वासु चौरे /भोपाल. शिवराज सरकार ने जब 2023 में प्रदेश भर के अहाते बंद किए, तो मंशा साफ थी, शराब तो पीओ लेकिन सभ्यता से. सड़क पर नशा नहीं चलेगा. मगर भोपाल की तस्वीर कुछ और ही बयां कर रही है.
आज हालात ये हैं कि शहर की सड़कें ही मयखाने बन चुकी हैं. शराब दुकानों के बाहर बोतलें ही नहीं, गिलास और नमकीन के पाउच भी बिखरे पड़े हैं. लोगों ने दुकान के बाहर ही बैठकर पीना शुरू कर दिया है बिलकुल बेधड़क, बिलकुल खुलेआम.
“सरकार ने अहाते बंद किए, अब सड़कें बन गईं अहाते!”
न्यूज़ 18 की टीम जब भोपाल की सड़कों पर रियलिटी चेक पर निकली, तो अप्सरा टॉकीज, सुभाष नगर, बैरागढ़, कोलार रोड, होशंगाबाद रोड जैसे पॉश इलाके नशे में डूबे मिले. कई जगहों पर पढ़े-लिखे युवा, सड़क किनारे बैठकर खुलेआम शराब पीते कैमरे में कैद हुए. जब पुलिस पहुंची, तो कुछ लोगों की घरों में भगदड़ मच गई, लेकिन सवाल अब भी वहीं है, कानून का डर कहां है?
डीजीपी ने कहा कि आबकारी विभाग से बात करेंगे, सामाजिक कार्यकर्ता बोले… ये सामाजिक शर्म है”
डीजीपी कैलाश मकवाना ने न्यूज़ 18 से कहा कि वे जल्द ही आबकारी विभाग से बात करेंगे और सख्त कार्रवाई की जाएगी. सामाजिक कार्यकर्ता शुभम चौहान ने कहा कि अहाते बंद करने का मकसद यही था कि लोग सार्वजनिक जगहों पर न पीएं. लेकिन अब सड़कें ही शराबखोरी की जगह बन गई हैं. महिलाएं, बच्चे, बुजुर्ग सभी को रोज़ परेशानी उठानी पड़ती है.
क्या सख्ती होगी या शराब यूं ही सड़क पर छलकती रहेगी?”
भोपाल जैसे शहर में, जहां युवा, बुजुर्ग, महिलाएं हर दिन घर से बाहर निकलते हैं शराब पीने वालों की ये खुली आज़ादी शहर की छवि और सुरक्षा दोनों पर सवाल है. सरकार की नीति चाहे जितनी अच्छी हो, जमीन पर हालात उलट हैं.