GMC में एंडोक्राइनोलॉजी विभाग को मंजूरी: ​​​​​​​डायबिटीज और मोटापा का बेहतर इलाज और नई रिसर्च होंगी, नए विशेषज्ञ MP में ही होंगे तैयार – Bhopal News

GMC में एंडोक्राइनोलॉजी विभाग को मंजूरी:  ​​​​​​​डायबिटीज और मोटापा का बेहतर इलाज और नई रिसर्च होंगी, नए विशेषज्ञ MP में ही होंगे तैयार – Bhopal News



गांधी मेडिकल कॉलेज (GMC) में अब औपचारिक रूप से एंडोक्राइनोलॉजी विभाग की स्वीकृति मिल गई है। एक ऐसा कदम जो हार्मोन से जुड़ी बीमारियों के इलाज, रोकथाम और रिसर्च में राज्य के लिए गेमचेंजर साबित हो सकता है।

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GMC प्रदेश का पहला मेडिकल कॉलेज है, जहां यह विभाग शुरू किया जा रहा है। करीब 25 साल से मेडिसिन विभाग के अंतर्गत दो एंडोक्रोनोलॉजिस्ट विशेषज्ञों की पोस्ट थी। यह डॉक्टर ही अस्पताल में डायबिटिक और हार्मोन से जुड़ी समस्या से ग्रसित मरीजों का इलाज कर रहे थे। अब मरीजों की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए यह नई टीम और संरचना तैयार की जा रही है।

विभाग में प्रारंभिक तौर पर 6 डॉक्टर्स और 14 नर्सिंग स्टाफ की पोस्ट रखी गई हैं और स्टाफ भर्ती पूरी होने के बाद विभाग को 2 डीएम (एंडोक्राइनोलॉजी) सीटें प्रदान की जाएंगी। जीएमसी में एंडोक्राइनोलॉजी का अलग विभाग बनने से इलाज स्थानीय, सस्ता और विशेषज्ञता समर्थ होगा। साथ ही छात्रों को बाहर जाकर स्पेशियलिटी सीखने की जरूरत घटेगी।

किस तरह बदलेगा मरीजों का इलाज नया विभाग क्लिनिकल केयर के साथ-साथ मल्टीडिस्पिलनरी टीम डायबेटोलॉजिस्ट, लेबोरेटरी, न्यूट्रीशियनिस्ट, रिप्रोडक्टिव एंड फर्टिलिटी एक्सपर्ट और काउंसलरों को जोड़कर संचालित किया जाएगा। इससे डायबिटीज, थायरॉयड, मोटापा (ओबेसिटी), निस्संतानता (इनफर्टिलिटी) और अन्य हार्मोनल असंतुलनों के लिए समग्र निदान और दीर्घकालिक प्रबंधन संभव होगा। वर्तमान में रोगियों को कई बार अलग-अलग विभागों में भटकना पड़ता था।

रिसर्च और ट्रेनिंग के नए अवसर जीएमसी में डीएम एंडोक्राइनोलॉजी कोर्स शुरू होगा। इससे मध्यप्रदेश के छात्र अब बाहर के राज्यों में स्पेशियलिटी के लिए नहीं जाएंगे। प्रदेश में ही उच्च शिक्षा और प्रशिक्षण उपलब्ध होगा। साथ ही स्थानीय रोग वृत्त (patient cohort) पर आधारित रिसर्च, दवाओं की प्रभावशीलता, जीवनशैली हस्तक्षेप और समुदाय-आधारित रोकथाम योजनाओं पर काम तेजी से संभव होगा। मोटापा व डायबिटीज के बढ़ते बोझ के कारण यह रिसर्च न सिर्फ क्लिनिकल बल्कि पब्लिक हेल्थ के लिहाज से भी महत्वपूर्ण होगा।

एंडोक्राइनोलॉजी विभाग की बढ़ी डिमांड

  • एंडोक्राइन रोग सिर्फ हार्मोन तक सीमित नहीं है। ये दिल, किडनी, नर्वस सिस्टम और प्रजनन क्षमता सहित कई अंगों को प्रभावित करते हैं। उदाहरण के लिए, बेकाबू डायबिटीज से नेफ्रोपैथी और कार्डियोवस्कुलर रोग का जोखिम बढ़ता है।
  • मोटापा इंसुलिन प्रतिरोध बढ़ाकर टाइप-2 डायबिटीज को बढ़ावा देता है। भारत में शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में मोटापा तेजी से बढ़ रहा है और यह डायबिटीज कैपिटल बनने के कारणों में एक बड़ा फैक्टर है।
  • गर्भधारण में हार्मोन संतुलन का अहम रोल है। थायरॉयड और प्रोलेक्टिन जैसे हार्मोन्स में विकार निस्संतानता का कारण बन सकते हैं। विशेषज्ञों द्वारा लक्षित उपचार से सफलता दर बढ़ती है।



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