Sagar Rath Yatra: पुरी की तर्ज पर 27 जून को सागर में निकलेगी जगन्नाथ रथयात्रा, 170 साल पुरानी है परंपरा

Sagar Rath Yatra: पुरी की तर्ज पर 27 जून को सागर में निकलेगी जगन्नाथ रथयात्रा, 170 साल पुरानी है परंपरा


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Sagar News: आषाढ़ माह प्रारंभ होते ही भगवान भक्तों के लिए बीमार पड़ गए हैं, और उनका स्वास्थ्य ठीक होने के लिए औषधि काढ़ा दिया जा रहा है. भोग खिचड़ी और मूंग दाल के पानी का लगाया जा रहा है.

सागर: बुंदेलखंड की सबसे पुरानी जगन्नाथ यात्रा सागर जिले के गढ़ाकोटा में निकली जाती है. जहां 22 फीट ऊंचे तीन रथों पर भगवान जगन्नाथ स्वामी, भाई बलदाऊ भैया और बहन सुभद्रा इन रथों पर सवार होकर नगर भ्रमण के लिए निकलते हैं. 27 जून को निकलने वाली रथ यात्रा के लिए भव्य तैयारियां चल रही हैं. जनकपुरी मंदिर को दुल्हन की तरह सजा दिया गया है, नगर भ्रमण करने के बाद जगन्नाथ स्वामी अपने भाई और बहन के साथ इसी मंदिर में 15 दिन तक रुकेंगे, फिर अपने धाम को वापस लौटेंगे.

रथयात्रा की शुरुआत स्वामी जानकी दास महाराज ने की थी और उन्हें स्वामी राम किशनदास महाराज के बाद पटेरिया जगदीश मंदिर की गद्दी सौंपी गई थी. राजशाही समय से यहां पर रथ निकालने की परंपरा चली आ रही है और आज भी यहां पर विधायक को राजा के रूप में देखा जाता है. क्षेत्रीय विधायक के द्वारा भगवान के विग्रह को रथ पर सवार किया जाता है और यात्रा शुरू हो जाती है. इस यात्रा में भगवान का प्रिय भोग मालपुआ का भोग लगता है. पूरे नगर में वितरण करने के लिए दो दिन तक यह प्रसाद बनता रहता है.

170 साल पुराने मंदिर की परम्परा आज भी जारी
पटेरिया धाम में स्थित जगदीश मंदिर के महंत हरिदास जी महाराज बताते हैं कि करीब 170 साल पहले इस मंदिर से जगन्नाथ रथ यात्रा शुरू हुई थी, जिसका सिलसिला आज भी अनवरत जारी है. आषाढ़ माह प्रारंभ होते ही भगवान भक्तों के लिए बीमार पड़ गए हैं, और उनका स्वास्थ्य ठीक होने के लिए औषधि काढ़ा दिया जा रहा है. भोग खिचड़ी और मूंग दाल के पानी का लगाया जा रहा है. अभी पंडित अंबिका प्रसाद वैद्य रोजाना मंदिर जाकर उनकी नब्ज टटोल रहे हैं. अंबिका प्रसाद वैद्य की तीन पीढ़ियों से भगवान की नब्ज टटोलने की परंपरा चली आ रही है.

साधु-संतों का आना शुरू
जगदीश मंदिर व्यवस्थापक पंडित मनोज तिवारी ने बताया कि रथों को खींचने के लिए भक्तों के अलावा साधु-संतों का आना शुरू हो गया है. परंपरा है कि रथ खींचते वक्त जगन्नाथ के भात को जगत पसारे हाथ के जयघोष लगाए जाते हैं. सिद्ध क्षेत्र पटेरिया मंदिर से रथ यात्रा शुरू होकर नगर के विभिन्न मार्गों से होती हुई बाजार स्थित मालगुजार परिवार के जनकपुरी मंदिर पहुंचती है. जहां बुंदेली परंपरा के अनुसार मिर्चवानी से भगवान का स्वागत होता है

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पुरी की तर्ज पर 27 जून को सागर में निकलेगी जगन्नाथ रथयात्रा, 170 साल पुरानी है



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