बिना किसी जोड़ के काले पत्थरों से बना ये मंदिर, बनावट देख वैज्ञानिक भी हैरान

बिना किसी जोड़ के काले पत्थरों से बना ये मंदिर, बनावट देख वैज्ञानिक भी हैरान


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Khargone News: मंदिर में एक पीपल का पेड़ है, जिसके नीचे कई देवी-देवताओं की प्राचीन मूर्तियां प्रतिष्ठित हैं. इनमें से कुछ प्रतिमाएं क्षेत्र में खुदाई के दौरान मिली थीं, जिन्हें बाद में विधिपूर्वक मंदिर में स्था…और पढ़ें

खरगोन. मध्य प्रदेश के खरगोन जिले की कसरावद तहसील में एक ऐसा मंदिर है, जो आज भी रहस्य बना हुआ है. नीलकंठेश्वर महादेव का यह मंदिर काला डेरा के नाम से प्रसिद्ध है. यह मंदिर जिले के कसरावद क्षेत्र में एक ऊंचे टीले पर यादव मोहल्ले में स्थित है. सावन के महीने में यहां शिवभक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है. यह मंदिर सिर्फ श्रद्धा का केंद्र नहीं बल्कि भारत की प्राचीन वास्तुकला का भी अद्भुत उदाहरण भी है. मंदिर की सबसे बड़ी खासियत इसकी निर्माण शैली है. पूरा ढांचा काले पत्थरों से इस तरह से तैयार किया गया है कि इसमें कहीं भी सीमेंट, चूना या किसी भी प्रकार का जोड़ नहीं है. बड़े-बड़े पत्थरों को इस तरह काटकर एक-दूसरे से मिलाया गया है कि वे सदियों से अपनी जगह पर टिके हुए हैं. न तो दीवारें दरकी हैं और न ही छत में कोई दरार आई है. यह बात वैज्ञानिकों और पुरातत्व विशेषज्ञों के लिए आज भी रहस्य बनी हुई है.

मंदिर के गर्भगृह में दिव्य शिवलिंग स्थापित है, जिसकी जलाधारी पर पीतल की परत चढ़ी हुई है. गर्भगृह के मुख्य द्वार पर गणेश जी की प्रतिमा है और ठीक सामने मंदिर प्रांगण में नंदी महाराज विराजमान हैं. गर्भगृह के पीछे माता पार्वती, भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी, भगवान काल भैरव और अन्य देवी-देवताओं की भी अलौकिक मूर्तियां मौजूद हैं. इन मूर्तियों की नक्काशी भी काले पत्थरों पर बेहद बारीकी से की गई है.

पुरातत्व विभाग ने माना धरोहर
मंदिर के पुजारी प्रकाश शुक्ला और गौरव शुक्ला के अनुसार, यह मंदिर 500 साल से भी पुराना है. पुरातत्व विभाग ने भी इस मंदिर का सर्वे किया है और अपनी रिपोर्ट में इसे ‘काला डेरा’ के नाम से दर्ज किया है. विभाग के अनुसार, यह मध्य प्रदेश के प्राचीनतम शिव मंदिरों में से एक है. श्रद्धालुओं की मान्यता है कि यहां भोलेनाथ को जल चढ़ाने से हर मनोकामना पूर्ण होती है. इसी आस्था के चलते सावन में यहां श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचते हैं.

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बिना किसी जोड़ के काले पत्थरों से बना ये मंदिर, बनावट देख वैज्ञानिक भी हैरान

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Local-18 व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.



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