विधायक जयवर्धन सिंह होंगे कांग्रेस जिलाध्यक्ष: पिता से जिद कर 2011 में पदयात्रा कर राजनीति में आए; कमलनाथ सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे – Guna News

विधायक जयवर्धन सिंह होंगे कांग्रेस जिलाध्यक्ष:  पिता से जिद कर 2011 में पदयात्रा कर राजनीति में आए; कमलनाथ सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे – Guna News


विधायक जयवर्धन सिंह को गुना कांग्रेस जिलाध्यक्ष बनाया गया है।

प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के पुत्र जयवर्धन सिंह गुना जिला कांग्रेस के अध्यक्ष होंगे। शनिवार को कांग्रेस ने प्रदेश में 71 अध्यक्षों की सूची जारी कर दी है। गुना जिला अध्यक्ष बनाए गए जयवर्धन सिंह वर्तमान में राघौगढ़ से विधायक हैं।

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दो महीने पहले कांग्रेस ने आब्जर्वर हर जिले में भेजे थे। उन्होंने नेताओं और कार्यकर्ताओं से मुलाकात कर फीडबैक लिया था। साथ ही रायशुमारी भी की गई थी। हर विधानसभा में पहुंचकर आब्जर्वर ने कार्यकर्ताओं से राय ली थी।

शनिवार को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने जिलाध्यक्षों को घोषणा कर दी है। गुना जिले के कमान जयवर्धन सिंह को सौंपी गई है। वे पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के बेटे हैं। साथ ही वर्तमान में वह राघौगढ़ विधानसभा से विधायक हैं।

जयवर्धन सिंह को कांग्रेस के उभरता हुआ चेहरा माना जा रहा था। वर्तमान में गुना जिले में कांग्रेस में वही एक नेता हैं, जिनकी स्वीकार्यता कांग्रेस में सभी को है। यही कारण रहा कि उन्हें जिले की कमान सौंपी गई है।

वर्ष 2011 में राजनीति में आए जयवर्धन सिंह का जन्म 9 जुलाई 1986 को नई दिल्ली , भारत में दिग्विजय सिंह और आशा देवी के घर हुआ था। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा दून स्कूल , देहरादून से पूरी की और दिल्ली विश्वविद्यालय के श्री राम कॉलेज ऑफ़ कॉमर्स से बी.कॉम (ऑनर्स) की डिग्री प्राप्त की।

बाद में उन्होंने न्यूयॉर्क स्थित कोलंबिया विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ़ इंटरनेशनल एंड पब्लिक अफेयर्स से लोक प्रशासन (डेवलपमेंट प्रैक्टिस) में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की।

जयवर्धन सिंह का राजनीति में पदार्पण वर्ष 2011 में हुआ। उनका राजनीति में आने का किस्सा भी काफी रोचक है। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि अमेरिका से लौटते ही 2011 में उन्होंने पिता के सामने राजनीति में काम करने की इच्छा जताई, लेकिन उनके पिता ने मना करते हुए बेटे से कहा कि तुम राजनीति में नहीं आओगे।

पिता के इस फैसले से नाखुश जयवर्धन ने जिद की कि वह राजनीति में भी अच्छा करेंगे, वह सफल होकर ही दिखाएंगे। अमेरिका से पढ़ाई करने के बाद लौटे बेटे को पिता राजनीति में नहीं देखना चाहते थे।

वर्ष 2018 में नामांकन दाखिल करने पहुंचे जयवर्धन सिंह।

वर्ष 2018 में नामांकन दाखिल करने पहुंचे जयवर्धन सिंह।

पिता दिग्विजय ने बेटे के सामने राजनीति में आने के लिए राघोगढ़ से जुड़ी एक शर्त रख दी। दिग्विजय ने अपने बेटे से कहा कि राजनीति में आने से पहले वह राघोगढ़ की जनता के साथ सात दिन गुजारें। यहां एक-एक परिवार से मिलें, उनकी बात सुनें, उन्हें समझिए।

वह बोले, अगर राघोगढ़ की जनता ने तुम्हें अपना लिया तो तुम राजनीति कर सकते हो। पिता की शर्त के आगे अमेरिका में शिक्षा प्राप्त बेटा राघोगढ़ की सड़कों पर उतर गया। जनता के साथ 7 दिन गुजारने के बाद जयवर्धन अपने पिता के पास लौटे. उन्होंने पिता से कहा कि वह पिछले सात दिनों में राघोगढ़ की जनता से मिल चुके हैं। अब उन्हें राजनीति का हिस्सा बनाया जाए।

बताया जाता है कि जयवर्धन सिंह ने इस शर्त को पूरा करने के लिए कोलुआ गांव से पदयात्रा शुरू की थी। 6 दिनों तक चली इस पदयात्रा में दिग्विजय भी उनके साथ ही थे। जयवर्धन की इस पदयात्रा को ही उनके राजनीति करियर की शुरुआत माना गया।

बेटे का जनता से लगाव देख उन्होंने जयवर्धन को 2013 में राघोगढ़ से ही चुनाव लड़ने दिया। यहां तक कि राघोगढ़ की देखरेख की जिम्मेदारी ही जयवर्धन को सौंप दी।

जयवर्धन सिंह ने पदयात्रा के दौरान लोगों से मुलाकात की थी।

जयवर्धन सिंह ने पदयात्रा के दौरान लोगों से मुलाकात की थी।

2013 में पहला चुनाव लड़े थे जयवर्धन जयवर्धन सिंह ने वर्ष 2013 में राघौगढ़ से पहला चुनाव लड़ा। उन्होंने 59,000 से अधिक मतों के अंतर से जीत हासिल की, जो उस वर्ष राज्य में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के उम्मीदवारों में सबसे अधिक था, और अपने पिता दिग्विजय सिंह की सीट सुरक्षित कर ली।

उन्हें 2018 के चुनाव में फिर से चुना गया और 25 दिसंबर 2018 से 23 मार्च 2020 को सरकार गिरने तक कमलनाथ मंत्रालय में शहरी विकास और आवास मंत्री के रूप में नियुक्त किया गया। 32 साल की उम्र में, सिंह अपने कार्यकाल के दौरान मध्य प्रदेश के इतिहास में सबसे कम उम्र के कैबिनेट मंत्री बने।

हालांकि, वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी हिरेंद्र सिंह ने उन्हें कड़ी टक्कर दी। इस चुनाव में जयवर्धन सिंह मात्र 4500 वोटों से चुनाव जीत पाए।



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