ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीजेपी ज्वाइन करने के बाद चंबल-ग्वालियर क्षेत्र में कांग्रेस कमजोर नजर आ रही है.
मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में उपचुनाव (By-election) से पहले बीजेपी (BJP) ग्वालियर और चंबल बेल्ट में अपनी पूरी ताकत लगा रही है. ज्योतिरादित्या सिंधिया के बीजेपी ज्वाइन करने के बाद यहां की सीटें पार्टी के लिए महत्वपूर्ण हैं.
मंत्री लखन घनघोरिया के बयान पर गौर करें तो वह 75 से 80 फीसदी कार्यकर्ताओं के डीएनए में कांग्रेस के होने की बात कहते हैं. ऐसे में क्या यह समझा जाए कि कांग्रेस के 20 से 25 प्रतिशत कार्यकर्ताओं में कांग्रेस का डीएनए नहीं है और उनकी वफादारी पार्टी के प्रति नहीं है.
कांग्रेस में डीएनए टेस्टिंग
बहरहाल जो भी हो लेकिन ग्वालियर चंबल अंचल में बीजेपी का सदस्यता अभियान और कांग्रेस में डीएनए की टेस्टिंग यह बताती है कि हालात दोनों ही जगह ठीक नहीं है. दल बदल की राजनीति के दौर से गुजरी प्रदेश की राजनीति अब उपचुनाव की ओर चल पड़ी है. ऐसे में जोर आजमाइश का दौरा और अधिक बढ़ेगा बीजेपी के तीन दिवसीय सदस्यता अभियान में कांग्रेस के कितने डीएनए वाले कार्यकर्ता बीजेपी ज्वाइन करते हैं यह तो पता नहीं, लेकिन पार्टी के मूल कार्यकर्ताओं पर ही डीएनए का सवाल खड़ा हो गया है.प्रशासन को आगे कर राजनीति
हालांकि पूर्व मंत्री लखन घनघोरिया ने भाजपा के सदस्यता अभियान को लेकर यह बात स्पष्ट कर दी है कि पार्टी को इस सदस्यता अभियान से कोई फर्क नहीं पड़ने वाला. वहीं ग्वालियर चंबल अंचल में बीजेपी के कद्दावर नेताओं की मौजूदगी से पहले हुई कांग्रेस कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारीयों पर भी घनघोरिया ने भाजपा पर निशाना साधा है. उनका कहना है कि बीजेपी हमेशा प्रशासन को आगे करके राजनीति करती आ रही है, लेकिन कांग्रेस का कार्यकर्ता डरेगा नहीं यह वही पार्टी है जो अंग्रेजों से नहीं डरी.