सिराज-कृष्णा ने जो किया वह भारत की कोई जोड़ी नहीं कर पाई, 56 साल में पहली बार…

सिराज-कृष्णा ने जो किया वह भारत की कोई जोड़ी नहीं कर पाई, 56 साल में पहली बार…


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भारत ने इंग्लैंड को पांचवें टेस्ट में 6 रन से हराया. इस जीत के दो हीरो रहे. मोहम्मद सिराज ने मैच में 9 विकेट झटके तो प्रसिद्ध कृष्णा ने 8 विकेट अपने नाम किए.

प्रसिद्ध कृष्णा और मोहम्मद सिराज ने पांचवें टेस्ट में कुल 17 विकेट झटके.

हाइलाइट्स

  • भारत ने इंग्लैंड को पांचवें टेस्ट में 6 रन से हराया.
  • मोहम्मद सिराज ने मैच में सबसे अधिक 9 विकेट झटके.
  • प्रसिद्ध कृष्णा ने मैच की दोनों पारियों में 4-4 विकेट लिए.
नई दिल्ली. भारत-इंग्लैंड टेस्ट सीरीज का रोमांच फैंस की जेहन में बरसों रहने वाला है. चाहे शुभमन गिल के 754 रन हों या मोहम्मद सिराज के 23 विकेट… ऐसे कई प्रदर्शन रहे जिन्होंने भारतीयों के दिल जीत लिए. 2-2 से बराबर रही इस सीरीज में दर्जनों रिकॉर्ड भी बने. सिराज और प्रसिद्ध कृष्णा ने 56 साल पुराने प्रदर्शन की याद दिला दी जब भारत के दो गेंदबाजों ने दोनों पारियों में 4-4 विकेट झटके थे.

भारतीय क्रिकेट में ऐसे कई खिलाड़ी रहे हैं जो जोड़ियों में शिकार करते रहे हैं. 1960-70 के दशक में तो स्पिनरों की तिकड़ी भारत की सबसे बड़ी ताकत थी लेकिन ओवल टेस्ट से पहले सिर्फ एक बार ऐसा हुआ था जब दो भारतीय गेंदबाजों ने किसी मैच की दोनों पारियों में 4-4 विकेट झटके. ओवल टेस्ट में इंग्लैंड की पहली पारी में मोहम्मद सिराज और प्रसिद्ध कृष्णा ने 4-4 विकेट अपने नाम किए. इसके बाद दूसरी पारी में मोहम्मद सिराज ने 5 और प्रसिद्ध कृष्णा ने 4 विकेट झटके. इस तरह इन दोनों गेंदबाजों ने मैच में कुल 17 विकेट लिए.

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ओवल टेस्ट से पहले सिर्फ एक बार ऐसा हुआ है जब भारत के दो गेंदबाजों ने किसी टेस्ट मैच की दोनों पारियों में 4-4 विकेट झटके हों. यह कमाल बिशन सिंह बेदी और इरापल्ली प्रसन्ना ने किया था. बेदी और प्रसन्ना ने 1969 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ दिल्ली टेस्ट की पहली पारी में 4-4 विकेट झटके थे. इसके बाद दोनों ने दूसरी पारी में 5-5 विकेट लेकर ऑस्ट्रेलिया की पारी 107 रन पर समेट दी थी. बेदी-प्रसन्ना के इस प्रदर्शन की बदौलत भारत ने यह मैच 7 विकेट से जीता था. भारत के लिए पहली पारी में अशोक मांकड़ ने 97 रन बनाए थे. दूसरी पारी में अजित वाडेकर 91 रन बनाकर नाबाद रहे थे.

1970 के दशक में बेदी-प्रसन्ना-चंद्रशेखर की तिकड़ी बेहद मशहूर रही. 1980 के दशक में पहली बार ऐसा पेस अटैक सामने आया जिसने भारत को कुछ मैच जिताए. कपिल देव और मनोज प्रभाकर की जोड़ी ने लंबे समय तक भारत के लिए नई गेंद से गेंदबाजी की. 1990 के दशक में अनिल कुंबले, वेंकटपति राजू और राजेश चौहान की तिकड़ी ने कमाल किए. इसके बाद 2000 के दशक में अनिल कुंबले-हरभजन सिंह की जोड़ी भारत की सबसे बड़ी मैच विनर रही. फिर 2010 के दशक में रविचंद्रन अश्विन और रवींद्र जडेजा की स्पिन जोड़ी विपक्ष को डराती रही. इसी बीच जसप्रीत बुमराह-मोहम्मद शमी की जोड़ी ने भी खूब मैच जिताए लेकिन 1969 के बाद ऐसा कभी नहीं हुआ के भारत के दो गेंदबाजों ने दोनों पारियों में 4-4 विकेट लिए हों.

विजय प्रभात शुक्लाAssociate Editor

दो दशक से पत्रकारिता में सक्रिय. अप्रैल 2020 से News18Hindi में बतौर एसोसिएट एडिटर स्पोर्ट्स की जिम्मेदारी. न्यूज18हिंदी से पहले दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, अमर उजाला अखबारों में पेज-1, खेल, देश-विदेश, इलेक्शन ड…और पढ़ें

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