषाओं के ज्ञाता और 80 से अधिक ग्रंथों के रचनाकार हैं.

हाइलाइट्स

  • स्वामी रामभद्राचार्य को डी लिट की उपाधि मिली.
  • स्वामी जी 22 भाषाओं के ज्ञाता और 80 ग्रंथों के रचियता हैं.
  • समारोह में अंग्रेजी के प्रयोग से स्वामी जी दुखी हुए.

सागर. सागर की डॉक्टर हरि सिंह गौर सेंट्रल यूनिवर्सिटी ने अपनी स्थापना के 79 साल बाद इतिहास रच दिया है. पहली बार यूनिवर्सिटी ने जगतगुरु स्वामी रामभद्राचार्य महाराज को डॉक्टर ऑफ लिटरेचर यानी डी लिट की उपाधि से सम्मानित किया है. कई सम्मानों से विभूषित पद्म विभूषण स्वामी रामभद्राचार्य जी अब डी. लिट भी कहलाएंगे.

प्रख्यात मनीषी, रचनाकार, साहित्य एवं संस्कृति के मर्मज्ञ स्वामी रामभद्राचार्य महाराज नेत्रहीन होने के बावजूद 22 भाषाओं के ज्ञाता हैं. अब तक उन्होंने 80 से अधिक ग्रंथों की रचना की है. स्वामी जी रामानंद संप्रदाय के चार जगत गुरुओं में से एक हैं और शिक्षा एवं संस्कृति के क्षेत्र में उनका योगदान कभी भुलाया नहीं जा सकेगा, उनकी 100 से अधिक दुर्लभ रचनाएं हैं, जिनमें महाकाव्य, टीकाएं और धार्मिक ग्रंथ शामिल हैं.

स्वामी रामभद्राचार्य महाराज की याददाश्त इतनी तेज है कि रामायण, श्रीमद्भागवत जी से लेकर बड़े से बड़े ग्रंथ की चौपाई और श्लोक उन्हें मौखिक याद हैं. इतना ही नहीं, वह पेज नंबर और श्लोक नंबर तक बता देते हैं. जगतगुरु स्वामी रामभद्राचार्य जी महाराज चित्रकूट में स्थित तुलसी पीठ के शंकराचार्य हैं और एक विकलांगता कॉलेज भी चलाते हैं.

बता दें कि सागर सेंट्रल यूनिवर्सिटी में 33वां दीक्षांत समारोह आयोजित किया गया, जिसमें 1225 स्टूडेंट्स को डिग्री प्रदान की गई. इस समारोह में विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर नीलिमा गुप्ता ने स्वामी जी को यह उपाधि प्रदान की और उन्हें प्रशस्ति पत्र भेंट किया. इसमें उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला, मंत्री गोविंद सिंह राजपूत और सांसद लता वानखेडे भी शामिल हुए थे.

स्वामी रामभद्राचार्य बोले- मेरा मन दुखी हुआ है
आशीर्वचन के दौरान जगतगुरु स्वामी रामभद्राचार्य ने दीक्षांत समारोह में प्रबंधकों को आईना दिखाते हुए कटाक्ष किया. उन्होंने कहा कि मुझे यहां आज ऐसा लग रहा था कि मैं भारत में नहीं, बल्कि ब्रिटेन की केम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में बैठा हूं. यहां अंग्रेजी देखकर मेरा मन दुखी हुआ है. उन्होंने कहा कि मप्र सरकार चिकित्सा शास्त्र की पढ़ाई और सिद्धांतों को हिन्दी में पढ़ा रही है और आप सागर विवि के कार्यक्रम का संचालन अंग्रेजी में कर रहे हैं. यह कब तक चलता रहेगा?

Dallu Slathia

Seasoned journalist Dallu Slathia brings over 6 years of expertise in digital media, leading 4 states for Local18- MP, Jharkhand, Himachal Pradesh and Haryana. Her experience in digital journalism includes craf…और पढ़ें

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