बादल बताते हैं कि रितेश ने कंपनी के लिए बहुत काम किया होगा, लेकिन मृत्यु के बाद कंपनी ने जो किया, वह एक नजीर है. उन्होंने कहा कि कंपनी की यह सोच समाज और देश के लिए उदाहरण है. उन्होंने बताया कि अंदाजा लगाया जाए तो 50 से 60 लाख रुपए पूरी प्रक्रिया में कंपनी ने खर्च किए होंगे. क्योंकि रुटीन में करीब 5 हजार रुपए एक व्यक्ति का किराया होता है. ऐसे में तीन अलग-अलग लोकेशन से मॉनीटर कर इंदौर भेजना, फिर खाली प्लेन का वापस जाना, इतना खर्च तो आया ही होगा. कंपनी ने जो उदाहरण पेश किया, वह हमारे लिए सोच से परे था.