खेत में लहलहाती फसल ने तोड़ा दम, सीहोर के किसानों को खा गया सरकारी इंतज़ाम!

खेत में लहलहाती फसल ने तोड़ा दम, सीहोर के किसानों को खा गया सरकारी इंतज़ाम!


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Sehore Agriculture Failure: सीहोर में किसानों की फसल नकली बीज और जहरीली दवाओं के कारण जलकर नष्ट, किसान खून के आंसू रो रहे, प्रशासन पर उठे गंभीर सवाल.

नकली दवा से फसल जली

हाइलाइट्स

  • सीहोर में नकली बीज और दवाओं से फसलें नष्ट.
  • किसानों की मेहनत और पूंजी राख में बदल गई.
  • प्रशासन की चुप्पी पर उठे गंभीर सवाल.

प्रदीप चौहान/ सीहोर: मध्य प्रदेश के कृषि उत्पादक जिलों में शुमार सीहोर से इस वक्त एक दिल दहला देने वाली तस्वीर सामने आई है. यहां किसान खून के आंसू रो रहे हैं वजह है नकली बीज और जहरीली रासायनिक दवाओं का उपयोग, जिसने किसानों की मेहनत को पल भर में राख कर दिया. किसानों की सालभर की पूंजी और मेहनत खेत में झुलस गई, लेकिन प्रशासन और सत्ता तंत्र अभी भी चुप्पी साधे बैठा है.

बुवाई हुई पूरी, लेकिन फसल नहीं बची

जिला कृषि विभाग ने इस खरीफ सीजन में 3 लाख 27 हजार हेक्टेयर में बुवाई का लक्ष्य तय किया था, जो किसानों ने पूरी कर दी थी. खेतों में सोयाबीन और अन्य फसलें अंकुरित होने लगी थीं. लेकिन इसी बीच, बाजार से खरीदी गई नकली दवाओं ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया.

असर ऐसा कि फसल जलकर हो गई बर्बाद

जैसे ही किसानों ने बीज बोने के बाद अंकुरण बढ़ाने के लिए बाजार की रासायनिक दवाओं का छिड़काव किया, सोयाबीन की फसल जलने लगी. इसके साथ ही कई जगहों पर सरकारी बीज भी नकली निकले, जिससे खेतों में फसलें उगने से पहले ही खत्म हो गईं.

अब तो बस सरकार को कोस रहे हैं…”

किसान एम एस मेवाड़ा, कैलाश मेवाड़ा, बाबूलाल मेवाड़ा और राकेश मेवाड़ा जैसे दर्जनों लोगों ने बताया कि उन्होंने शासन की योजना पर भरोसा कर बीज और दवाएं खरीदीं, लेकिन अब उनकी हालत ऐसी है कि घर चलाने तक की स्थिति नहीं बची.

एक किसान ने आंसू रोकते हुए कहा कि “बीज भी नकली, दवा भी नकली… अब पूछने वाला कोई नहीं,”

प्रशासन ने अब तक नहीं ली सुध

किसानों की लगातार शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार अफसर कोई ठोस जवाब नहीं दे पाए हैं. सहायक संचालक मिनी चौकसे ने कहा कि सैंपल भेजे गए हैं, रिपोर्ट का इंतज़ार है.” लेकिन किसानों का कहना है कि “रिपोर्ट आए या न आए, फसल तो गई!”

जमीनी हकीकत

न्यूज़ 18 के सीहोर संवाददाता प्रदीप एस चौहान ने जब खेतों का दौरा किया तो खेतों में झुलसी हुई फसलों और निराश बैठे किसानों की तस्वीरें सामने आईं. कई किसानों ने कहा कि “हमने कभी सोचा नहीं था कि सरकारी सिस्टम इतना कमजोर निकलेगा.”

अब सवाल उठता है कौन लेगा जिम्मेदारी?

क्या किसानों को मिलेगा मुआवजा?

क्या नकली बीज और दवा बेचने वालों पर कार्रवाई होगी?

और क्या कभी प्रशासन सीधे ज़मीन पर उतरकर सच्चाई देखेगा?

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