सोशल मीडिया पर अपशब्द कहना भी रैगिंग: एमएचआरसी में एंटी रैगिंग वीक की शुरुआत, 18 अगस्त तक चलेंगी जागरूकता गतिविधियां – Bhopal News

सोशल मीडिया पर अपशब्द कहना भी रैगिंग:  एमएचआरसी में एंटी रैगिंग वीक की शुरुआत, 18 अगस्त तक चलेंगी जागरूकता गतिविधियां – Bhopal News


भोपाल मेमोरियल अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र (बीएमएचआरसी) में सोमवार से एंटी रैगिंग वीक की शुरुआत हुई, जो 18 अगस्त तक चलेगा। इसकी शुरुआत 12 अगस्त को एंटी रैगिंग डे पर विद्यार्थियों के लिए आयोजित जागरूकता कार्यक्रम से हुई। कार्यक्रम में प्रसिद्ध मनोवैज्

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डॉ. काकोली राय ने कहा कि रैगिंग सिर्फ शारीरिक या प्रत्यक्ष उत्पीड़न तक सीमित नहीं है, बल्कि मोबाइल मैसेज, वॉट्सऐप, फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपशब्द कहना या परेशान करना भी रैगिंग की श्रेणी में आता है। उन्होंने चेताया कि किसी भी रूप में रैगिंग पीड़ित छात्र की मानसिक स्थिति पर गहरा असर डालती है, जिससे अनिद्रा, व्यग्रता, डिप्रेशन और यहां तक कि आत्महत्या जैसी प्रवृत्तियां भी पनप सकती हैं। राय ने विद्यार्थियों से अपील की कि रैगिंग का सामना होने पर कभी चुप न रहें, तुरंत शिक्षकों, दोस्तों या एंटी रैगिंग हेल्पलाइन से संपर्क करें।

बीएमएचआरसी की प्रभारी निदेशक डॉ. मनीषा श्रीवास्तव।

डॉ. मनीषा श्रीवास्तव ने कहा कि बीएमएचआरसी में अब तक रैगिंग की कोई घटना सामने नहीं आई है और यहां का माहौल सौहार्दपूर्ण है। उन्होंने छात्रों को मरीजों की मदद को प्राथमिकता देने और सहपाठियों के साथ संवेदनशील व्यवहार रखने की सलाह दी। बीएमएचआरसी की डीन अकेडेमिक्स डॉ. सुरभि सहाय ने बताया कि रैगिंग रोकने के लिए संस्थान में सभी जरूरी कदम उठाए गए हैं और फैकल्टी सदस्य 24 घंटे छात्रों के लिए उपलब्ध रहते हैं।

बीएमएचआरसी: शिक्षा और प्रशिक्षण का प्रमुख केंद्र बीएमएचआरसी न केवल अत्याधुनिक चिकित्सा सेवाओं के लिए जाना जाता है, बल्कि यहां उच्चस्तरीय शैक्षणिक कार्यक्रम भी संचालित होते हैं। संस्थान में एनेस्थीसिया, कार्डियोलॉजी, न्यूरोसर्जरी, यूरोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी, ऑप्थेलमोलॉजी सहित विभिन्न विभागों में एमडी/एमएस और सुपर स्पेशियलिटी कोर्स उपलब्ध हैं। यहां नर्सिंग और पैरामेडिकल कॉलेज भी संचालित होते हैं, जहां भावी नर्सों और स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षित किया जाता है।



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