टीचर की गलती से आधार में गड़बड़ी, स्कूल से बाहर हुआ मासूम, मजदूर पिता दर-दर भटक रहे

टीचर की गलती से आधार में गड़बड़ी, स्कूल से बाहर हुआ मासूम, मजदूर पिता दर-दर भटक रहे


अमित जायसवाल
खंडवा.
“मैं खुद कभी स्कूल नहीं गया, पर चाहता था कि मेरा बेटा पढ़-लिखकर कुछ बने…”- ये शब्द हैं मजदूरी करके परिवार पालने वाले जितेंद्र सांवले के, जिनकी आंखें आजकल बेटे स्वराज की पढ़ाई रुक जाने से नम हैं. एक मामूली सी गलती, जिसने बेटे का आधार कार्ड बिगाड़ दिया और उसे स्कूल से बाहर कर दिया. आरोप है कि स्कूल टीचर ने आधार में जन्मतिथि गलत दर्ज कर दी- और अब वह गलती पिता और बेटे दोनों का जीवन तोड़ रही है. जितेंद्र कलेक्टर से लेकर आधार केंद्र और यहां तक कि दिल्ली तक  एक साल में कई चक्कर काट चुके हैं, लेकिन समाधान नहीं मिला. बेबस पिता ने कहा कि मेरा बेटा देख रहा है कि मैं मजदूरी छोड़कर आधार कार्ड में सुधार के लिए भटक रहा हूं और कुछ नहीं हो रहा है. मेरे बेटे पर क्‍या गुजर रही है? यह कोई समझ नहीं पा रहा.

दरअसल, खंडवा के सुरगांव जोशी गांव का एक गरीब मजदूर पिता पिछले एक साल से सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहा है, लेकिन अब भी उसके बेटे का आधार कार्ड ठीक नहीं हुआ. जितेंद्र सांवले अपने बेटे स्वराज को पढ़ा-लिखा इंसान बनाना चाहते हैं, लेकिन आधार कार्ड की एक तारीख ने उसके स्कूल में दाखिले पर ब्रेक लगा दिया है. स्वराज सांवले नौवीं कक्षा का छात्र है, लेकिन आधार कार्ड में जन्मतिथि 8 जून 2011 की बजाय 28 जून 2011 दर्ज है. इस मामूली सी लगने वाली गलती ने उसकी शिक्षा की राह में बड़ी रुकावट खड़ी कर दी है. स्कूल प्रशासन इसे लेकर एडमिशन देने से मना कर रहा है. मजबूरी में स्वराज अब स्कूल नहीं जा रहा.

आधार सेवा केंद्र, एसडीएम ऑफिस, कलेक्ट्रेट और दिल्ली से भी नहीं मिल सका समाधान 
जितेंद्र कहते हैं, “मैंने अपनी जिंदगी में कभी स्कूल नहीं देखा. मजदूरी कर अपना पेट पाला, लेकिन अब चाहता हूं कि मेरा बेटा कुछ बन जाए.” वे बताते हैं कि अब तक आधार सेवा केंद्र, एसडीएम ऑफिस, कलेक्ट्रेट और यहां तक कि दिल्ली जाकर भी सुधार की कोशिश की, लेकिन हर जगह से उन्हें सिर्फ़ निराशा ही मिली. “पांच बार कलेक्टर ऑफिस जा चुका हूं, लेकिन हर बार एक ही जवाब- ‘देखते हैं.’ मैं मजदूरी छोड़कर कितनी बार आऊं? बच्चा पढ़ेगा नहीं तो क्या करेगा? अब तो मजदूरी ही करवाना पड़ेगा,” कहते हुए जितेंद्र की आंखें भर आती हैं.

कलेक्‍टर ने दिया भरोसा, हम जल्‍द कराएंगे करेक्‍शन
अब उम्मीद है कलेक्टर ऋषव गुप्ता की उस बात से जिसमें उन्होंने कहा, “यह मामला गंभीर और संवेदनशील है, हमारी ई-गवर्नेंस टीम UIDAI से संपर्क में है और जल्द समाधान किया जाएगा.” यह सिर्फ एक परिवार की लड़ाई नहीं है, बल्कि सिस्टम की खामियों से लड़ते लाखों आम लोगों की कहानी है. जहां एक गलत तारीख किसी बच्चे की जिंदगी की दिशा तय कर देती है और एक मजदूर पिता का सपना कुचला जाता है.

आधार में जन्मतिथि बदलने का मौका सिर्फ एक बार : UIDAI के नियमों के अनुसार आधार कार्ड में Date of Birth केवल एक बार ही अपडेट की जा सकती है.यदि पहली बार में भी गलती रह गई तो दोबारा सुधार कराना बेहद कठिन हो सकता है. ऐसे में पहली बार अपडेट करते समय सावधानी और सही दस्तावेज ज़रूरी हैं.

आधार में DOB बदलने के लिए जरूरी दस्तावेज और प्रोसेस क्या है: आधार में DOB बदलने के लिए पैन कार्ड, बर्थ सर्टिफिकेट, पासपोर्ट जैसे दस्तावेज मान्य हैं.नजदीकी आधार सेवा केंद्र जाकर फॉर्म भरें और जरूरी डॉक्यूमेंट जमा करें. बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन और ₹50 फीस के बाद अपडेट की प्रक्रिया शुरू होती है.

अगर दोबारा बदलाव की जरूरत हो तो क्या करें : दूसरी बार जन्मतिथि अपडेट करवाने के लिए Exceptional Case में आवेदन देना होता है. इसके लिए DOB सर्टिफिकेट और डिक्लेरेशन फॉर्म लेकर आधार केंद्र जाना होगा. UIDAI की संतुष्टि होने पर ही बदलाव की अनुमति मिलती है, अन्यथा रिक्वेस्ट रद्द हो सकता है.



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