भमोरी से स्कीम नंबर 54 में सयाजी तक बन रही सड़क का मामला
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मनमाने तरीके से नक्शा पास करने वाले नगर निगम अफसरों का एक और कारनामा सामने आया है। भमोरी प्लाजा से सयाजी होटल तक मास्टर प्लान में प्रस्तावित 30 मीटर चौड़ी सड़क पर अफसरों ने 18 मीटर की पुरानी चौड़ाई के आधार पर 7 बिल्डिंगों के नक्शे पास कर डाले। जब निगम के इंजीनियर सड़क की सेंट्रल लाइन डालने पहुंचे तब मामले का खुलासा हुआ।
अब निगम उलझ गया है कि आखिर सड़क कैसे बनाए? क्योंकि जो नक्शे पास हुए हैं, उनके आधार पर जमीन मालिक जगह देने को राजी नहीं हैं। जो सात नक्शे पास हुए हैं, उनमें से पांच पर निर्माण भी शुरू हो चुका है, जबकि दो प्लॉट खाली हैं। सभी कमर्शियल अनुमति वाले हैं, जिनमें मॉल, कॉम्प्लेक्स के निर्माण होना है।
2008 में ही 18 से 30 मीटर हो चुकी चौड़ाई इस सड़क की चौड़ाई 2008 के पहले 18 मीटर थी। बाद में आए मास्टर प्लान-2021 में इसे 30 मीटर कर दिया गया क्योंकि पूरा इलाका कमर्शियल डेवलप हो रहा है और ट्रैफिक दबाव भी अधिक है। अब निगम सेंट्रल लाइन फिक्स नहीं कर पा रहा, क्योंकि भवन मालिकों का तर्क है कि नक्शे टीएंडसीपी और निगम से ही मंजूर हुए हैं।
टीएंडसीपी अफसर भी आ सकते हैं कठघरे में नगर नियोजन के स्पष्ट नियम हैं कि नक्शे को पास करते समय सड़क की चौड़ाई के अनुसार निरीक्षण जरूरी है। 4 साल में जब अफसरों ने यहां निरीक्षण किया होगा तब उन्हें सड़क की चौड़ाई की जानकारी होगी, पर उन्होंने टीएंडसीपी की पुरानी अनुमति को ही सबूत माना।
जिम्मेदार कौन
4 साल में अलग-अलग अफसरों के हाथ से निकली फाइल
इस गड़बड़ी का खुलासा जनकार्य समिति प्रभारी राजेंद्र राठौर ने किया। अब अपर आयुक्त अभय राजनगांवकर ने पूरी रिपोर्ट बनाकर निगमायुक्त शिवम वर्मा को भेजी है। इसमें उन जिम्मेदार बिल्डिंग अफसर और बिल्डिंग इंस्पेक्टर की भूमिका देखी जा रही है। ये पूरा मामला 2021 से 2024 के बीच का बताया जा रहा है। चूंकि कमर्शियल मॉल को भी मंजूरी मिली है, लिहाजा वह प्रकरण नक्शे के लिए बनी कमेटी के पास भी आया होगा। अफसरों के नाम सामने आने के बाद उन पर कार्रवाई की तैयारी है।
^यह मामला सामने आया है। सात नक्शे पास हुए हैं। इनमें से दो ऐसे हैं, जिनकी अनुमति अभी हाल ही में हुई है। बाकी नक्शे कब पास हुए, यह भी पता लगवा रहे हैं। – अभय राजनगांवकर, अपर आयुक्त, नगर निगम