मऊगंज को जिला बने 2 साल पूरा: 92 पद खाली, जिला अस्पताल नहीं; लोग बोले-सब हालात पुराने, नाम का नया जिला – Mauganj News

मऊगंज को जिला बने 2 साल पूरा:  92 पद खाली, जिला अस्पताल नहीं; लोग बोले-सब हालात पुराने, नाम का नया जिला – Mauganj News


जिले को बने 2 साल पूरा हो गया है। लेकिन अभी तक सिविल अस्पताल को जिला अस्पताल में तब्दील नहीं किया गया है।

मऊगंज को जिला बने आज दो साल पूरा हो गया है। 15 अगस्त 2023 को मध्यप्रदेश के 53वें जिले के रूप में अस्तित्व में आया। 4 मार्च को तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसका ऐलान किया था। नागरिकों को उम्मीद थी कि अब कलेक्टर, एसपी और सभी विभाग यहीं हों

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हालांकि आज दो साल पूरा होने पर भी तस्वीर निराश करने वाली है। अधिकांश विभागों के कार्यालय अब भी रीवा से संचालित हो रहे हैं। जिले में स्वास्थ्य सुविधाएं बदहाल हैं। सड़क और पानी जैसी बुनियादी जरूरतें अधूरी हैं। भ्रष्टाचार के किस्से खुलेआम सुनाई दे रहे हैं।

लॉ कॉलेज की इमारत से हो रहा जिला मुख्यालय का संचालन

जिला मुख्यालय का संचालन अस्थायी रूप से आज भी लॉ कॉलेज की इमारत से आज भी हो रहा है। भूतल पर कलेक्टर कार्यालय और ऊपर की मंजिल पर एसपी का दफ्तर है।

कलेक्ट्रेट में 100 स्वीकृत पदों में से 92 रिक्त हैं। अपर कलेक्टर, डिप्टी कलेक्टर, जिला पंचायत सीईओ, सहायक लेखाधिकारी, अधीक्षक, स्टेनोग्राफर, वाहन चालक लगभग सभी अहम पद खाली हैं। नतीजा यह है कि कलेक्टर को कई छोटे-मोटे काम खुद देखने पड़ते हैं।

जिले के अधिकांश विभाग रीवा से ही संचालित

जिला शिक्षा अधिकारी, पीडब्ल्यूडी, पीएचई, वन, परिवहन, जल संसाधन, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, जिला कोषालय, कृषि, उद्यान, खनिज, स्वास्थ्य अधिकांश विभाग रीवा से ही संचालित हैं। रीवा से कर्मचारियों की लिस्ट जारी हुई थी, लेकिन मऊगंज को सिर्फ एक कर्मचारी मिला।

जिला अस्पताल की अब तक घोषणा नहीं हुई

मऊगंज का सिविल अस्पताल अब भी जिला अस्पताल का दर्जा पाने से वंचित है। महिला डॉक्टर और कई जरूरी विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं हैं। नतीजतन प्रसव और गंभीर मामलों में मरीजों को 70 किमी दूर रीवा रेफर किया जाता है।

सिविल अस्पताल के बीएमओ डॉ. प्रद्युमन शुक्ला ने बताया कि हमारा अस्पताल आज भी सिविल अस्पताल के नाम से चल रहा है, जिला अस्पताल की घोषणा तक नहीं हुई। निजी अस्पतालों का हाल यह है कि डिलीवरी और ऑपरेशन के लिए 50–60 हजार रुपए वसूले जा रहे हैं, क्योंकि सरकारी अस्पताल में सुविधाएं नहीं हैं।

310 पुलिस बल की स्वीकृति लेकिन सिर्फ 195 तैनात

जिला बनने पर 310 पुलिस बल की स्वीकृति मिली थी, लेकिन तैनाती सिर्फ 195 की हुई। 1,189 पुलिस बल की मांग भेजी गई है। वाहन भी अपर्याप्त हैं, जिससे गश्त और कार्रवाई प्रभावित होती है।

अधिवक्ता सतीश कुमार द्विवेदी ने बताया कि अपराध आंकड़े बताते हैं पहले कभी-कभार ही हत्या होती थी, अब हत्या, बलात्कार और नशाखोरी आम हो गई है। नशीली गोलियां, सिरप और शराब की बड़ी खेपें पकड़ी जा रही हैं। गड़रा कांड और गडरा गांव की हिंसक घटना जैसी घटनाओं ने कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं।

जनपद सदस्य बोले-दो साल में हालात पहले से बदतर

जनपद सदस्य शेख मुख्तार सिद्दीकी ने बताया कि दो साल में हालात पहले से भी बदतर हुए है। मुख्यमंत्री की ओर से की गई 21 घोषणाओं में से एक भी पूरी नहीं हुई।

अधिवक्ता अनिल तिवारी ने बताया कि जिला केवल कागजों पर है। ज्यादातर अधिकारी रीवा में बैठकर काम कर रहे हैं।

भाजपा जिला अध्यक्ष बोले- तीन साल में मऊगंज पूरी तरह से स्थापित होगा

दो साल में जिले के विकास को लेकर जब बीजेपी नेता डॉ. राजेंद्र मिश्रा से बात की गई तो उन्होंने कहा कि जिले के लिए 16 विभागों के अधिकारी यहीं पदस्थ रहेंगे। कलेक्ट्रेट भवन के लिए भूमि आवंटन और टेंडर की प्रक्रिया पूरी हो गई है। तीन साल में मऊगंज पूर्ण स्वरूप में स्थापित होगा।



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