अनवांटेड ग्रास के दुश्मन हैं ‘राउंडअप’, खेत से खरपतवार का मिटा देते वजूद, लहलहा उठती है फसल

अनवांटेड ग्रास के दुश्मन हैं ‘राउंडअप’, खेत से खरपतवार का मिटा देते वजूद, लहलहा उठती है फसल


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Tips to Remove Unwanted Grass from Field: मानसून के आते ही खेतों में खरपतवार पैर पसारना शुरू कर देते हैं. केत के साथ साथ ये फसलों को भी काफी नुकसान पहुंचाते हैं. ऐसे में इन्हें से छुटकारा पाने के लिए आप इन टिप्…और पढ़ें

हाइलाइट्स

  • खरपतवार नियंत्रण के लिए ग्लाइफोसेट का उपयोग करें.
  • सेलेक्टिव और नॉन-सेलेक्टिव वीडिसाइड का फर्क समझें.
  • प्लास्टिक मल्चिंग से खरपतवार नियंत्रण में मदद मिलती है.

शिवांक द्विवेदी , सतना : मानसून के मौसम में जब किसान अपनी बगिया सजाने की तैयारी करते हैं तो सबसे बड़ी चुनौती बनकर सामने आती है खरपतवार की. ये अनवांटेड ग्रास न केवल फसलों के पोषण में हिस्सा बाँटती है बल्कि उत्पादन में भी भारी गिरावट ला सकती है. ऐसे में सवाल उठता है कि किसान किस तरह से पहले ही इन समस्याओं से निपटें ताकि उनका श्रम और निवेश व्यर्थ न जाए.

खरपतवार की शुरुआती रोकथाम के लिए “सफा चट” का उपयोग करें
लोकल 18 से चर्चा में वरिष्ठ उद्यान विकास अधिकारी सोहावल विकासखंड सुधा पटेल बताती हैं कि खरीफ सीजन में खरपतवार की समस्या सबसे अधिक होती है. अगर कोई किसान अपनी बगिया तैयार कर रहा है और वहां पहले से घास मौजूद है तो उसके लिए ग्लाइफोसेट नामक रसायन बेहद असरदार हो सकता है. ये मार्केट में राउंडअप के नाम से आता है और स्थानीय इसे सफा चट के नाम से भी जानते है. इसका छिड़काव करने के 7 से 10 दिनों के भीतर सभी खरपतवार पूरी तरह से सूख जाते हैं. इसके बाद खेत की जोताई कर किसान आसानी से बगिया तैयार कर सकते हैं.

फसल लगने के बाद कैसे करें खरपतवार नियंत्रण?
जब खेत में पौधरोपण हो चुका होता है और घास उगने लगती है तो निंड़ाई-गुड़ाई जैसे पारंपरिक तरीकों से काफ़ी हद तक समस्या नियंत्रित की जा सकती है. लेकिन यदि खरपतवार अधिक हो तो फिर वीडिसाइड यानी नींदानाशी दवाओं का सहारा लेना चाहिए. हालांकि इसमें भी सावधानी अत्यंत आवश्यक है.

वीडिसाइड का चयन करते समय रखें विशेष ध्यान
किसान को बाजार से दवा खरीदते समय उसका लेबल अवश्य पढ़ना चाहिए. यदि आपकी फसल चौड़े पत्तों वाली है और घास सकरे पत्तों वाली, तो जेलोफॉपिक जैसी दवाइयां कारगर हो सकती हैं. वहीं यदि स्थिति उलटी हो यानी फसल सकरी पत्तियों की है और खरपतवार चौड़े पत्तों वाले हैं तो मेट्रिब्यूज़ीन या प्रोपलीन जैसे विकल्प बेहतर माने जाते हैं.

सेलेक्टिव और नॉन-सेलेक्टिव वीडिसाइड में फर्क समझना जरूरी
विशेषज्ञ बताती हैं कि वीडिसाइड दो तरह के होते हैं एक तो नॉन सेलेक्टिव और एक सेलेक्टिव. नॉन सेलेक्टिव वीडिसाइड जैसे ग्लाइफोसेट फसल और खरपतवार दोनों को नष्ट कर देते हैं. इसका उपयोग खेत खाली करने या बागवानी से पहले ही करना चाहिए. वहीं सेलेक्टिव वीडिसाइड केवल खरपतवार को नष्ट करते हैं और फसल को सुरक्षित रखते हैं.

प्लास्टिक मल्चिंग: नई तकनीक से रोकें खरपतवार
आधुनिक तकनीक जैसे प्लास्टिक मल्चिंग भी खरपतवार नियंत्रण में मददगार साबित हो सकती है. इसमें पौधों के चारों ओर प्लास्टिक की एक परत बिछा दी जाती है जिससे नमी बनी रहती है और घास उगने की संभावना कम हो जाती है. खासकर बारिश के मौसम में यह तरीका बेहद असरदार है.

कुल मिलाकर खरपतवार नियंत्रण के लिए पहले से योजना बनाना जरूरी है. रसायनों के चयन में सतर्कता, समय पर स्प्रे, लेबल पढ़ना और खेत की स्थिति को ध्यान में रखकर उपाय करने से किसान खरपतवार की समस्या से प्रभावी ढंग से निपट सकते हैं. मानसून में सही तकनीक और जानकारी के साथ किसान अपनी बगिया को सुरक्षित और उपजाऊ बना सकते हैं.

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