सड़क 100 साल पुरानी लेकिन नक्शे से गायब, ग्रामीणों का अनोखा प्रदर्शन, Video

सड़क 100 साल पुरानी लेकिन नक्शे से गायब, ग्रामीणों का अनोखा प्रदर्शन, Video


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Balaghat News: जब अधिकारियों ने सड़क को नक्शे से ही गायब कर दिया, तो ग्रामीणों ने गजब प्रदर्शन किया. ग्रामीणों ने सड़क को बंद कर दिया और वहां पर एक तख्ती टांग दी. उस पर लिखा है, ‘यह रोड नक्शे में नहीं है. कृपया…और पढ़ें

बालाघाट. यूं ही नहीं कहते एमपी अजब है, सबसे गजब है. दरअसल यहां पर ऐसे कारनामे होते हैं, जो इसे गजब बनाते हैं. हाल ही में एक मामला सामने आया है, जिसमें एक सड़क को जिम्मेदारों ने नक्शे से ही गायब कर दिया. अब ग्रामीणों ने भी गजब तरीके से विरोध किया. ग्रामीणों ने सड़क को अस्थायी तौर पर बंद ही कर दिया. बालाघाट जिले के जनपद पंचायत लांजी के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत बिसोनी के दखनीटोला का यह मामला है. यहां एक ऐसी सड़क है, जो पूरी तरह दलदल में बदल गई, जिससे गांव में रहने वाले लोगों को समस्या का सामना करना पड़ रहा था. ऐसे में सड़क से परेशान हुए ग्रामीणों ने जिम्मेदारों से गुहार लगाई लेकिन जिम्मेदारों ने न सिर्फ मदद से इनकार किया बल्कि सड़क को नक्शे से ही गायब कर दिया. ऐसे में ग्रामीण आक्रोशित हो गए और एक अनोखा प्रदर्शन करना शुरू कर दिया.

जब जिम्मेदारों ने सड़क को नक्शे से ही गायब कर दिया, तो ग्रामीणों ने गजब का प्रदर्शन किया. दरअसल जिम्मेदारों ने जिस सड़क को नक्शे से गायब किया, ग्रामीणों ने उसे बंद कर दिया. वहां एक तख्ती भी टांग दी. उस पर लिखा है, ‘यह रोड नक्शे में नहीं है. कृपया इस रोड से आना-जाना प्रतिबंधित है.’ गांव के उप-सरपंच पवन कश्यप का कहना है कि जो सड़क चर्चा में है, वो 100 साल से भी पुरानी है. ऐसे में इसका नक्शे में दर्ज न होना विभाग की बहुत बड़ी चूक है. इस रोड पर हमेशा ही ग्रामीणों को बारिश के समय दिक्कतों का सामना करना पड़ता है लेकिन शासन-प्रशासन ने इसपर बिल्कुल ध्यान नहीं दिया.

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ग्रामीणों को हो रही परेशानी
सड़क के नक्शे में मौजूद नहीं होने से मार्ग के निर्माण की स्वीकृति नहीं मिल पा रही है. दखनीटोला आवास में कीचड़ से भरे मार्ग के किनारे कई दर्जन परिवार हैं, जिनके द्वारा प्रतिदिन अपनी जरूरत के लिए उक्त मार्ग का उपयोग किया जाता है लेकिन वर्तमान में उन्हें अति आवश्यक सेवाओं के लिए भी संघर्ष करने की जरूरत पड़ रही है. जैसे गैस सिलेंडर की गाड़ी अंदर नहीं आ पाती है, तो उन्हें सिलेंडर रोड पर लेने जाना पड़ता है. बच्चों की स्कूल वैन अंदर नहीं आ पाती है, तो बच्चों को कंधे पर बैठाकर मुख्य मार्ग तक छोड़ने और लाने जाना पड़ता है. इस तरह हर जरूरत के लिए भी लोगों को घरों से निकलकर कीचड़ में पैदल चलकर रोड तक आना पड़ रहा है, जिससे ग्रामीण आक्रोशित हैं.

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