ये मनमानी अच्छी नहीं: रैलिंग कूद चोरल नदी के बीच जान खतरे में डाल नहाने पहुंचे दर्जनों लोग, इनमें बच्चे-महिलाएं भी – Indore News

ये मनमानी अच्छी नहीं:  रैलिंग कूद चोरल नदी के बीच जान खतरे में डाल नहाने पहुंचे दर्जनों लोग, इनमें बच्चे-महिलाएं भी – Indore News



रविवार को पिकनिक मनाने के लिए शहर के कई पिकनिक स्थलों पर लोगों की भीड़ रही। कई जगह तो पुलिस व अन्य सुरक्षा कर्मियों ने खतरनाक स्पॉट पर जाने से पर्यटकों को रोका। इधर, हर तरह की समझाइश के बाद भी चोरल नदी में 50 से 60 लोग बीच नदी में उतरकर नहाते नजर आए।

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ये लोग रैलिंग फांदकर उस तरफ गए। यह तो गनीमत रही कि महू सहित अन्य जगह बारिश नहीं हुई, वर्ना इस नदी में अचानक आने वाली बाढ़ से बड़ा हादसा हो सकता था। पर्यटन स्थलों को लेकर पुलिस-प्रशासन ने एडवाइजरी जारी कर दी है, लेकिन पर्यटक मनमानी से बाज नहीं आ रहे हैं।

चोरल गांव चारों तरफ पहाड़ों से घिरा है। भले ही यहां बारिश न हो, लेकिन दूसरे गांवों में कहीं भी बारिश होती है तो इस नदी में अचानक बाढ़ आ जाती है। बिना शोर किए नदी उफान पर आ जाती है। यहां बीते 9 सालों में 90 से ज्यादा मौतें नदी उफान के कारण हो चुकी हैं।

इसके बाद प्रशासन ने पर्यटकों की आवाजाही रोकने के लिए रैलिंग और साइन बोर्ड लगाए। इसके बावजूद रविवार को बच्चे, महिलाएं और पुरुष रैलिंग फांदकर ब्लैक जोन में घुस गए।

पहाड़ों से पानी इतनी तेजी से आता है कि संभलने का मौका भी नहीं देता

डीसीपी खुद स्पॉट पर गए, कार्रवाई की

डीसीपी चौधरी खुद रविवार को मोहाड़ी और तिंछा फाल गए थे। वहां उन्होंने तीन युवकों पर कार्रवाई की। डीसीपी ने बताया, मैंने निरीक्षण के दौरान पाया कि हर स्पॉट पर चौकीदार बढ़ाना जरूरी है। साथ ही रैलिंग और चेतावनी बोर्ड भी लगाना चाहिए।

बंक मारकर पहुंच जाते हैं छात्र- स्थानीय पुलिस ने बताया कि मानसून के चार महीने लगातार चौकसी करना संभव नहीं होता है। फिर भी हमारी टीमें रविवार को वहां तैनात रहती हैं। शहर के कई स्टूडेंट्स सामान्य दिनों में बंक मारकर पिकनिक स्पॉट पर पहुंच जाते हैं।

मोहाड़ी फाल : खुड़ैल के जंगल में बसे इस स्थान पर वन विभाग की लापरवाही दिखी

खुड़ैल के जंगलों में बसा मोहाड़ी फाल बीते सालों में सबसे ज्यादा जानलेवा पॉइंट बन चुका है। यहां जंगल कई किलो मीटर के दायरे में फैला है। पुलिस ने चेतावनी बोर्ड लगाने के साथ कोतवाल भी तैनात किए हैं। इसके बाद भी लोग दूसरे रास्तों से अंदर घुस जाते हैं। वन विभाग की बड़ी लापरवाही यह है कि लाखों का बजट मिलने के बाद भी इस खतरनाक स्पॉट को पूरी तरह कवर नहीं किया है। डीसीपी उमाकांत चौधरी के अनुसार यहां 2 साल में 11 लोगों की जान जा चुकी है। जबकि 3 दर्जन से ज्यादा गिरने से जख्मी हुए हैं।



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