वेतनमान, पदोन्नति और स्थानांतरण को लेकर नाराज पटवारी: हरदा में 20 मांगों को लेकर सीएम के नाम ज्ञापन सौंपा, आंदोलन की चेतावनी दी – Harda News

वेतनमान, पदोन्नति और स्थानांतरण को लेकर नाराज पटवारी:  हरदा में 20 मांगों को लेकर सीएम के नाम ज्ञापन सौंपा, आंदोलन की चेतावनी दी – Harda News


हरदा में सोमवार शाम पटवारी संघ ने प्रांतीय आव्हान पर मुख्यमंत्री के नाम संयुक्त कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। इसमें लंबित मांगों को लेकर शीघ्र कार्रवाई की मांग की गई। संघ ने चेतावनी दी है कि मांगे नहीं मानी गईं तो प्रदेशभर में चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाए

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ज्ञापन में हाल ही में हुए अंतरजिला संविलियन स्थानांतरण पर सवाल उठाए गए। बताया गया कि पात्र पटवारियों को वंचित किया गया। पति-पत्नी दोनों पटवारी होने के बावजूद एक ही जिले में पदस्थापना नहीं दी गई। गंभीर बीमारी, वैवाहिक स्थिति और म्यूचुअल ट्रांसफर योग्य होने के बाद भी कई नाम नजरअंदाज किए गए। उम्मीद 1200 तबादलों की थी, सिर्फ 509 ही हुए।

वेतनमान में 27 साल से कोई बदलाव नहीं ज्ञापन में बताया गया कि पटवारियों के वेतनमान में 27 वर्षों से कोई उन्नयन नहीं हुआ है। समान कार्य के बावजूद उन्हें दूसरे पदों की तुलना में कम वेतन मिल रहा है। स्नातक व सीपीसीटी योग्यताओं के बावजूद उन्हें 2800 ग्रेड पे और कैडर रिव्यू का लाभ नहीं मिला।

पदोन्नति की प्रक्रिया बंद, परीक्षा 6 साल से नहीं हुई पटवारियों ने कहा कि पदोन्नति की प्रक्रिया पूरी तरह बंद है। नायब तहसीलदार की विभागीय परीक्षा छह साल से आयोजित नहीं हुई। गोपनीय चरित्रावली न बनने से हजारों पटवारियों को समयमान वेतन और पदोन्नति का लाभ नहीं मिल रहा है।

ज्ञापन देने के लिए बड़ी संख्या में पटवारी पहुंचे।

ज्ञापन में सप्ताहांत (शनिवार-रविवार) को भी काम लेने की शिकायत की गई है। बताया गया कि इसके बदले कोई अतिरिक्त वेतन नहीं दिया जाता। स्वामित्व योजना के सफल क्रियान्वयन के बावजूद मानदेय का भुगतान भी नहीं हुआ है।

नवीन पटवारियों को तीन साल तक अपूर्ण वेतन संघ ने मांग की कि नियुक्त नवीन पटवारियों को तीन साल तक 70, 80 और 90 फीसदी वेतन देने की प्रणाली खत्म की जाए और उन्हें शुरू से शत-प्रतिशत वेतन मिले। ज्ञापन में साइबर तहसील भोपाल द्वारा ऑनलाइन नामांतरण के मामलों को लटकाने और सतना जिले में नियमविरुद्ध तबादलों का मुद्दा भी उठाया गया।

संघ ने कहा है कि यदि इन सभी बिंदुओं पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई, तो प्रदेशभर में चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा। इसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।



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