खंडवा से इंदौर तक फिलहाल लोगों को बस या निजी वाहनों से सफर करना पड़ता है, जिसमें तीन से चार घंटे लग जाते हैं. अब जब रेलमार्ग तैयार होगा, तो यह दूरी महज दो घंटे के भीतर तय की जा सकेगी, वो भी आरामदायक, सुरक्षित और किफायती तरीके से. इस रेल लाइन की खास बात यह भी होगी कि यह प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर पहाड़ियों, जंगलों और घाटियों से होकर गुजरेगी. इससे न सिर्फ सफर आरामदायक होगा बल्कि यात्रियों को प्राकृतिक सौंदर्य का अनुभव भी मिलेगा. ओंकारेश्वर, हनवंतिया, काजलरानी और अन्य रमणीय स्थल इस रेलमार्ग से और अधिक सुलभ हो जाएंगे, जिससे खंडवा में पर्यटन को जबरदस्त बढ़ावा मिलेगा.
वन विभाग द्वारा NOC मिलते ही रेलवे विभाग अब निर्माण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगा. भूमि अधिग्रहण, सर्वेक्षण और निर्माण कार्य को अब गति दी जाएगी. उम्मीद जताई जा रही है कि अगले दो से तीन साल में यह लाइन चालू हो सकती है. इससे पहले जो तकनीकी और पर्यावरणीय अड़चनें थीं, वे अब दूर हो चुकी हैं. इस परियोजना को आगे बढ़ाने में खंडवा के स्थानीय नेताओं, सामाजिक संगठनों और रेलवे अधिकारियों की अहम भूमिका रही है. विभिन्न स्तरों पर बैठकों, प्रस्तावों और निरीक्षणों के माध्यम से इस काम को आगे बढ़ाया गया. स्थानीय जनता की यह वर्षों पुरानी मांग अब साकार होने जा रही है.
निमाड़ के विकास की रीढ़
खंडवा-इंदौर रेललाइन केवल एक यात्री सुविधा नहीं बल्कि निमाड़ के विकास की रीढ़ बनने जा रही है. इस परियोजना के पूरा होने से न सिर्फ यात्रा आसान होगी बल्कि पर्यटन, व्यापार, शिक्षा और सामाजिक विकास के अनेकों द्वार खुलेंगे. यात्रियों को अब जल्द ही नर्मदा की घाटियों और पहाड़ियों के मनमोहक दृश्य देखते हुए इंदौर तक रेल यात्रा का आनंद मिलेगा.