प्रमुख राजस्व आयुक्त अनुभा श्रीवास्तव और प्रमुख सचिव राजस्व विभाग विवेक पोरवाल।
राजस्व न्यायालयों की संख्या कम करने के सरकार के फैसले का तहसीलदारों द्वारा विरोध किए जाने के बाद राज्य सरकार ने यू टर्न लिया है। प्रमुख सचिव राजस्व विवेक पोरवाल ने कहा है कि कोई भी राजस्व न्यायालय बंद नहीं होगा। सभी रेवेन्यू कोर्ट पहले की तरह काम करत
.
शुरुआती दौर में 31 जुलाई तक 12 जिलों में यह व्यवस्था लागू की जाएगी और जो कमियां सामने आएंगी उसे सुधारकर एक अगस्त से पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा।
प्रमुख सचिव राजस्व पोरवाल ने कहा कि यह बात गलत सामने आ रही है कि रेवेन्यू कोर्ट बंद हो रहे हैं। उनकी ओर से कैबिनेट के फैसले के बाद जो आदेश जारी किया गया है, उसमें साफ लिखा है कि सभी रेवेन्यू कोर्ट चलेंगे।
पोरवाल ने कहा कि शुरुआत में जिन 12 जिलों में तहसीलदारों से रेवेन्यू कोर्ट और लॉ एंड ऑर्डर का काम अलग-अलग कराने का फैसला किया गया है, उनमें भोपाल, नरसिंहपुर, सिवनी, उमरिया, शहडोल शामिल हैं।
तहसीलदारों के प्रतिनिधिमंडल ने की मुलाकात
कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा (तहसीलदार) संघ के प्रतिनिधिमंडल ने आज रेवेन्यू कोर्ट कम किए जाने के राजस्व विभाग के फैसले के विरोध में प्रमुख सचिव विवेक पोरवाल से मुलाकात की। संघ के प्रांताध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह चौहान और साथी अफसरों ने इसकी जानकारी प्रमुख सचिव को दी तो उन्होंने आश्वस्त किया कि कोई कोर्ट कम नहीं की जा रही हैं।
इसके बाद संघ के प्रतिनिधिमंडल को प्रमुख राजस्व आयुक्त से उन जिलों की जानकारी लेने के लिए कहा गया, जहां यह व्यवस्था लागू की जा रही है। गौरतलब है कि कल तहसीलदारों के संगठन ने सभी जिलों में रेवेन्यू कोर्ट कम किए जाने के फैसले के बाद कलेक्टरों को ज्ञापन भी सौंपा था।
प्रमुख राजस्व आयुक्त के पत्र से बनी गफलत की स्थिति
बताया जाता है कि इस मामले में गफलत की स्थिति प्रमुख राजस्व आयुक्त अनुभा श्रीवास्तव के चलते बनी। उन्होंने सभी जिलों को पिछले महीने हुई वीडियो कांफ्रेंसिंग के दौरान आयुक्त भू अभिलेख और प्रमुख राजस्व आयुक्त कार्यालय के मर्जर की जानकारी देते हुए कहा था कि न्यायालय तहसीलदार और न्यायालय नायब तहसीलदार को इंटीग्रेट कर सिर्फ एक ही तहसीलदार न्यायालय रखा जाएगा।
इसके लिए सभी उपतहसीलों को तहसील कार्यालय में समायोजित किया जाएगा। ऐसा होने पर रेवेन्यू कोर्ट की संख्या घटना तय था।
किसानों को फायदा के बजाय नुकसान होता
राजस्व विभाग अगर उपतहसीलों को तहसील कार्यालय में मर्ज करता तो इसका सबसे ज्यादा नुकसान गांव में रहने वाले किसानों को होता। एक तहसील में दो सौ से ज्यादा गांव होते हैं और तहसील मुख्यालय ऐसे मेंं दूर पड़ता है।
उपतहसील की व्यवस्था लागू रहने से रेवेन्यू संबंधी मामलों के लिए पच्चीस से तीस किमी दूर तय करने के बजाय 10 से 12 किमी दूरी में किसानों का काम नायब तहसीलदार के यहां से हो जाता है। अगर नायब तहसीलदार के किसी फैसले से किसान असंतुष्ट हैं, तो वे तहसीलदार के कोर्ट में आवेदन करते हैं। उप तहसील खत्म होने से उन्हें समय और धन दोनों ही गंवाना पड़ता।