तोप से उड़ाए गए बाप-बेटे! अंग्रेजों के जुल्म से दहला था जबलपुर का चौराहा, जानिए क्यों लिखी गई थी मौत की कहानी”

तोप से उड़ाए गए बाप-बेटे! अंग्रेजों के जुल्म से दहला था जबलपुर का चौराहा, जानिए क्यों लिखी गई थी मौत की कहानी”


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Kranti ki Sachhi Kahani: 1857 की क्रांति में जबलपुर के राजा शंकर शाह और उनके बेटे रघुनाथ शाह को अंग्रेजों ने बीच चौराहे पर तोप से बांधकर उड़ा दिया था. दोनों कविताओं के जरिए लोगों को आज़ादी का संदेश दे रहे थे. य…और पढ़ें

जबलपुर. मध्यभारत के दो राजा शंकर शाह और उनके पुत्र रघुनाथ शाह का ऐसा इतिहास जिसको सुनकर रूँह कांप जाती है. बाप-बेटे का पराक्रम ऐसा था कि अंग्रेजों ने बाप-बेटे दोनों को जबलपुर के मालगोदाम के नजदीक बीच चौराहे में तोप के मुंह में बांधकर उड़ा दिया था. दोनों के चीथड़े उड़ गए थे. लिहाजा आज भी यह तोप संग्रहालय में मौजूद है.

वजह सिर्फ इतनी थी पिता-पुत्र दोनों ने लोगों को जागरूक करने के लिए कविताएं लिखी थी. जहां यह कविताएं 1857 की क्रांति में बिगुल फूंकने लगी थी. अंग्रेजों ने चार दिन तक जेल के भीतर पिता और पुत्र को कैद करके भी रखा लेकिन पिता और पुत्र को अंग्रेजी हुकूमत के आगे अपना सर कटाना कबूल था, लेकिन झुकाना नहीं. चार दिन जेल में भूखे प्यासे रखने के बाद अंग्रेजों ने बाप बेटों को तोप से उड़ा दिया.

52 वीं रेजीमेंट को उड़ाने की रची थी साजिश!

गोंडवाना संघ के अध्यक्ष किशोर लाल भलावी ने लोकल 18 से बताया 19वीं शताब्दी में अंग्रेजों और लॉर्ड डलहौजी की हड़प नीति के खिलाफ पहले स्वतंत्रता संग्राम की भूमिका तैयार हो रही थी. यह जानकारी राजा शंकर शाह और रघुनाथ शाह को भी लगी. जो इस आजादी के आंदोलन में कूद पड़े. जहां मध्य भारत के राजवाड़े परिवार, जमींदार, मालगुजार सहित सभी सेनानी एक हो गए और अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ झंडा बुलंद कर दिया. जहां पिता और पुत्र ने 52 वीं रेजीमेंट को उड़ाने की साजिश रची.

पिता और पुत्र की कविता अंग्रेजों को नहीं आई रास
इसके लिए पिता और पुत्र ने अपनी कविताओं का सहारा लिया. पिता-पुत्र की यह कविताएं देश प्रेमियों को एकजुट कर रही थी. यही बात अंग्रेजों को रास नहीं आई. जिसके चलते अंग्रेजी हुकूमत ने राजा शंकर शाह और रघुनाथ शाह को कैंटोनमेंट एरिया से हटकर रेजीडेंसी में रख दिया. जहां अंग्रेजी हुकूमत ने एक न्याय आयोग बनाकर पिता और पुत्र पर मुकदमा चलाया. यह सुनवाई चार दिन तक चली. जहां सुनवाई के बाद दोनों को फांसी की सजा सुनाई गई. लेकिन यह फांसी की सजा पिता और पुत्र को मंजूर नहीं थी.

देश की यह पहली घटना, सभी को झकझोर दिया था
जिसके बाद पिता और पुत्र की शर्तों पर तोप से उड़ाया गया. संभवत: देश की है पहली घटना थी जो रोंगटे खड़ी कर देती है. जहां दोनों के बलिदान होने के बाद पिता और पुत्र के मांस और हड्डियों के चीथड़े उनकी पत्नियों ने जमा किए. जहां राजा शंकर शाह के छोटे बेटे लक्ष्मण शाह ने अंतिम संस्कार किया. जिसके बाद यह चिंगारी पूरे गोंडवाना साम्राज्य में शोला बन गई और अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ यह लड़ाई और भी तेज हो गई थी.

पिता और पुत्र की लिखी कुछ कविताएं…
मूंद मुख डंडिन को चुगलौं को चबाई खाई,
खूंद डार दुष्टन को शत्रु संहारिका, मार अंगरेज, रेज कर देई मात चंडी,
बचै नाहिं बैरी-बाल-बच्चे संहारिका,
संकर की रक्षा कर, दास प्रतिपाल कर, दीन की पुकार सुन आय मात कालका,
खाइले मलेछन को, झेल नाहि करौ मात, भच्छन तच्छन कर बैरिन कौ कालिका….

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तोप से उड़ाए गए बाप-बेटे! अंग्रेजों के जुल्म से दहला था जबलपुर का चौराहा



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