कार्यक्रम को संबोधित करते केंद्रीय मंत्री।
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने शुक्रवार को बूढ़े बालाजी मंदिर से हनुमान टेकरी तक लगभग चार करोड़ की लागत से बनने वाली सड़क का भूमिपूजन किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि जैसे जैसे हम आगे बढ़ रहे हैं, हमे इन धार्मिक केंद्रों को तीर्थ केंद्रों में
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बता दें कि केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया गुरुवार से गुना जिले के तीन दिवसीय दौरे पर हैं। गुरुवार को ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर ग्वालियर बैंगलोर ट्रेन का उद्घाटन किया। उन्होंने स्टेशन पर ट्रेन को हरि झंडी दिखाकर रवाना किया। इसके बाद वे खुद भी उसी ट्रेन में बैठकर शिवपुरी, गुना और अशोकनगर पहुंचे।
शुक्रवार सुबह उन्होंने सर्किट हाउस में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं से मुलाकात की। इसके बाद सिंधिया जनसंपर्क कार्यालय पर नागरिकों से मुलाकात की। उनकी समस्याओं के आवेदन लिए। साथ ही उनके निराकरण के निर्देश प्रशासनिक अधिकारियों को दिए।
केंद्रीय मंत्री शुक्रवार दोपहर शहर के बूढ़े बालाजी मंदिर पहुंचे। यहां बालाजी सरकार के दर्शन कर आशीर्वाद लिया। इसके बाद उन्होंने बूढ़े बालाजी मंदिर से हनुमान टेकरी तक बनने वाली सड़क का भूमिपूजन किया। 1.88 किलोमीटर की यह सड़क 3.87 करोड़ से बनेगी। व्हाइट टॉपिंग पद्धति से यह सड़क तैयार होगी। तीन महीने में सड़क बनकर तैयार हो जाएगी।
सड़क निर्माण का भूमिपूजन करते ज्योतिरादित्य सिंधिया।
बोले– व्यक्ति की निकटता आस्था के साथ सिंधिया ने कहा, आज आधुनिक जमाना है। किसी भी स्थान की प्राथमिकता अध्यात्म के क्षेत्र में आधुनिकता के साथ नहीं जुड़ती है। लेकिन, आज भी आधुनिक युग में व्यक्ति की निकटता आस्था के साथ जुड़ती है। काशी विश्वनाथ मंदिर का आधुनिकीकरण किया जा रहा है। सिंधिया परिवार द्वारा बनाए गए महाकाल मंदिर में महाकाल लोक बनाया जा रहा है।
वहीं गुना भी पीछे नहीं है। बूढ़े बालाजी मंदिर प्रांगण में इतना सुंदर द्वार बनाया गया है। सड़क बन रही है। हनुमान टेकरी पर परिक्रमा पथ का जो 9 करोड़ का प्रस्ताव दिया था, वो प्रस्ताव भी पूरी तरह तैयार है और जल्द ही हम उसका भी कल्याण करने जा रहे हैं। जैसे जैसे हम आगे बढ़ रहे हैं, हमे इन धार्मिक केंद्रों को तीर्थ केंद्रों में परिवर्तित करना है।

कार्यक्रम में मौजूद अतिथि।
विधायक बोले– महाराज हर बार कुछ न कुछ लाते हैं गुना विधायक पन्नालाल शाक्य ने कहा कि एक गरीब आदमी जब मजदूरी करने सुबह निकलता है और शाम को जब घर लौटता है, तो अपने बच्चों के लिए कुछ न कुछ लेकर आता है। चाहे छोले टिक्की लेकर आए, चाहे मक्खन बड़ा लेकर आए या कुछ मोतीचूर के लड्डू लेकर आए। हमारे जो सांसद हैं, वो मजदूर तो नहीं हैं, पर महाराज हैं। अपने क्षेत्र के लिए वो बिल्कुल ऐसे ही काम करते हैं, जैसे दिल्ली से अगर वो आए, तो कुछ न कुछ लेकर आते हैं। जैसे मजदूर अपने बच्चों के लिए लेकर आता है, वैसे ही महाराज काम करते हैं।