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अभी तक आपने सुना होगा, रेलवे के कर्मचारी फ्री में ट्रेन में ट्रेवल कर सकते हैं. यह बिल्कुल गलत है, दरअसल रेलवे अपने कर्मचारियों और अधिकारियों को पास की सुविधा देती है, जिसके अलग-अलग नियम और प्रावधान होते हैं. ज…और पढ़ें
रेलवे अपने कर्मचारी और उनके परिवार को पास देता है. इस पास से वे फ्री में यात्रा कर सकते हैं. लेकिन, ये पास निश्चित समयावधि के लिए होते हैं. कुछ नियम और शर्तें और भी हैं. पास के जरिए सिर्फ फ्री में यात्रा नहीं होती, कई जगह कर्मचारियों को टिकट के लिए पैसे भी देने पड़ते हैं. कर्मचारियों को दिया जाने वाला रेलवे ट्रेवल पास एक निश्चित अवधि के लिए वैध होता है.
रेलवे से रिटायर्ड अधिकारी एसके श्रीवास्तव ने बताया, भारतीय रेलवे अपने कर्मचारियों की 5 वर्ष की नियमित सेवा के बाद उनको पास और पीटीओ यानी रियायती टिकट आदेश जारी करता है. इसमें एक साल में तीन सेट नि:शुल्क रेलवे पास और चार सेट पीटीओ के हकदार कर्मचारी होते हैं. 5 साल से पहले कर्मचारियों को एक सेट पास मिलता है. हालांकि, यह नियम सिर्फ कर्मचारियों के लिए होता है, अधिकारियों के लिए अलग नियम होते हैं.
पीटीओ में लगता है किराया, पास में मुफ्त यात्रा
आगे बताया, पास के माध्यम से पूरी फैमिली को यात्रा करने का ऑप्शन मिलता है, जबकि पीटीओ मतलब रियायती टिकट आदेश, जहां रेलवे कर्मचारियों को यात्रा के कुल किराया का एक तिहाई किराया देना होता है. जिस टिकट में पति-पत्नी और बच्चे शामिल होते हैं. इसके अलावा यदि माता-पिता आश्रित हों, तब उनका नाम भी शामिल होता है, जो यात्रा कर सकते हैं.
पास की लिमिट खत्म, देना होगा किराया
आगे बताया, साल में तीन पास और चार पीटीओ की लिमिट खत्म होने के बाद रेलवे कर्मचारियों को सामान्य यात्रियों की तरह ही रेलवे के नियम के तहत भुगतान करना होता है. 1 साल में पीटीओ और पास की सुविधा स्वत: खत्म हो जाती है. रेलवे के कर्मचारियों को पास और पीटीओ बनाने के लिए रेलवे पहचानपत्र और सेवा प्रमाण पत्र सहित अन्य दस्तावेज रेलवे प्रशासन को देने होते हैं, जिसके बाद ही रेलवे कर्मचारियों के पास जारी होते हैं. दूसरी तरफ सेवा पुस्तिका में जिन सदस्यों का नाम होता है, सिर्फ वही सदस्य ट्रेवल कर सकते हैं.