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Agriculture News: धान की बालियों पर हमला करने वाला माछी रोग (पत्ती लपेटक कीट) किसानों की फसल को बर्बाद कर देता है. ये कीट पत्तियों का रस चूसकर उन्हें कमजोर करता है और फसल की वृद्धि रोक देता है.
विशेषज्ञ की चेतावनी
लोकल 18 से बातचीत में खेती के जानकार चंदन सिंह ने बताया कि माछी रोग का हमला जैसे ही धान में बालियां आने लगती हैं वैसे ही तेज हो जाता है. ये मक्खियां बालियों से रस चूस लेती हैं, जिससे दाने नहीं बन पाते और उपज बुरी तरह प्रभावित होती है. अगर समय पर इसका उपचार न किया जाए तो किसान को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है.
चंदन सिंह के अनुसार माछी रोग से बचाव के लिए बाजार में कई तरह की रासायनिक दवाएं उपलब्ध हैं. लेकिन अगर किसान देसी तरीके अपनाना चाहें तो वे नीम ऑयल का छिड़काव कर सकते हैं जो कीटों को फसल के करीब आने से रोकता है.
घरेलू देसी कीटनाशक बनाने की विधि
अगर किसान खुद कीटनाशक बनाना चाहते हैं तो एक आसान देसी नुस्खा अपनाया जा सकता है. सबसे पहले एक लीटर माठा लें और उसमें पिसी हुई मिर्च डालकर इस मिश्रण को एक घड़े में भरें. फिर इस घड़े को मिट्टी में दबाकर कम से कम एक हफ्ते तक सड़ने दें. इसके बाद इसमें 7 लीटर पानी मिलाकर अच्छे से मिक्स करें और छान लें. तैयार घोल को खेत में छिड़कें, इससे न केवल माछी रोग बल्कि किसी भी तरह के कीट फसल के आस पास भी नहीं भटकेंगे.
विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर पहचान और त्वरित उपचार से किसान अपनी मेहनत और पैदावार दोनों को बचा सकते हैं. देसी और रासायनिक उपायों का सही समय पर उपयोग धान की फसल को बम्पर पैदावार दिलाने की कुंजी है.
Anuj Singh serves as a Content Writer for News18MPCG (Digital), bringing over Two Years of expertise in digital journalism. His writing focuses on hyperlocal issues, Political, crime, Astrology. He has worked a…और पढ़ें
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