Last Updated:
Flowers Farming Tips: किसान अब पारंपरिक खेती छोड़ फूलों की खेती की ओर बढ़ रहे हैं. गेंदा, गुलाब, रजनीगंधा जैसी फसलें कम लागत और कम ज़मीन में अधिक मुनाफा दे रही हैं.
हाइलाइट्स
- वैज्ञानिक तरीकों और सही समय की प्लानिंग
- फसलें कम लागत और कम ज़मीन में अधिक मुनाफा
- फूलों की खेती बन रही ग्रामीण युवाओं का स्टार्टअप
खरीफ और रबी में करें प्लानिंग
फूलों की खेती की सफलता के पीछे सबसे बड़ा मंत्र है सही समय पर योजना और वैज्ञानिक तरीके. उद्यान विकास अधिकारी सुधा पटेल लोकल 18 से बताती हैं कि फूलों की नर्सरी लगाने का उपयुक्त समय जून से जुलाई के पहले तक का होता है क्योंकि इसके बाद भारी बारिश से नर्सरी प्रभावित हो सकती है. जून में बीज बोकर, नर्सरी तैयार कर ली जाए और जुलाई के आरंभ में ट्रांसप्लांट कर दिया जाए तो सितंबर तक अच्छी फूलों की पैदावार मिल सकती है. इससे खरीफ सीजन में फूलों की लगातार मांग को पूरा किया जा सकता है. जब खरीफ के पौधे अक्टूबर में खत्म होने लगें तभी किसान रबी सीजन के लिए नई नर्सरी तैयार कर ले ताकि फूलों की सप्लाई में कोई गैप न आए.
नर्सरी लगाने के लिए शेडनेट का प्रयोग करना लाभकारी होता है. अगर किसी किसान के पास बड़ा नेट नहीं है तो वह घर की पुरानी मच्छरदानी से भी एक छोटा ग्रीनहाउस बनाकर उसमें नर्सरी तैयार कर सकता है. पौधों की शुरुआती ग्रोथ अगर स्वस्थ होती है तो फील्ड में ट्रांसप्लांट के बाद वे बेहतर पैदावार देंगे. विशेषज्ञों का कहना है कि नर्सरी की गुणवत्ता ही पूरी खेती की दिशा तय करती है अगर पौधे कमजोर हैं तो फूल कम और छोटे होंगे, जिससे बाज़ार मूल्य भी घटेगा.
बाजार में मजबूत पकड़
फूलों की खेती की खास बात यह है कि इसमें तुड़ाई और बिक्री जल्दी शुरू हो जाती है. किसान हर 2-4 महीने में नई फसल से ताज़ा फूल प्राप्त कर सकते हैं. ट्रांसप्लांटेशन रो-रो (पंक्ति में) पद्धति से करें जिससे फूलों की तुड़ाई और रख-रखाव में आसानी हो. बाजार में फूलों की कीमत आम तौर पर 40 रुपये से 100 रुपये प्रति किलो तक होती है. वहीं दिवाली, शादी और अन्य त्योहारों के सीजन में यह रेट 150 रुपये किलो तक भी पहुंच जाता है.
ग्रामीण युवाओं के लिए सुनहरा स्टार्टअप आइडिया
फूलों की खेती अब सिर्फ एक पारंपरिक काम नहीं बल्कि आधुनिक कृषि व्यवसाय का हिस्सा बन चुकी है. सही तकनीक, समय पर सिंचाई और बाजार से जुड़ाव के साथ यह खेती एक गेम चेंजर साबित हो सकती है. सतना के कई युवा किसान इस मॉडल को अपनाकर स्वरोजगार की राह पर निकल चुके हैं. यदि इसे एक व्यवस्थित बिजनेस के रूप में देखा जाए, तो फूलों की प्रोसेसिंग यूनिट, खुशबू निकालने की यूनिट और फूलों के गार्लैंड्स बनाने का काम भी साथ में शुरू किया जा सकता है.
Anuj Singh serves as a Content Writer for News18MPCG (Digiatal), bringing over Two Years of expertise in digital journalism. His writing focuses on hyperlocal issues, Political, crime, Astrology. He has worked …और पढ़ें
Anuj Singh serves as a Content Writer for News18MPCG (Digiatal), bringing over Two Years of expertise in digital journalism. His writing focuses on hyperlocal issues, Political, crime, Astrology. He has worked … और पढ़ें