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भारत, इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया को छोड़ दें तो तकरीबन हर देश में टेस्ट मैचों में उतने दर्शक स्टेडियम नहीं पहुंचते, जितने वनडे या टी20 मैच देखने आते हैं. इस कारण कई देशों के लिए टेस्ट मैच खेलना घाटे का सौदा साबित …और पढ़ें
शुभमन गिल और आकाश दीप. दुनिया में अभी सिर्फ 12 देश ही ऐसे हैं जिन्हें टेस्ट टीम का दर्जा हासिल है. इनमें से कई टीमों को आईसीसी वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप में शामिल नहीं किया जाता क्योंकि उनका खेल का स्तर थोड़ा नीचे है. टॉड ग्रीनबर्ग ने कहा कि टेस्ट खेलने वाले देशों की संख्या कम होना क्रिकेट के लिए नुकसानदायक नहीं बल्कि फायदेमंद ही है. टेस्ट टीमों के साथ-साथ मैच भी कम ही होते हैं. भारत, ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, दक्षिण अफ्रीका, न्यूजीलैंड और पाकिस्तान जैसे देश साल में 10-12 टेस्ट खेलते हैं. बाकी देश 10 से कम टेस्ट मैच ही खेलते हैं.
टॉड ग्रीनबर्ग ने इसके बाद एक खतरे का अंदेशा जताया. उन्होंने कहा, ‘बहुत से परंपरावादी लोग शायद इसे पसंद नहीं करें. लेकिन अगर हम उन्हें (सभी देशाें) टेस्ट क्रिकेट खेलने के लिए मजबूर करेंगे तो हम सचमुच इन देशों को दिवालिया बनाने की कोशिश कर रहे होंगे.’ बता दें कि जिम्बाब्वे, अफगानिस्तान, श्रीलंका समेत कई देशों के क्रिकेट बोर्ड आर्थिक तंगी से जूझते रहे हैं. इसी कारण जिम्बाब्वे क्रिकेट बोर्ड कई बार डीआरएस इस्तेमाल नहीं करता क्योंकि इसके लिए जितने संसाधन की जरूरत होती है, उसका खर्च जुटाना मुश्किल होता है.
दो दशक से पत्रकारिता में सक्रिय. अप्रैल 2020 से News18Hindi में बतौर एसोसिएट एडिटर स्पोर्ट्स की जिम्मेदारी. न्यूज18हिंदी से पहले दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, अमर उजाला अखबारों में पेज-1, खेल, देश-विदेश, इलेक्शन ड…और पढ़ें
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